127 साल पुरानी लूटी विरासत की वापसी की जंग, हांगकांग नीलामी से भारत ने बचाए बुद्ध को अर्पित 334 रत्न
1898 में ब्रिटिश अफसर विलियम पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु से चुराए गए भगवान बुद्ध को अर्पित 334 रत्नों की हांगकांग में होने वाली नीलामी भारत सरकार ने 7 मई 2025 को रुकवा दी। रिटायर्ड डीजीपी व पूर्व राज्यसभा सदस्य बृजलाल के प्रयासों से विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और एएसआई की संयुक्त पहल में सोथबीज़ को नोटिस भेजा गया। यह वही रत्न हैं जिन्हें अंग्रेज अफसर चुपचाप इंग्लैंड ले गया था। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से अब तक 640 से अधिक प्राचीन भारतीय धरोहरें विदेशों से भारत लौट चुकी हैं।
-127 वर्ष पूर्व धरती से निकले 334 रत्न चुरा ले गया था अंग्रेज अफसर पेप्पे, उसका प्रपौत्र इनकी नीलामी कर रहा था
-चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार-
मथुरा। रिटायर्ड डीजीपी व राज्यसभा सदस्य बृजलाल के प्रयासों से 07 मई 2025 को भारत की कुछ प्राचीन धरोहरों को हांगकांग में नीलामी से बचा लिया गया। हांगकांग में सोथबीज़ (Sotheby’s) द्वारा 334 प्राचीन रत्न व अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की नीलामी की जा रही थी। इसकी भनक लगते ही भारत सरकार ने 07 मई को युद्ध की व्यस्तताओं के बीच हांगकांग प्रशासन से हस्तक्षेप कर उस नीलामी को स्थगित करवा दिया।
सोथबी हांगकांग द्वारा तथागत बुद्ध को अर्पित किए गए 100 करोड़ से अधिक कीमत के आभूषणों एवं रत्न जैसे नीलम, माणिक, पुखराज, मोती, सोना आदि की नीलामी होनी थी। फिलहाल इसके मालिक विलियम पेप्पे के परपोते क्रिस पेप्पे हैं।
दरअसल 127 साल पहले वर्ष 1898 में ब्रिटिश अफसर 'विलियम क्लॉक्सटन पेप्पे' ने कपिलवस्तु (यूपी) के पिपरहवा गांव में खुदाई करवायी थी। खुदाई में बौद्ध काल के रत्न व बहमूल्य वस्तुएं जमीन में से निकली थीं। अंग्रेज अफसर ने उन बहुमूल्य वस्तुओं को हड़प लिया था और चुपचाप अपने घर इग्लैंड ले गया था। उन्हीं वस्तुओं को उस अंग्रेज के प्रपौत्र व अन्य परिजन चुपके से हांगकांग लाये। धन कमाने की नीयत से उन लोगों ने नीलामी की प्रकिया शुरु कराई।
इस बीच राज्यसभा सदस्य बृजलाल को जानकारी मिली। उन्होने संस्कृति मंत्रालय, पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और विदेश मंत्रालय ने मिलकर नीलामी रुकवा दी।
सोथबीज़ और अंग्रेज पेप्पे के परिवार को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है, जिसमें नीलामी को रोक कर उन रत्न धरोहर की भारत वापसी का दबाब बनाया है।
उल्लेखनीय है कि आजादी से पहले और बाद में समय-समय पर भारत से चुरा कर ले जाई गईं प्रतिमाएं व अन्य पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं की वापसी के लिए पीएम मोदी के वर्ष 2014 से ही प्रयास करते रहे हैं। जिस देश में गये वहां बातचीत का एक बिंदु प्राचीन धरोहरों की वापसी का भी रहा। यह भी उल्लेखनीय है कि जहां से जमीन में वे वस्तुएं मिलीं, उसी इलाके में सांसद बृजलाल का गांव है। 1992-94 में जब वह आगरा में एसएसपी, डीआईजी थे, तब आगरा अमर उजाला में क्राइम रिपोर्टर होने के कारण अच्छी मित्रता हो गयी थी।
पीएम मोदी ने निजी रुचि लेकर वर्ष 2014 से अब तक विदेश से कुल 640 प्राचीन मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ वापस कराई हैं। ये विगत में तस्करी कर विदेश ले जाई गई थीं। अकेले अमेरिका से अब तक 578 कलाकृतियां लौटवायी गई हैं।
वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी सरकार ने 297 अमूल्य प्राचीन वस्तुएं व प्रतिमाएं भारत को सौंपीं थीं। ये वहां के सरकारी व निजी संग्रहालयों में रखी थीं। इनमें अनेक वस्तुएं ईसा पूर्व तक की हैं। तस्करों द्वारा टेराकोटा की अनेक कलाकृतियां पूर्वी भारत से ले जाई गई थीं। पत्थर, अन्य धातु, लकड़ी और हाथीदांत से बनी वस्तुएं भी वहां से लौटी हैं। ये सब भारत के विभिन्न हिस्सों से चुरा कर व तस्करी कर ले जायी गई थीं।
10वीं व 11वीं सदी की मध्य भारत की बलुआ पत्थर में बनीं अप्सरा की कई मूर्तियां भी अमेरिका में मिली हैं।
15वीं व 16वीं सदी के मध्य भारत में निर्मित कांस्य की जैन तीर्थांकर की प्रतिमाएं भी लौटी हैं। तीसरी व चौथी सदी में बना पूर्वी भारत का टेराकोटा फूलदान, पहली सदी व ईसा पूर्व पहली सदी की दक्षिण भारत में बनी पत्थर की मूर्तियां, 17 वीं और 18वीं सदी में बनी दक्षिण भारत की कांस्य की भगवान गणेश की प्रतिमा, 15वीं व 16वीं सदी की उत्तर भारत की बलुआ पत्थर में बनी खड़े हुए भगवान बुद्ध की मूर्ति, 17वीं व 18वीं सदी की पूर्वी भारत में बनीं कांस्य की भगवान विष्णु की मूर्ति भी लौटाई गई हैं।
ईसा पूर्व की उत्तर भारत की तांबे में बनी मानव आकृति, 17वीं व 18वीं सदी की दक्षिण भारत की कांस्य में बनी भगवान कृष्ण की मूर्ति, 13वीं व 14वीं सदी की दक्षिण भारत की ग्रेनाइट में बनी कार्तिकेय की मूर्ति भी लौटी हैं।
अमेरिका के अलावा यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड) ने 16 और ऑस्ट्रेलिया ने 40 प्राचीन कलाकृतियां वापस की हैं। ज्यादातर कलाकृतियों को कोलकाता म्यूजियम में रखवाया गया है।
सनातन, बौद्ध व जैन धर्म की नगरी मथुरा टीले पर बसी एक प्राचीन नगरी है। यहां बेशुमार मूर्तियां निकलीं। विगत में उनकी खूब तस्करी हुई। अब इंतजार है मथुरा की वे मूर्तियां वापस मिलें।