बरेली उपद्रव मामला: चार घंटे की रिमांड पर लाया गया आरोपी नदीम खान, छावनी में बदला शहर
-रमेश कुमार सिंह- बरेली। बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए भीषण उपद्रव से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में दंगा मामले के प्रमुख आरोपी और आईएमसी से जुड़े नेता नदीम खान को शनिवार को पुलिस ने चार घंटे की कस्टडी रिमांड पर लिया। इस दौरान जेल से जिला अस्पताल मेडिकल और फिर आवास तक पूरे मार्ग पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। हालात ऐसे रहे कि अस्पताल से लेकर प्रमुख सड़कों तक पूरा इलाका अस्थायी रूप से छावनी में तब्दील नजर आया।
पुलिस वाहनों के काफिले के साथ नदीम खान को जिला अस्पताल लाया गया, जहां मेडिकल परीक्षण के दौरान पीएसी, कई थानों की पुलिस फोर्स और क्षेत्राधिकारी तैनात रहे। सुरक्षा को देखते हुए कुछ प्रमुख मार्गों पर आम नागरिकों की आवाजाही भी नियंत्रित की गई। पूरे ऑपरेशन की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी स्वयं करते रहे।
एएसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि यह कार्रवाई 26 सितंबर को बरेली में हुए बवाल से जुड़े मामलों के तहत की जा रही है। इस उपद्रव को लेकर अब तक कुल 12 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। रिमांड के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है और दंगा भड़काने की साजिश से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में आने वाले समय में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, थाना कोतवाली में लियाकत अली की शिकायत पर दर्ज एक मुकदमे की जांच के दौरान बड़ा तथ्य सामने आया। जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के नाम से एक पत्र वायरल किया गया था, जिस पर उसके वास्तविक हस्ताक्षर नहीं थे। यह पत्र कूट रचना के जरिए तैयार किया गया और इसे प्रशासन व मीडिया को गुमराह करने के उद्देश्य से जानबूझकर प्रसारित किया गया।
कोर्ट से मिली चार घंटे की रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपी के आवास से वही मूल पत्र बरामद कर लिया है, जिसे जांच का अहम साक्ष्य माना जा रहा है। अब पुलिस इस फर्जी दस्तावेज़ के पीछे की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पुलिस विवेचना में यह भी सामने आया है कि 26 दिसंबर 2025 को कानपुर में उपजे ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद के दौरान मौलाना के आह्वान पर भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे और शहर में दंगा भड़काने की कोशिश की गई थी। इस मामले में बारादरी, प्रेमनगर किला, कोतवाली और कैंट थानों में दस मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें मौलाना को नामजद किया गया था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि मौलाना ने साजिश रचकर उपद्रव कराया और अपने करीबी आईएमसी महासचिव नफीस खां, पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां व मुनीर इदरीशी को भीड़ जुटाने और पुलिस पर हमला कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद मौलाना को गिरफ्तार कर प्रशासनिक आधार पर फतेहगढ़ जेल भेजा गया, जबकि नफीस खां, नदीम खां समेत करीब 90 अन्य आरोपियों को स्थानीय जेल में निरुद्ध किया गया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी को देखकर इलाके में लोगों के बीच चर्चाओं का दौर चलता रहा। कोई कहता रहा कि नदीम के पिता की तबीयत खराब है, इसलिए अस्पताल लाया गया है, तो कोई इसे किसी बड़े खुलासे से जोड़ता रहा। काफी देर तक क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म रहीं।
फिलहाल पुलिस आज भी नदीम खान को कड़ी सुरक्षा के बीच उसके आवास पर ले जाकर सबूत जुटाने में लगी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।