बैंड-बाजों के साथ निकली यमुना मैया की चुनरी यात्रा, गूंजा स्वच्छता का संदेश
आगरा के बल्केश्वर स्थित पार्वती घाट पर रविवार को श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति की ओर से यमुना मैया का चुनरी मनोरथ उत्सव आयोजित किया गया। गणेश राम नागर स्कूल से बैंड-बाजों के साथ निकली यात्रा के बाद नाव से यमुना मैया को चुनरी अर्पित की गई। पूजन, दुग्ध की धार और दीपदान के साथ श्रद्धालुओं ने यमुना की स्वच्छता एवं संरक्षण का संदेश दिया। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और समिति अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। श्रीकृष्ण लीला महोत्सव 13 नवंबर से शुरू होगा।
पार्वती घाट पर श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति का चुनरी मनोरथ उत्सव, नाव से यमुना मैया को अर्पित की चुनरी, 13 नवंबर से शुरू होगा श्रीकृष्ण लीला महोत्सव
आगरा। यमुना मैया की चुनरी तभी सार्थक होगी, जब उनकी धारा स्वच्छ, निर्मल और प्रदूषणमुक्त होगी। इसी संदेश के साथ रविवार को श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति की ओर से यमुना मैया का चुनरी मनोरथ उत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया। पार्वती घाट, बल्केश्वर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालुओं को यमुना संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मनोज बंसल, महंत गोपी गुरु, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, वत्सला प्रभाकर रहे । अतिथियों ने यमुना मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके संरक्षण को धार्मिक आस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
यमुना की पूजा के साथ उनकी स्वच्छता का संकल्प जरूरी
मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि यमुना मैया केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की साक्षी हैं। यमुना के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी पूर्ण होगी, जब प्रत्येक व्यक्ति उनकी स्वच्छता और संरक्षण के लिए अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाएगा।
श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को यमुना संरक्षण के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। यमुना में कूड़ा, प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य अपशिष्ट डालने से बचना चाहिए। घाटों को स्वच्छ रखना, पूजन सामग्री का उचित निस्तारण करना और नदी में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोकना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। समिति का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ जनमानस में यमुना संरक्षण की भावना को और मजबूत करना है।
बैंड-बाजों के साथ निकली चुनरी मनोरथ यात्रा
चुनरी मनोरथ उत्सव के अंतर्गत बल्केश्वर स्थित गणेश राम नागर स्कूल से पार्वती घाट तक बैंड-बाजों और ढोल के साथ चुनरी मनोरथ यात्रा निकाली गई। यात्रा का मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यमुना मैया के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ यमुना संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुंचाया।
पार्वती घाट पर पहुंचकर विधिवत पूजन के बाद नाव के माध्यम से यमुना मैया को चुनरी अर्पित की गई। महंत अनंत उपाध्याय, पंडित मुकेश शर्मा और पंकज शास्त्री के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया तथा दुग्ध की धार अर्पित कर यमुना मैया की आराधना की। इसके बाद घाट पर दीपदान किया गया और सुख-समृद्धि, लोककल्याण तथा यमुना मैया की निर्मलता के लिए प्रार्थना की गई।
समिति के सदस्य पीले और लाल वस्त्रों में आयोजन में शामिल हुए, जबकि महिलाओं ने चुनरी की साड़ियां धारण कीं। भक्ति गीतों, जयकारों और दीपदान के बीच श्रद्धालुओं ने यमुना मैया के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे स्वयं यमुना को स्वच्छ रखने का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
13 नवंबर से आरंभ होगा श्री कृष्ण लीला महोत्सव
समिति अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि 13 नवंबर से श्री कृष्ण लीला महोत्सव का आयोजन आरंभ होगा। चुनरी मनोरथ उत्सव को महोत्सव की धार्मिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से आगामी कार्यक्रमों में सहभागिता करने की अपील की।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विजय रोहतगी, मनोज बंसल, राजीव अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शेखर गोयल, केके अग्रवाल, कैलाश चंद्र अग्रवाल, मनोज गोयल, रवींद्र अग्रवाल, शंभू खंडेलवाल, विनीत सिंघल, मनोज गुप्ता, वीरेंद्र गोयल, जवाहरलाल सिंघल, अनूप गोयल, विष्णु अग्रवाल, संजय गर्ग, सतीश गौड़, अशोक कुमार गोयल, आदर्श नंदन गुप्त, लक्ष्मण शर्मा, हर्ष दत्त शर्मा, रमेश कुमार गुप्ता, गिर्राज बंसल, सुजाता अग्रवाल, तनु गुप्ता आदि उपस्थित रहे।