परिवार की जड़ों से जुड़ना ही भविष्य की सबसे बड़ी धरोहरः 1950 के दशक की पीढ़ी आगे आए

आज का समय अमृत काल कहा जा रहा है। यह केवल विकास का काल नहीं, बल्कि अपने अतीत से जुड़कर भविष्य गढ़ने का भी समय है। जो आज हम लिखेंगे, संगठित करेंगे और साझा करेंगे, वही कल इतिहास बनेगा। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह केवल शब्द नहीं होंगे, बल्कि एक रोमांचक अनुभव, सीख और प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

Aug 22, 2025 - 14:10
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परिवार की जड़ों से जुड़ना ही भविष्य की सबसे बड़ी धरोहरः 1950 के दशक की पीढ़ी आगे आए

हम सब अपने पूर्वजों की कहानियां सुनते-पढ़ते हैं और उनसे नई ऊर्जा प्राप्त करते हैं। ठीक उसी प्रकार यदि 1950 के दशक की पीढ़ी अपने अनुभव, संघर्ष और पारिवारिक संगठन को आज कलमबद्ध कर दे, तो कल की पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य धरोहर साबित होगी।

परिवार का संगठन ही शक्ति

आज संयुक्त परिवार टूट चुके हैं। लोग अपने काम और जीवन की व्यस्तताओं के कारण जन्मभूमि से दूर हो चुके हैं। ऐसे में भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों को पहचानना कठिन होता जाएगा। यही कारण है कि हमें आज ही परिवार को जोड़ने की दिशा में पहल करनी चाहिए। एक फैमिली ट्री बनाना, सालाना पारिवारिक मिलन करना और पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखना, यह सब भविष्य को सुरक्षित करने के साधन हैं।

बिरला और जिंदल परिवार से प्रेरणा लें

बिरला और जिंदल परिवार जैसे बड़े घराने हर वर्ष पारिवारिक मिलन आयोजित करके नई पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ रहे हैं। यही परंपरा आम परिवार भी अपना सकते हैं। फैमिली ट्री के सहारे आने वाली पीढ़ियां न केवल अपने पूर्वजों को जान पाएंगी, बल्कि पारिवारिक संबंधों का लाभ भी उठा सकेंगी।

लिखित धरोहर का महत्व

किताबें केवल कागज़ पर शब्द नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ियों की धड़कन होती हैं। यदि कोई यह कहता है कि आज किताबें कौन पढ़ता है, तो यह गलत है। किताब लिखकर आप उसे इंटरनेट पर भी उपलब्ध करा सकते हैं। चाहे आत्मकथा हो, पारिवारिक इतिहास हो या संघर्ष की कहानी, यह सब आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा।

आज भी यदि बड़े परिवार एक साथ बैठकर पारिवारिक मिलन करें और उसके साथ एक पारिवारिक पुस्तक तैयार करें, तो यह न केवल परिवार को संगठित करेगा बल्कि समाज को भी एक नई दिशा देगा। यही धरोहर होगी जो आने वाले समय में पहचान और गर्व का कारण बनेगी।

-राजीव गुप्ता- ‘जनस्नेही कलम से’

लोक स्वर, आगरा।

SP_Singh AURGURU Editor