जातिवाद की दीवार तोड़ने के लिए श्रीराम वन गमन पथ यात्रा पर निकले आगरा के डॊ. मुकेश चौहान, अयोध्या से लंका तक 20 हजार किलोमीटर की सोलो राइड
आगरा। भगवान श्रीराम की मर्यादा, त्याग, करुणा और सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित श्रीराम वन गमन पथ यात्रा का 16 जनवरी को आगरा में भव्य और भावपूर्ण शुभारंभ हुआ। सेठ पदम चंद जैन प्रबन्ध संस्थान, खंदारी से शुरू हुई यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि जातिवाद, सामाजिक विभाजन और नैतिक पतन के विरुद्ध एक सशक्त सांस्कृतिक संदेश भी देकर आगे बढ़ी।
श्रद्धा, उत्साह और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा आगरा
यात्रा के शुभारंभ अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, रामभक्त, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जय श्रीराम के गगनभेदी उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया और पूरे परिसर में धार्मिक ऊर्जा का संचार दिखाई दिया।
जातिवाद देश की सबसे गहरी पीड़ा : डॉ. मुकेश चौहान
इस ऐतिहासिक यात्रा के सोलो राइडर डॉ. मुकेश चौहान ने कहा कि आज भारत की सबसे गहरी और पीड़ादायक समस्या जातिवाद है, जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करती है। जबकि हमारी सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान न ऊंच-नीच देखी, न जाति और न ही वर्ग। केवट, शबरी, निषादराज और ऋषि-मुनियों के साथ उनका व्यवहार समान, करुणामय और सम्मानपूर्ण रहा। श्रीराम ने कर्म, भक्ति और मानवता को सर्वोच्च माना।
डॉ. चौहान ने कहा कि यह यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि पहचान जाति से नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा और चरित्र से होती है। यह राम वन गमन पथ यात्रा समाज को जोड़ने का कार्य कर रही है और जातिवाद की दीवारों को तोड़ने का संकल्प दिलाती है।
200–300 राम वनवास स्थलों को किया गया चिन्हित
डॉ. मुकेश चौहान ने भावुक होते हुए बताया कि वे बचपन से ही भगवान श्रीराम के जीवन से अत्यधिक प्रभावित रहे हैं। रामलीला देखने के दौरान उनके मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि भगवान राम ने वनवास काल में किन-किन स्थानों पर समय बिताया।
इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने राम वन गमन पथ के लगभग 200 से 300 प्रमुख स्थलों को चिन्हित किया है। इस यात्रा के माध्यम से वे इन स्थलों पर जाकर आस्था को सुदृढ़ करने और आत्मिक अनुभव प्राप्त करने का संकल्प लेकर निकले हैं।
अयोध्या से लंका तक 20 हजार किलोमीटर की सोलो राइड
यात्रा संयोजक नवीन अग्रवाल ने बताया कि जैसे गोवर्धन की सात कोस परिक्रमा या ब्रज की 84 कोस यात्रा भगवान कृष्ण के सान्निध्य का अनुभव कराती है, वैसे ही श्रीराम वन गमन पथ यात्रा भगवान श्रीराम के पदचिन्हों को स्पर्श करने का एक आधुनिक माध्यम है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या से लंका तक लगभग 20,000 किलोमीटर की यह सोलो राइड सनातन संस्कृति के प्रति नई जागृति का शंखनाद है। इस यात्रा का उद्देश्य भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े ऐतिहासिक और पावन स्थलों की स्मृति को सजीव करना, युवाओं को भारतीय संस्कृति, मूल्यों और आदर्शों से जोड़ना तथा सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव को सशक्त करना है।
मूल्यहीनता से बढ़ रहे मानसिक-शारीरिक कष्ट : डॉ. मुकेश गोयल
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों में आई गिरावट ही आज शारीरिक और मानसिक कष्टों का बड़ा कारण बनती जा रही है। यदि मूल्यों का क्षरण होगा तो जीवन असंतुलित हो जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा विशेष रूप से युवाओं में मूल्यबोध का पुनर्जागरण करेगी।
बच्चों में सनातन भाव विकसित करना आवश्यक : प्रो. एके गुप्ता
आगरा के वरिष्ठ फिजीशियन प्रोफेसर ए.के. गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में समाज में सनातन भाव पहले से अधिक प्रबल हुआ है। यदि बच्चों में प्रारंभ से ही यह भाव विकसित किया जाए तो समाज निश्चित रूप से चरित्रवान बनेगा। उन्होंने इस यात्रा को हिंदी और हिंदू संस्कृति के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बताया।
छह महीने की तैयारी, सामाजिक संगठनों का सहयोग : डॉ. अनुपम गुप्ता
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम गुप्ता ने बताया कि इस यात्रा की योजना पिछले छह महीनों से सामाजिक संगठनों के सहयोग से तैयार की जा रही थी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुकेश चौहान की दृढ़ इच्छाशक्ति और रोटरी क्लब सहित अन्य संगठनों के सहयोग से यह यात्रा आज साकार रूप ले सकी है।
इतिहास और शोध के लिए नए द्वार खोलेगी यात्रा : महंत योगेश पुरी
मुख्य अतिथि मनःकामेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर महंत योगेश पुरी ने कहा कि ब्रह्म की जिज्ञासा से ही ब्रह्म की प्राप्ति होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा इतिहास के शोधार्थियों के लिए नए शोध विषयों के द्वार खोलेगी।
यह केवल राम की नहीं, हर भारतवासी की यात्रा : कुलपति प्रो. आशु रानी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने कहा कि यह यात्रा केवल भगवान राम की नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी के अस्तित्व की यात्रा है। भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में यह यात्रा एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि इतिहास, साहित्य, संस्कृति और चिकित्सा सहित अनेक क्षेत्रों के शोधार्थियों के लिए यह यात्रा अपार संभावनाएं लेकर आएगी।
कार्यक्रम का संचालन और उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन सेठ पदम चंद जैन प्रबन्ध संस्थान के निदेशक प्रो. ब्रजेश रावत ने किया। इस अवसर पर डॉ. शरद गुप्ता, डॉ. शिखा गुप्ता, आगरा रॉयल के मनोज जादौन, जतिन अग्रवाल, रोटरी क्लब ऑफ आगरा की उप-मण्डलाध्यक्ष प्रो. दीपा रावत, डॉ. श्वेता चौधरी, पूजा अग्रवाल, प्रखर अग्रवाल, संचिता अग्रवाल, गोपाल भाई कपड़े वाले, विजय कुमार, प्रदीप पुरी, प्रो. बिन्दु शेखर शर्मा, प्रो. भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. एस.के. जैन, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के महामंत्री अरविन्द गुप्ता, सुनील कपूर, डॉ. बी.एस. चौहान, डॉ. सुमंत सिंह, अमित अग्रवाल, डॉ. सी.पी. गुप्ता, श्री कपिल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।