फर्जी मेडिकल से मुकदमे में फंसाने का आरोप, जे़डी हॉस्पिटल के डॉक्टरों और संचालक समेत पांच पर मुकदमा

आगरा में 28 अक्टूबर 2021 की मारपीट की घटना से जुड़े मेडिकल दस्तावेजों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। फर्जी मेडिकल तैयार कराकर मुकदमे में फंसाने के आरोप में जे़डी हॉस्पिटल के डॉक्टरों और संचालक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता का आरोप है कि अनिल कुमार की मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर और खून का थक्का दर्शाया गया, जबकि एसएन मेडिकल कॉलेज की दोबारा जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई। डीएम के निर्देश पर हुई जांच में भी रिपोर्ट सामान्य आने का दावा है। पुलिस अब मेडिकल रिकॉर्ड, सीटी स्कैन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी।

Sep 11, 2026 - 01:15
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फर्जी मेडिकल से मुकदमे में फंसाने का आरोप, जे़डी हॉस्पिटल के डॉक्टरों और संचालक समेत पांच पर मुकदमा
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28 अक्टूबर 2021 की मारपीट के मामले में मेडिकल रिपोर्ट पर उठे सवाल, दोबारा जांच में फ्रैक्चर और खून का थक्का नहीं मिलने का दावा, अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया केस

आगरा। एक पुराने मारपीट के मुकदमे में तैयार कराई गई मेडिकल रिपोर्ट अब खुद जांच के घेरे में आ गई है। फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराकर एक व्यक्ति को मुकदमे में फंसाने की साजिश रचने के आरोप में जे़डी हॉस्पिटल के डॉक्टरों और संचालक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला 28 अक्टूबर 2021 की घटना से जुड़ा है, जिसमें अनिल कुमार के मेडिकल दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि मारपीट के मामले को गंभीर रंग देने के लिए मेडिकल रिपोर्ट में चोटों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया और इसी आधार पर दूसरे पक्ष को कानूनी कार्रवाई में फंसाने का प्रयास किया गया।

मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर और खून का थक्का, दोबारा जांच में नहीं मिला

मामले में सबसे गंभीर सवाल उस समय सामने आया, जब अनिल कुमार की मेडिकल रिपोर्ट से संबंधित चोटों की दोबारा जांच कराई गई। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि एसएन मेडिकल कॉलेज में दोबारा हुई जांच में फ्रैक्चर और खून का थक्का नहीं मिला। डीएम के निर्देश पर कराई गई मेडिकल जांच में भी रिपोर्ट सामान्य आने का दावा किया गया है। इसके बाद पहले की मेडिकल रिपोर्ट और बाद की जांच के निष्कर्षों के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल उठने लगे। शिकायतकर्ता अधिवक्ता ने इसी आधार पर आरोप लगाया कि यदि बाद की जांच में गंभीर चोटों की पुष्टि नहीं हुई तो पहली मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर और खून का थक्का किस आधार पर दर्ज किया गया था।

28 अक्टूबर की घटना के बाद मेडिकल और सीटी स्कैन का दावा

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 28 अक्टूबर 2021 को पुलिस की ओर से जारी मजबूरी चिट्ठी के बाद अनिल कुमार का मेडिकल कराया गया। इसके बाद सीटी स्कैन कराने की बात भी सामने आई। अधिवक्ता का आरोप है कि इसी मेडिकल प्रक्रिया के दौरान ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसका इस्तेमाल बाद में मारपीट के मुकदमे में दूसरे पक्ष को फंसाने के लिए किया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम को साजिश का हिस्सा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आरटीआई में मांगे दस्तावेज भी नहीं मिले, उठे और सवाल

मामले में दस्तावेजों को लेकर भी विवाद सामने आया। अधिवक्ता के मुताबिक, जे़डी हॉस्पिटल से RTI के माध्यम से मेडिकल से संबंधित जानकारी और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद मेडिकल रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और उसके रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जब मेडिकल दस्तावेज ही पूरे तौर पर उपलब्ध नहीं कराए गए तो संबंधित रिपोर्ट तैयार किए जाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है।

अस्पताल के फिजिशियन ने आरोपों पर दिया जवाब

वहीं जे़डी हॉस्पिटल के फिजिशियन ने आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि इलाज से संबंधित सभी दस्तावेज अस्पताल के पास उपलब्ध हैं और उन्हें विवेचक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेज अब पुलिस जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को किस समय अस्पताल लाया गया, कौन-कौन सी जांच हुईं, क्या चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आए और मेडिकल रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई।

पांच आरोपियों पर मुकदमा

अधिवक्ता की शिकायत के बाद जे़डी हॉस्पिटल के डॉक्टरों और संचालक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ मेडिकल रिपोर्ट, सीटी स्कैन, अस्पताल के रिकॉर्ड, एसएन मेडिकल कॉलेज की दोबारा जांच और डीएम के निर्देश पर हुई जांच से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस विवेचना के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

डीसीपी सिटी बोले-साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर डीसीपी सिटी ने कहा कि पुलिस द्वारा साक्ष्य संकलित किए जाएंगे और उन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब जांच का केंद्र मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और दोनों पक्षों के दस्तावेजों के बीच सामने आ रहे कथित अंतर पर रहेगा। पुरानी घटना से जुड़े इस मामले में अब सवाल सिर्फ मारपीट के मुकदमे तक सीमित नहीं रह गया है। असली जांच इस बात की होगी कि मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज चोटों का चिकित्सकीय आधार क्या था और बाद की जांच में उनके विपरीत निष्कर्ष क्यों सामने आए। पुलिस की विवेचना में सामने आने वाले तथ्य ही तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।