देश को अब चाहिए पांच उप-प्रधानमंत्री : एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति की ज़रूरत

तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य और लगातार बढ़ती आंतरिक और बाहरी चुनौतियों को देखते हुए अब देश को पांच से सात उप प्रधानमंत्रियों की ज़रूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक अकेले ही सब सम्भालते रहे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अलग-अलग क्षेत्रों की कमांड अलग उप-प्रधानमंत्रियों को सौंपना राष्ट्रहित में होगा। इससे गवर्नेंस तेज़ होगी समन्वय भी बेहतर बनेगा और संकटों से निपटने में सरकार अधिक प्रभावी होगी।

Sep 25, 2025 - 12:10
 0
देश को अब चाहिए पांच उप-प्रधानमंत्री : एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति की ज़रूरत

आजकल वैश्विक वातावरण जितनी तेजी से बदल रहा है, उसके साथ कौन नहीं चाहेगा कि भारत कदम से कदम मिलाकर चलता जाये। मोदी जी बहुत लम्बे समय से प्रधानमंत्री का दायित्व बखूबी संभाले हुए हैं। परन्तु अब एक साथ अनेक परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं, जिनपर अचूक ध्यान और निवारण बहुत जरूरी हो रहा है।

जबसे अपने देश ने कुछ हद तक ट्रम्प का वास्तविक रुप दिखना शुरु किया है, तभी से किसी न किसी तरह का नया संकट खड़ा होता दिखता है। टैरिफ़ की मार, गुटबाजी की मार, तेल की मार, इत्यादि जैसे काफी न थीं। एक तरफ ध्यान दो, तब तक कहीं और कुछ अमरीका और ट्रम्प की तरफ से कुछ हो ही जा रहा है। बोले तो ले दे के यदि एक ही वाशिंग मशीन हो घर में, और गंदे कपड़े अचानक बहुत ज्यादा, दस गुना ज्यादा और उससे भी ज्यादा हर दिन निकलने लगें, तो एक मशीन अकेले डिमांड को पूरा नहीं कर पायेगी। ऊपर से मशीन कभी भी खराब भी हो सकती है।

किसी का तो हाथ है नेपाल बंगलादेश श्रीलंका करवाने में। भारत में भी उन्माद है, जो कभी कभार थोड़ा बहुत उभर जाता है। आजकल के माहौल में कुछ ज्यादा ही। मुद्दे पहले के ही बहुत थे, और अब तो ट्रम्प की खुशी से पाकिस्तान और सऊदी में ऐसा इकरार हो जाता है, जिससे अब शायद पाकिस्तान को उसकी किसी भी गुस्ताखी की सजा भारत शायद अकेले देने की स्थिति में नहीं रह गया है। पाकिस्तान अपनी आदतों से बाज भी नहीं आयेगा।

इसका असर भी दिखने लगा है, जब वे अचानक कभी यहां तो कभी वहां, भीड़ को नारेबाजी करते और पुलिस वालों को दौड़ाते और पिटाई करते दिख रहे होंगे। हालत इस समय मंदिर में एक लड़ी से लटके घंटों जैसी होती जा रही है  कि एक घंटा बजाओ तो साथ के अनेक घंटे स्वतः ही बजने लगते हैं। ट्रम्प ने युवाओं की पढ़ाई और नौकरी की उम्मीदें एकाएक धराशाई कर दीं। एक लाख डॉलर का वीसा कौन आसानी से खरीद पायेगा?

आतंरिक स्थिति सुदृढ है, ऐसा भी तो नहीं कह सकते। घुसपैठियों की भरमार हैं और शासकीय मददगार जब अब तक पकड़े या इंगित तक न हो पाये हों तो उनके विरुद्ध कार्यवाही कैसे। यही बहुत होगा कि चंद रुपयों के लिए सहूलियत खोरों को अब और न आने दें। इसे सरकार राष्ट्रद्रोह घोषित करे, और कड़े से कड़े दण्ड की व्यवस्था बनवाये।

