बरेली पुलिस ने 52 जोड़ों के रिश्तों को दी नई जिंदगी, टूटते परिवारों में लौट आई खुशहाली
-आरके सिंह- बरेली। आज के तेज़ रफ्तार और तनाव भरे समाज में जब परिवारों के टूटने की खबरें आम हो गई हैं, तब बरेली के आंवला में पुलिस ने एक ऐसा अनोखा कदम उठाया है, जिसने 52 परिवारों को टूटने से बचाकर रिश्तों को नया जीवन दिया है। यह कहानी है पुलिस मध्यस्थता परामर्श केंद्र की, जहां संवेदनशीलता, समझदारी और काउंसलिंग की ताकत ने परिवारों को फिर से जोड़ा है।
आंवला थाना पर शुरू किए गए पुलिस मध्यस्थता परामर्श केंद्र की नव गठित समिति ने कुल 85 पारिवारिक विवाद पंजीकृत किए, जिनमें से 52 मामलों का सफलतापूर्वक सुलह कराते हुए पति-पत्नी को गले मिलवाया गया और खुशहाली के साथ घर भेजा। इसका मतलब यह हुआ कि 61.17% विवादों का निस्तारण हो चुका है, जबकि बाकी 33 मामले विचाराधीन हैं और समझौते की प्रक्रिया जारी है।
अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) आईपीएस अंशिका वर्मा ने बताया कि परिवार परामर्श केंद्र का शुभारंभ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य की विशेष पहल पर किया गया। उन्होंने कहा, आज के समय में पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं, जिससे न केवल घर टूट रहे हैं बल्कि समाज में भी अशांति फैल रही है। इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य इन्हीं परिवारों को बचाना और महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा देना है। काउंसलिंग, मध्यस्थता और जागरूकता के जरिये हम पारिवारिक विवादों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
इस केंद्र के संचालन के लिए 8 सदस्यीय परिवार परामर्श समिति गठित की गई है, जिसमें समाज के सम्मानित नागरिकों के साथ-साथ पुलिस परिवार की महिलाकर्मी भी शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष जय गोविंद सिंह के नेतृत्व में, अधिवक्ता रमाकान्त तिवारी, श्रीमती रजिया सुल्तान, श्रीमती शोरवी अग्रवाल, रामदीन सागर, अधिवक्ता योगेश माहेश्वरी, पुलिस टीम की किरन मनी, दयावती, नितिन कुमार (क्षेत्राधिकारी) और कुंवर बहादुर सिंह (थाना प्रभारी) मिलकर इस पहल को सफल बना रहे हैं।
यह केंद्र केवल विवादों का समाधान नहीं करता, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी परिवारों को सहारा देता है। जब पति-पत्नी के बीच की दूरियां कम होती हैं और वे फिर से एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तो वह माहौल बेहद खुशनुमा और प्रेरणादायक होता है। यह केन्द्र परिवारों में विश्वास और समझदारी की नींव मजबूत करता है।
अंशिका वर्मा ने कहा, हमारा प्रयास है कि हर विवाद को अदालत के रास्ते पर न ले जाकर, समझौते और संवाद से समाधान किया जाए। इससे परिवार टूटते नहीं, रिश्ते मजबूत होते हैं और समाज में शांति बनी रहती है।