'3 हजार यूक्रेनी नागरिकों की भारत में एंट्री, नॉर्थ-ईस्ट में रच रहे साजिश', दावे पर केंद्र ने बताई सच्चाई
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत में तीन हजार से अधिक यूक्रेनी नागरिक प्रवेश कर गए हैं और वह नॉर्थ ईस्ट में साजिश रच रहे हैं। अब इस दावे को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है।
नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि 3 हजार से अधिक यूक्रेनी नागरिक भारत में प्रवेश कर चुके हैं। यह सभी विदेशी नागरिक भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में छिपकर विद्रोही समूहों को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर अमेरिकी भाड़े के सैनिकों का समर्थन हासिल है। साथ ही वे आतंकवादियों को सस्ते ड्रोन की आपूर्ति भी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया साइट एक्स पर अक्षित और प्रिया नाम के एक यूजर ने खुफिया एजेंसियों का हवाला देते हुए दावा किया कि 3 हजार से अधिक यूक्रेनी नागरिक भारत के नॉर्थ ईस्ट राज्यों में छुपे हुए हैं। वह इन राज्यों में रहकर विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इन्हें अमेरिकी भाड़े के सैनिकों द्वारा समर्थन हासिल है। अक्षित ने दावा किया कि यह यूक्रेनी नागरिक आतंकवादियों को सस्ते में ड्रोन उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन की तुलना पाकिस्तान से की।
सोशल मीडिया पर यूक्रेनी नागरिक और अमेरिका को लेकर किए जा रहे इस प्रकार के तमाम दावों केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है, इस प्रकार के दावे गलत है। साथ ही इस प्रकार की जानकारी को आगे शेयर न करने की अपील की है।
दरअसल पिछले 13 मार्च को मिजोरम में अवैध रूप से घुसने और गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह यूक्रेनी नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इन सभी विदेशी नागरिकों पर म्यामांर में सशस्त्र विद्रोही गुटों ट्रेनिंग देने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी आरोपियों पर 2024 से मिजोरम के रास्ते म्यांमार में आने-जाने का शक है। आरोप है कि ये लोग ड्रोन और जैमिंग इक्विपमेंट की सप्लाई कर रहे थे। जो म्यांमार की सेना (जटां) को निशाना बनाते थे।
एनआईए ने कोर्ट को बताया है कि वैनडाइक और छह यूक्रेनियन लोगों ने पूछताछ के दौरान यह माना है कि उन्होंने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों के लिए एक से ज़्यादा बार ट्रेनिंग दी है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह एक कानूनी मामला है। संबंधित सरकारी एजेंसियां फिलहाल इसकी जांच कर रही हैं।'
जायसवाल ने कहा कि भारत को यूक्रेनी पक्ष से यूक्रेनी नागरिकों को राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने एक अनुरोध प्राप्त हुआ है और कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, यूक्रेन ने कहा कि वह भारत में आतंकवादी गतिविधियों का साथ देने में अपनी किसी तरह की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से खारिज करता है।