बीपी, शुगर और तनाव ने बढ़ाई चिंता, चैंबर के हृदय स्वास्थ्य सेमिनार में विशेषज्ञ ने प्रारंभिक उपचार, योग, व्यायाम और संतुलित आहार को बताया जरूरी
आगरा। बदलती जीवनशैली के बीच उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनसे बचाव के लिए प्रारंभिक स्तर पर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना और नियमित जांच कराना जरूरी है। तनाव कम करने में योग, जबकि स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित व्यायाम और संतुलित आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह बात मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डायरेक्टर कार्डियक साइंसेज एवं मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस) और कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विशेषज्ञ डॉ. नीरव बंसल ने कही।
चैंबर सभागार में चैंबर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में ‘एडवांसिंग हार्ट हेल्थ’ सेमिनार का आयोजन किया गया। डॉ. नीरव बंसल ने कहा कि शारीरिक बीमारियों से बचाव के लिए प्रारंभिक उपचार और समय रहते चिकित्सकीय परामर्श पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बीपी, शुगर, मानसिक तनाव और कोलेस्ट्रॉल की समस्याएं गंभीर रूप ले रही हैं। तनाव कम करने के लिए योग को बेहतर उपाय बताते हुए उन्होंने इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
40 से 50 की उम्र में बीपी बढ़े तो रहें सतर्क
डॉ. नीरव बंसल ने कहा कि 40 से 50 वर्ष की उम्र में रक्तचाप बढ़ने पर व्यक्ति को तुरंत सजग हो जाना चाहिए। उन्होंने रक्तचाप को नियंत्रित रखने और बढ़ने की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ रक्तचाप जीवन प्रत्याशा को प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार शरीर में सकारात्मक और नकारात्मक प्रक्रियाओं का संतुलन बना रहना जरूरी है तथा बीपी बढ़ने पर नकारात्मक प्रभाव तेजी से बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बीमारियों से जुड़ी जटिलताएं अधिक हैं, जबकि दवाओं से होने वाली जटिलताएं अपेक्षाकृत कम हैं। इसलिए बीमारी को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उसका उपचार कराना जरूरी है।
एक बार गर्म किया तेल दोबारा न करें इस्तेमाल
डॉ. बंसल ने खानपान को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक बार भोजन पकाने में इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करके उपयोग नहीं करना चाहिए। बार-बार गर्म किए गए तेल का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने लोगों को घर का बना भोजन प्राथमिकता देने और बाहर के तले-भुने व अधिक तेल वाले भोजन से बचने की सलाह दी।
उन्होंने फास्ट फूड और ऑयली फूड के अत्यधिक सेवन को शरीर के लिए नुकसानदायक बताते हुए खानपान में संतुलन रखने पर जोर दिया।
शुगर के मरीजों को बरतनी होगी विशेष सावधानी
डॉ. नीरव बंसल ने कहा कि मधुमेह के शुरुआती दौर में कई बार समस्या के लक्षण कम दिखाई देते हैं, लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर शरीर के विभिन्न अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए शुगर के मरीजों को नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह के साथ खानपान एवं दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
व्यायाम, योग और संतुलित आहार को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
उन्होंने स्वस्थ शरीर के लिए नियमित व्यायाम, योग और संतुलित आहार पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भोजन के बाद हल्का व्यायाम करने से शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त नींद को भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु के व्यक्ति के लिए छह घंटे की नींद आवश्यक है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच कराते रहना चाहिए।
सेमिनार के अंत में पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, राजीव तिवारी, संजय गोयल, सदस्य राजेंद्र अग्रवाल, अनूप गोयल, विजय मंगवानी, जयकिशन गुप्ता और प्रशांत जैन उपस्थित रहे।