एक साल के अबोध बच्चे को पिता से जबरन छीन लेने के मामले में न्यू आगरा पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज, बच्चे के लिए तड़पते पिता ने सीएम पोर्टल, पुलिस आयुक्त और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी में भी की शिकायत, हाईकोर्ट में भी गुहार लगाने जा रहा
आगरा। कानून की चौखट पर खड़े एक पारिवारिक विवाद में पुलिस की दखलंदाजी अब बड़े संवैधानिक सवाल खड़े कर रही है। शहर के मोती लाल नेहरू रोड निवासी केशव अग्रवाल और उनके पिता को न्यू आगरा थाने में बंद करने के बाद, उनके एक साल के अबोध बेटे को घर से उठवाकर मां को सौंप देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज हो गया है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
बताया गया है कि केशव अग्रवाल की शादी दो साल पहले हुई थी। खुद केशव के मुताबिक, उनकी पत्नी ने ससुराल में कदम रखते ही साफ कह दिया था कि यह शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई है। शादी के नौ महीने बाद एक बेटे का जन्म हुआ, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद ही मां ने उसे पालने और दूध पिलाने से इंकार कर दिया।
इसी के बाद दोनों पक्षों के बीच एक समझौतानामा तैयार हुआ, जिसमें मां ने लिखित रूप से यह स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से जा रही है और बच्चे की कस्टडी पिता के पास रहने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।
समझौते के छह महीने बाद ही केशव की पत्नी ने बेटे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उसके बेटे को पति ने बंधक बना रखा है। हालांकि, हाईकोर्ट में केशव ने वही समझौतानामा पेश किया, जो दोनों की सहमति से तैयार हुआ था। मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
दो दिन पहले न्यू आगरा पुलिस अचानक केशव अग्रवाल के घर पहुंची और केशव व उनके पिता को थाने ले आई। थाने में दोनों पर बच्चे को मां को सौंपने का दबाव बनाया गया। सामने आई ऑडियो क्लिप में पुलिसकर्मियों की कथित धमकी साफ सुनाई दे रही है। इसके बाद दोनों को करीब छह घंटे तक हवालात में बंद रखा गया।
इसी दौरान, पुलिस ने घर से एक साल के मासूम को उठवाकर उसकी मां को सौंप दिया।
दादा-दादी का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के तीसरे दिन भी परिवार सदमे में है। दादा-दादी, जिनकी गोद में बच्चा पल रहा था, बेसुध हालत में हैं। पिता केशव अग्रवाल की हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है। परिवार में कोई बेहोश हो रहा है तो कोई संभालने की कोशिश में टूट रहा है।
मानवाधिकार आयोग में केस, कई जगह शिकायत
कोई राहत न मिलने पर पीड़ित केशव अग्रवाल ने अधिवक्ता नरेश पारस के माध्यम से मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए केस रजिस्टर कर लिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल, आगरा के पुलिस आयुक्त और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को भी शिकायतें भेजी गई हैं।
कोर्ट की अवमानना का भी बन सकता है मामला
सबसे गंभीर पहलू यह है कि सामने आई ऑडियो क्लिप में पुलिस द्वारा कथित रूप से कोर्ट के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
चूंकि बच्चे की कस्टडी का मामला पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में पुलिस की इस कार्रवाई को कोर्ट की अवमानना के रूप में भी देखा जा रहा है।
पीड़ित पक्ष अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
अगर मामला कोर्ट पहुंचता है, तो यह सिर्फ न्यू आगरा थाना ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए भी बड़ी कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है।