आगरा कॉलेज की 340 बीघा भूमि पर बाउंड्री निर्माण शुरू, अतिक्रमणकारियों की नींद उड़ाई
आगरा। ऐतिहासिक आगरा कॉलेज की 340 बीघा भूमि को अतिक्रमणमुक्त और सुरक्षित करने की दिशा में आज बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया। वर्षों से उपेक्षा और अराजक तत्वों की गिद्ध दृष्टि का शिकार रही कॉलेज भूमि पर बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य सोमवार से शुरू हो गया। इसका विधिवत शुभारंभ प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने किया।
नालबंद चौराहा और प्राचार्य निवास के पीछे क्षतिग्रस्त हिस्से पर जेसीबी मशीनों ने नींव की खुदाई शुरू की। भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में यह कार्यवाही हुई, ताकि कोई भी अतिक्रमणकारी या बाधा डालने वाला तत्व सक्रिय न हो सके। पुलिस प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने निर्माण कार्य को निर्बाध और शांतिपूर्ण रखा।
मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त के आदेश पर यह कार्यवाही संभव हो सकी। इससे पहले राजस्व विभाग ने भूमि अभिलेखों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया कि कॉलेज की जमीन वैध और सुरक्षित रूप से कॉलेज प्रशासन के स्वामित्व में है।
प्राचार्य प्रो. सीके गौतम ने कहा कि कॉलेज की भूमि की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाउंड्री वॉल बनने के बाद छात्रों के हित में विकास योजनाएं गति पकड़ेंगी और अतिक्रमणकारियों का खेल हमेशा के लिए खत्म होगा।
उन्होंने कहा कि यह कदम आगरा कॉलेज की द्विशताब्दी वर्षगांठ पर प्रस्तावित नौ विकासपरक योजनाओं की कड़ी का हिस्सा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बहुमंजिला द्विशताब्दी वर्ष आचार्य चाणक्य परीक्षा भवन है, जिसमें एक साथ 3–4 हजार विद्यार्थी परीक्षा दे सकेंगे। साथ ही 1,000 विद्यार्थियों हेतु कम्प्यूटरीकृत परीक्षा केंद्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की भी स्थापना की जाएगी।
प्रिंसिपल प्रो. गौतम ने कहा कि कॉलेज की भूमि वर्षों से अतिक्रमण का शिकार रही है। नाले के पार अवैध रूप से बने भवनों को हटाने की भी प्रक्रिया शुरू होगी। प्राचार्य ने साफ कहा कि अब कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्टाफ क्लब के सचिव प्रो. विजय सिंह और उनकी कार्यकारिणी ने इसे कॉलेज की गौरवशाली धरोहर की सुरक्षा में मील का पत्थर बताते हुए प्राचार्य प्रो. गौतम का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर उप-प्राचार्य प्रो. पीबी झा, प्रो. भूपाल सिंह, प्रो. शशिकांत पांडे, प्रो. भूपेंद्र कुमार चिकारा, डॉ. गौरव कौशिक, प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. भूपेंद्र सिंह, प्रो. अशोक कुमार सिंह, डॉ. शिव कुमार सिंह, डॉ. अनुराग पालीवाल, डॉ. पीके दीक्षित, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, डॉ. एसएस खिरवार, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. दिग्विजय नाथ राय, प्रो. संतोष कुमार सिंह समेत सभी प्राध्यापक और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने जेसीबी से शुरू हुए कार्य को ऐतिहासिक क्षण मानते हुए इसे कॉलेज की धरोहर रक्षा का निर्णायक कदम बताया।
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