याचिकाकर्ता के पिता से गुस्से में बोले सीजेआई,  मेरे भाई को फोन करने की हिम्मत कैसे हुई ?   भरी अदालत में बोले- छोडूंगा नहीं

सीजेआई ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता ने एक आदेश को लेकर उनके भाई को फोन कर दिया कि मुख्य न्यायाधीश ने यह आदेश कैसे दिया।

Mar 25, 2026 - 19:07
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याचिकाकर्ता के पिता से गुस्से में बोले सीजेआई,  मेरे भाई को फोन करने की हिम्मत कैसे हुई ?   भरी अदालत में बोले- छोडूंगा नहीं

नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार (25 मार्च, 2026) को एक शख्स को सुप्रीम कोर्ट में जमकर फटकार लगाई। सीजेआई ने बेहद गुस्से भरे लहजे में याचिकाकर्ता के पिता से कहा कि उनकी हिम्मत कैसे हुई कि उन्होंने उनके आदेश पर उनके भाई को फोन किया कि मुख्य न्यायाधीश ने कैसे ये आदेश दिया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता उन्हें नहीं बताएंगे कि उन्हें क्या करना है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत उस मामले में सुनवाई कर रहे थे, जिसमें दो जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स ने बौद्ध कॉलेज में माइनॉरिटी कोटे के आधार पर रिजर्वेशन मांगा है। उनका कहना है कि वह बौद्ध धर्म में कंवर्ट हो चुके हैं। हालांकि, कोर्ट ने जनवरी में सुनवाई करते हुए उनके बौद्ध धर्म में कंवर्जन पर आशंका जताई थी और उनके माइनॉरिटी सर्टिफिकेट की जांच का भी आदेश दिया था।

सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, 'आपके मुवक्किल के खिलाफ अवमानना का मुकदमा क्यों न चलाया जाए ? इनकी मेरे भाई को फोन करने और ये कहने की हिम्मत कैसे हुई कि सीजेआई ने ये आदेश कैसे दे दिया ? क्या ये मुझे बताएंगे कि मुझे क्या करना है? अगर आपका मुवक्किल दुर्व्यवहार करता है तो सबसे पहले आपको केस से पीछे हटना चाहिए। अगर ये भारत के भी बाहर जाकर छिप जाएं, तो भी मैं जानता हूं कि ऐसे लोगों को कैसे ठीक करना है। आप (याचिकाकर्ता के पिता) मुझे धमकी दे रहे हैं? मेरे साथ ऐसा दोबारा कभी मत करना। मैं 23 सालों से ऐसे लोगों को झेल रहा हूं।'

वकील ने सीजेआई सूर्यकांत को बताया कि वह इस सबके बारे में कुछ नहीं जानते हैं और वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं। हरियाणा के दो युवक उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुशन के लिए एडमिशन चाहते हैं। उन्होंने बौद्ध माइनॉरिटी कोटा के तहत एडमिशन की मांग की है। यह कॉलेज बौद्ध माइनॉरिटी कॉलेज है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे बौद्ध धर्म में कंवर्ट हो चुके हैं और उनके पास सब डिविजनल ऑफिसर की ओर से जारी किया गया माइनॉरिटी सर्टिफिकेट भी है। जनवरी में उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनके बौद्ध धर्म में कंवर्ट होने पर आशंका जताई थी। कोर्ट को शक है कि उन्होंने सिर्फ इस कॉलेज में एडमिशन के लिए ऐसा किया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि ये दोनों पुनिया कास्ट के हैं।