महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर गूंजा शिक्षा का शंखनाद: आगरा में जली विचारों की मशाल, सामाजिक चेतना को जगाने का आह्वान

आगरा के बिजली घर स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में महात्मा ज्योतिबा राव फुले की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ने सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर शिक्षा और सामाजिक समानता के सवालों को जोरदार तरीके से उठाया। वक्ताओं ने साफ कहा कि जिस शिक्षा क्रांति का सपना फुले ने देखा था, वह आज भी अधूरा है और समाज को अब भी उस चेतना की जरूरत है।

Apr 12, 2026 - 13:38
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महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर गूंजा शिक्षा का शंखनाद: आगरा में जली विचारों की मशाल, सामाजिक चेतना को जगाने का आह्वान
बिजलीघर चौराहा स्थित डॊ. आंबेडकर पार्क में महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते लोग।

आगरा। महात्मा ज्योतिबा राव फुले की जयंती पूरे उत्साह और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क, बिजली घर पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में फुले के अनुयायी और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र पर माल्यार्पण, मोमबत्ती और अगरबत्ती अर्पित कर की गई। इसके बाद मिष्ठान वितरण किया गया और एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने फुले के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक कार्यों को याद किया।

कार्यक्रम के संयोजक अनिल सोनी ने बताया कि 11 अप्रैल 1827 को जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले ने यह समझ लिया था कि शिक्षा के बिना किसी भी समाज का उत्थान संभव नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार का अभियान शुरू किया।

उन्होंने बताया कि उस दौर में शिक्षा को सीमित वर्ग तक ही बांध दिया गया था और आम लोगों के लिए यह किसी अभिशाप से कम नहीं थी। जब फुले ने सभी वर्गों को शिक्षा देने का संकल्प लिया, तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन पर कीचड़ फेंका गया, अपशब्द कहे गए और सामाजिक बहिष्कार तक किया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा की अलख जगाते रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के सदस्य दिनेश भारत ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने महात्मा फुले के चित्र पर माल्यार्पण किया और कहा कि फुले का जीवन समाज के लिए प्रेरणा है, जिन्होंने समानता और शिक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी कौशलेंद्र सिंह, अशोक कुमार, पप्पू नेताजी, कीमती लाल, तेज कपूर, दीपक सोनी, नरेंद्र पायलट, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती राजकुमारी, रामबाबू और कालू भाई सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे और फुले के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज भी समाज में शिक्षा और समानता को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं और फुले के विचार आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

SP_Singh AURGURU Editor