सिविल एन्क्लेव प्रोजेक्ट पर सिविल सोसायटी की रिव्यू एप्लीकेशन निस्तारित
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल एन्क्लेव प्रोजेक्ट को लेकर दायर की गई सिविल सोसायटी ऑफ आगरा की रिव्यू एप्लीकेशन को निस्तारित करते हुए सोसायटी पर पूर्व में लगाई गई 75,000 रुपये की लागत को माफ कर दिया है। यह राशि उस समय लगाई गई थी जब वर्ष 2019 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश दिया था।
कोर्ट के समक्ष रखी गई दलील
सिविल सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अकलंक कुमार जैन ने दलील दी कि अब जब नया सिविल एन्क्लेव एयरफोर्स स्टेशन से बाहर धनौली ग्राम सभा (सीटी) क्षेत्र में बन रहा है और कार्य तेजी से प्रगति पर है, तो याचिका का औचित्य समाप्त हो गया है। इसलिए न केवल याचिका को निस्तारित किया जाए, बल्कि लागत राशि भी माफ की जाए, ताकि एक जनहित संस्था को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।
अधिवक्ता जैन ने कोर्ट के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि याचिका कोरी अकादमिक बहस नहीं थी, बल्कि इसमें स्थानीय नागरिकों की वास्तविक आवश्यकता को उठाया गया था। उन्होंने कहा कि अगर सिविल सोसायटी यह मुद्दा हाईकोर्ट में नहीं उठाती, तो संभवतः प्रशासन और शासन स्तर पर यह प्रोजेक्ट लंबे समय तक उपेक्षित रहता।
अदालत का निर्णय
न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकारते हुए सोसायटी पर लगाई गई 75,000 रुपये की लागत माफ कर दी।
सिविल एन्क्लेव प्रोजेक्ट की स्थिति
आगरा में सिविल एन्क्लेव को 2012 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। 2016 से सिविल सोसायटी ने इसे प्राथमिकता दी। अब निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इसका संभावित संचालन वर्ष 2026 से पहले संभव है।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा कि इस याचिका से सरकार को इस मुद्दे की गंभीरता समझ में आई। उन्होंने आगरा के उद्यमियों व पर्यटन कारोबारियों से इस प्रोजेक्ट के प्रति जागरूक रहने की अपील की।