शारदा विवि में शिक्षकों के शोध पर हुआ मंथन
आगरा। मानव अनुवांशिकी और कैंसर जीव विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक पद्म श्री प्रोफ़ेसर रामेश्वर नाथ कॉल बामजेई ने कहा कि हमारा दायित्व है विश्वविद्यालय के शिक्षकों को अनुसंधान के क्षेत्र में मार्गदर्शन कर उन्हें अनुसंधान के क्षेत्र में निपुण बनाना। जिससे अनुसंधान एवं शोध को बढ़ावा मिल सके। अनुसंधान के लिए विषयों के चयन के अलावा, एक शोधकर्ता के पास अनुसंधान अध्ययन करने के लिए कुछ गुण और क्षमता हो।
प्रो. बामजेई ने शारदा विवि द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि शोधकर्ता को खुले विचारों वाला होना चाहिए। उसे सोचने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी अपनाना चाहिए। इसके अलावा उसे मेहनती, केंद्रित और अपनी रुचि के विशिष्ट क्षेत्र के प्रति समर्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है, वे अपने नागरिकों को शारीरिक, भावनात्मक, व्यावहारिक और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करें।
विवि के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डीन प्रोफेसर डा. विमल कुमार सरकार ने बताया बैठक का उद्देश्य अनुसंधान के लिए संसाधन जुटाना। अनुसंधान एवं सुविधाओं को बढ़ावा देना। अत्यधिक अनुसंधान एवं विकास के लिए एक परिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना। अनुसंधान प्रकाशन एवं पुरस्कार, कंसलटेंसी, विस्तार गतिविधियां एवं सहयोग को बढ़ावा देना है।
उन्होंने विश्वविद्यालय में अनुसंधान के लिए क्या करना चाहिए। क्या-क्या होना चाहिए। कैसे होना चाहिए के बारे में विस्तार से समझाया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. जयंती रंजन ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि मानव समाज में प्रगति के लिए अनुसंधान आवश्यक है। यह मनुष्य होने के नाते अपने जीवन को बेहतर बनाने और अपने आसपास की दुनिया को नियंत्रित करने की हमारी सहज इच्छा से उपजता है। ऐसा करने के लिए हमें अपनी समझ और अंतर्दृष्टि को बेहतर बनाना होगा। हमें यह जानना होगा कि चीज़ें कैसे काम करती हैं या नहीं करतीं। ताकि हम उनका उपयोग करने के अलग-अलग तरीके खोज सकें या उन्हें और अधिक कुशल बना सकें।