आईवीआरआई में शुरू हुआ हृदय रोग विज्ञान प्रशिक्षण, पशु चिकित्सक सीख रहे उपचार का हुनर

-आरके सिंह- बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई), इज्जतनगर में सोमवार को ‘हृदय रोग विज्ञान’ विषय पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस प्रशिक्षण में देशभर से आए युवा पशु चिकित्सकों को हृदय रोगों के आधुनिक निदान, उपचार तकनीक और क्लिनिकल प्रबंधन की गहन जानकारी दी जा रही है। उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने निरंतर ज्ञान अद्यतन और व्यावहारिक अनुभव को पशु चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का मूल मंत्र बताया।

Nov 10, 2025 - 21:09
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आईवीआरआई में शुरू हुआ हृदय रोग विज्ञान प्रशिक्षण, पशु चिकित्सक सीख रहे उपचार का हुनर
आईवीआरआई बरेली में सोमवार से प्रारंभ हुए पशु चिकित्सकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे डॊक्टर्स।

कार्यक्रम का उद्घाटन कोर्स निदेशक एवं वन्यजीव तथा पॉलीक्लिनिक प्रभारी डॉ. एम. पी. पावड़े ने किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक का ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह हमारे मस्तिष्क में सक्रिय रहे। जैसे हमारी माताएँ रोज़ चाकू को तेज करती हैं, वैसे ही हमें भी अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों के लिए हृदय रोगों की पहचान और उनके उपचार की तकनीकों को सीखने का उत्कृष्ट अवसर है।

औषधि विभागाध्यक्ष डॉ. डी. बी. मंडल ने कहा कि किसी भी रोग के उपचार से अधिक महत्वपूर्ण उसका सटीक निदान है। असली विशेषज्ञ वही है जो समस्या की जड़ को पहचान सके।  उन्होंने प्रतिभागियों को केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करने तक सीमित न रहकर व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने की सलाह दी।

शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. किरनजीत सिंह ने कहा कि किसी भी प्रमाणपत्र का मूल्य तभी है जब उसके पीछे ठोस ज्ञान और सकारात्मक दृष्टिकोण हो। उन्होंने प्रशिक्षण अवधि में विशेषज्ञों से संवाद और अनुभव अर्जन पर बल दिया।

डॉ. संजीव मेहरोत्रा (जानपादिक रोग विभाग) ने कहा कि पशुओं में पाए जाने वाले हृदय रोगों के लक्षण कई बार मनुष्यों के समान होते हैं- जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय विकार। उन्होंने कहा कि हृदय रोग विज्ञान एक उभरता हुआ क्षेत्र है, और इसमें निपुणता के लिए निरंतर अध्ययन और अभ्यास आवश्यक है।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को इकोकार्डियोग्राफी, ईसीजी, बायोमार्कर्स, डॉप्लर तकनीक, थोरैसिक रेडियोग्राफी और पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल युवा पशु चिकित्सकों के ज्ञान को अद्यतन करेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक क्लिनिकल निर्णय लेने में दक्ष बनाएगा।

इस अवसर पर डॉ. यू. के. डे (औषधि विभाग) ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रघुवरन ने प्रस्तुत किया।

संस्थान के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और प्रशिक्षुओं ने इस अवसर पर कार्यक्रम के उद्देश्यों की सराहना करते हुए इसे पशु चिकित्सा विज्ञान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

SP_Singh AURGURU Editor