भाई बना भेदी, भतीजे ने ली जान: संपत्ति विवाद में दोहरे हत्याकांड का 24 घंटे में पर्दाफाश, चारों आरोपी दबोचे

आगरा। किरावली थाना क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने महज 24 घंटे में खुलासा कर दिया। इस दिल दहला देने वाली वारदात के पीछे कोई और नहीं, बल्कि मृतक का सगा भाई और भतीजा ही निकले। संपत्ति के विवाद में अंधे होकर उन्होंने ऐसी साजिश रची, जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति की भी जान चली गई। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोहरे हत्याकांड का सफलतापूर्वक खुलासा करने वाली पुलिस टीम को सम्मानित करने की घोषणा की गई है।

Jul 15, 2025 - 22:16
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भाई बना भेदी, भतीजे ने ली जान: संपत्ति विवाद में दोहरे हत्याकांड का 24 घंटे में पर्दाफाश, चारों आरोपी दबोचे
किरावली क्षेत्र के दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते डीसीपी पश्चिमी अतुल शर्मा। चित्र में वे चारों आरोपी भी हैं, जिन्होंने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया।  

नहर किनारे मिले थे दो शव, इलाके में मचा था हड़कंप

सोमवार सुबह गांव पुरामना के पास नहर किनारे दो शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। मृतकों की पहचान 38 वर्षीय नेत्रपाल पुत्र चंद्रभान और कृष्णपाल उर्फ केपी पुत्र लालाराम के रूप में हुई। दोनों ही थाना अछनेरा क्षेत्र के गांव अरदाया के रहने वाले थे। नेत्रपाल के हाथ-पैर बंधे मिले और दोनों के सिर पर लोहे की रॉड से वार किए गए थे। घटनास्थल से गुटखा, शराब, डिस्पोजल ग्लास और पानी के पाउच भी बरामद हुए थे, जिससे यह प्रतीत हुआ कि वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।

भाई–भतीजे ने रची थी खौफनाक साजिश

पुलिस पूछताछ में जो सच सामने आया, वह रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला था। कृष्णपाल उर्फ केपी का अपने बड़े भाई अजयपाल से पैतृक संपत्ति को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा था। पंचायतें भी हुईं लेकिन अजयपाल फैसले मानने को तैयार नहीं था। इसी खुन्नस में अजयपाल ने अपने बेटे बाबूलाल के साथ मिलकर केपी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

फोन पर बुलाया, फिर लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मार डाला

डीसीपी अतुल शर्मा के अनुसार, अजयपाल ने पहले कृष्णपाल को फोन कर बुलाया। कृष्णपाल जब अपने साथी नेत्रपाल के साथ पहुंचा, तो वहां पहले से बाबूलाल के साथ गांव के ही मनीष और धनिष मौजूद थे। सबसे पहले दोनों पर फायरिंग की गई, लेकिन वे बच गए। इसके बाद हमलावरों ने लोहे की रॉड से उनके सिर पर जानलेवा वार किए। दोनों वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

नेत्रपाल को मारना नहीं था मकसद, मगर बन गया शिकार

जांच में खुलासा हुआ कि नेत्रपाल इस साजिश का हिस्सा नहीं था। वह केवल कृष्णपाल के साथ गया था। हालांकि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नेत्रपाल एक हिस्ट्रीशीटर था और उस पर किरावली थाने में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। लेकिन हत्यारों का असली निशाना केवल केपी था, नेत्रपाल की हत्या केवल घटनास्थल पर मौजूदगी की वजह से हो गई।

पैसों में खरीदे गए कातिल

डीसीपी ने यह भी बताया कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए अजयपाल और बाबूलाल ने मनीष और धनिष को पैसे दिए थे। हत्या के पीछे मुख्य मकसद पैतृक जमीन पर अकेले कब्जा जमाना था।

गिरफ्तारी के बाद टूटा भतीजा, कबूल किया जुर्म

पुलिस ने सोमवार देर रात बाबूलाल को हिरासत में लिया और थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की। आखिरकार वह टूट गया और पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। उसकी निशानदेही पर अजयपाल, मनीष और धनिष को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

इस जघन्य हत्याकांड का तेज़ी से खुलासा करने वाली पुलिस टीम की डीसीपी अतुल शर्मा ने सराहना की और उनके लिए पुरस्कार की घोषणा की गई है।

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SP_Singh AURGURU Editor