बरेली में ईसाईकरण का षड्यंत्र बेनकाबः पादरी समेत तीन गिरफ्तार, हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराते थे
-आरके सिंह- बरेली। शहर में हिंदू समाज को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने छापा मारकर पादरी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि एक आरोपी फरार है। गिरोह गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह धार्मिक षड्यंत्र कब से चल रहा था और कितने लोग इनके जाल में फंस चुके हैं।
थाना बारादरी क्षेत्र के अंतर्गत ऋषभ ठाकुर निवासी सुभाष नगर बरेली और निर्दोष राठौर निवासी नकटिया थाना कैंट ने पुलिस को तहरीर दी कि कुछ ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग सुपर सिटी में किराए का मकान लेकर भोले-भाले हिंदू महिलाओं और बच्चों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने को मजबूर कर रहे हैं।
तहरीर के मुताबिक, पादरी सुमित मैसी और उसके साथी रविवार को प्रार्थना के नाम पर लोगों को एकत्र करते थे और ‘यीशु भगवान की शरण’ लेने के लिए मंत्रोच्चारण कराते थे। पीड़ितों को स्तुति आराधना नामक किताब देकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाता था।
ऐसे हुआ धर्म परिवर्तन का खुलासा और गिरफ्तारियां
ऋषभ ठाकुर व निर्दोष राठौर ने बताया कि उनसे धोखे से “यीशु भगवान की शरण में आने” की प्रतिज्ञा करवाई गई और ईसाई धर्म कबूल करवाया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर ईसाई सुमित मैसी, अमित मैसी उर्फ अक्षय मैसी, सरिता पत्नी देवेंद्र, और सत्यपाल निवासी सनराइज कालोनी बरेली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पादरी सुमित मैसी, अमित मैसी और सरिता को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेज दिया, जबकि सत्यपाल अब भी फरार है।
गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के लोग थे निशाने पर
पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 299 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
थाना प्रभारी धनंजय पांडे ने बताया कि पुलिस जांच में यह सामने आया कि ये लोग गरीब, दलित, ओबीसी और कमजोर वर्ग के लोगों को पहले ‘मंतांतरण’ यानी मानसिक रूप से प्रभावित करते थे। जादू-टोना और धार्मिक चमत्कार दिखाकर उन्हें अपने प्रभाव में लेने का दावा करते थे, और धीरे-धीरे बाइबिल के पाठों से उनका धर्म परिवर्तन कराते थे।
इलाज, नौकरी और अच्छे जीवन का लालच दिया जाता था
पादरी सुमित मैसी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ गरीब व अशिक्षित लोगों को बेहतर इलाज, नौकरी और अच्छे जीवन का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराता था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय है और अब तक कितने लोगों को बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा चुका है।
पुलिस ने केस को विशेष निगरानी में रखा
फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से धार्मिक किताबें, पर्चे, और रिकॉर्डिंग सामग्री जब्त की है। पुलिस पूरे गिरोह की फंडिंग, संपर्क सूत्रों और मिशनरी कनेक्शन की तहकीकात कर रही है।
बरादरी थाने में दर्ज मुकदमे को विशेष निगरानी में रखा गया है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अवैध धर्मांतरण प्रयास पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद बरेली शहर में धार्मिक समुदायों में गहरी नाराज़गी है। हिंदू संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया और मांग की है कि पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर कठोर सज़ा दी जाए। स्थानीय लोगों ने कहा कि गरीब वर्ग की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।