आंबेडकर विवि में दीक्षारंभ समारोहः तेजी से बदल रहा है देश में शिक्षा का वातावरण: शिक्षा मंत्री
आगरा। देश में शिक्षा का वातावरण अब तेजी से बदल रहा है। पूर्व की शिक्षा नीति ‘मैकॉले की सोच’ पर आधारित थी, जिसका लक्ष्य केवल अंग्रेजी ज्ञान देना था। जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ऐसे समय में लागू की गई, जब पूरी दुनिया कोविड जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रही थी। यह इस बात का संकेत है कि भारत का नेतृत्व आपदा में अवसर तलाशने की क्षमता रखता है।
-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को रोजगार, तकनीक और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम
यह विचार प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम के समापन समारोह में व्यक्त किए। कार्यक्रम को शिक्षा नीति के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भी आयोजित किया गया था।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि अब शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि संस्कार, रोजगार और तकनीक से जोड़ना है। शिक्षा नीति इसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो प्रतिभाओं की खोज कर उन्हें तराशना होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शोध पीठों की स्थापना की जानी चाहिए, जो ऋषि परंपरा और प्राचीन ग्रंथों पर गहन शोध करें। उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश भी जारी किए हैं।
क्लस्टर कॉलेज मॉडल और स्पेशल एजुकेशन ज़ोन की स्थापना भी शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजेश सहगल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि अब केवल डिग्री लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री-अनुकूल कौशल विकसित करना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को जर्मनी की तर्ज पर बारहवीं के बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंडस्ट्री ट्रेनिंग लागू करनी चाहिए।
डॉ. श्वेता चौधरी ने कहा कि 34 वर्षों के बाद लागू की गई यह नीति 1 लाख से अधिक विचार-विमर्शों और संवादों के बाद अस्तित्व में आई है। इसका उद्देश्य छात्रों को समाज और संस्कृति से जोड़ना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। संचालन प्रो. बृजेश रावत ने किया। उन्होंने बताया कि इस समारोह का उद्देश्य नवप्रवेशित छात्रों को विश्वविद्यालय के वातावरण, प्रक्रियाओं और संसाधनों से परिचित कराना था।
इस अवसर पर छात्र-छात्राएं श्रेया, नरेंद्र और पूर्णिमा कुमारी ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, कुलसचिव अजय मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश सहित अनेक शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।