समेट क्या पाये हैं अब तक? CAA (सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट ) अधूरा है, जैसा कि कॉमन सिविल कोड, और जनसंख्या कंट्रोल, जैसे मुद्दे छेड़ तो दिये गये हैं, पर लटके ही पड़े हैं। सड़कें और पुल बनते जा रहे हैं, और उतनी ही तेजी से बर्बाद भी। करप्शन रुका नहीं। नौकरी, शिक्षा, बैंकिंग में भ्रष्टाचार और मेडिकल, दवा मैंन्यु फेकचरिंग, नकली दूध - घी -तेल में मिलावट इत्यादि बरकरार है।

ऐसा नहीं कि मोदी जी ने इन्हें कंट्रोल और खत्म करने की कोशिश नहीं की। बहुत कोशिश की है। पर अब वे 75 वर्ष के हो गये हैं, और एक साथ अनेक नये नये मुद्दे उठते जा रहे हैं। ऐसे में यदि उन्हें पांच से सात उप-प्रधानमंत्री अलग से मिल जायें, तब हर काम पर नजर रह सकती है। ये केंद्रीय मंत्रियों के ऊपर के दर्जे पर रहकर अपने अंतर्गत आने वाले केंद्रीय मन्त्रियों के साथ समन्वय और तालमेल बैठायें। प्रधानमंत्री जी तो आदेश करें।

जैसे कि भौतिक विकास के मुद्दे, जिसमें पुल, सड़क, बिल्डिंग, रेल लाईन, डैम, एक उप प्रधानमंत्री संभाल सकता है। विधि, जेल, पुलिस, आंतरिक सुरक्षा, रेल, एयरपोर्ट, जलमार्ग और सार्वजनिक उपक्रमों, घुसपैठियों, इत्यादि, एक अलग उप-प्रधानमंत्री संभाल सकता है, जिसके लिए शायद अमित शाह सबसे उपयुक्त रहेंगे। राजनाथ सिंह, और शिवराज सिंह को रक्षा और खाद्य व कृषि से संबन्धित उप-प्रधानमंत्री का दर्जा मिले, तथा उनके अधीन केंद्रीय मंत्री रक्षा व कृषि भी अलग से रहें। चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को भी उप-प्रधानमंत्री बनाकर उनका एक्सपीरियंस का फायदा उठाना चाहिए।

वैसे भी सरकार अल्पमत में है और इन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाये जाने के बाद तोड़ फोड़ की राजनीति पर लगाम लग सकती है। सरकार मजबूत भी हो जायेगी। योगी जी का सदुपयोग राष्ट्रीय स्तर पर उप-प्रधानमंत्री के रुप में अब हो तो बेहतर रहेगा। विकास, हेल्थ  और शिक्षा वे संभाल सकते हैं। विकास पर वे पैनी नजर रख लेंगे। वित्त, उद्योग, बैंकिंग, आरबीआई, जीएसटी बजट, सेबी, स्टॉक एक्सचेंज, इत्यादि, किसी अन्य उप-प्रधानमंत्री के हवाले कर दिया जाना चाहिये, जो किसी से डरे नहीं, और किसी से दबे भी नहीं। सही को सही कह सके, और बर्बादी होते देखकर भी चुप न रहे।

लाखों करोड़ रूपये, लोगों की जिन्दगी, जो लगातार बर्बाद होती जाती हैं, वे अब तो बचें। देश के लिए बढ़िया रहेगा कि बहुत पैसे वाले और अपने निजी या पारिवारिक व्यवसाय में व्यस्त रहने वाले अब जिम्मेदारी न संभालें। टाटा अम्बानी की तरह अलग रहें।

फालतू खर्च और बर्बादी रोकने, किसी को तो अलग से जिम्मेदारी संभालनी होगी। इलॊन मस्क की तरह जो फालतू का व्यय और बजट खत्म करे। घुसपैठियों को भी फ्री का अनाज, घर, इज्जतघर, मेडिकल और प्रजनन की सुविधाएं तथा हर डिलीवरी पर सरकार की तरफ से अलग से अंशदान भी मिल रहा है। किसको अब वाकई में रिजर्वेशन मिलना चाहिये, यह इलॊन मस्क सरीखा इंसान भारत के उप प्रधानमंत्री की हैसियत से और मोदी जी की क्षत्र छाया मे आसानी से पूरा कर सकेगा। टेक्नोलोजी है, जिसका सही समय, सही तरह उपयोग भी तो होना चाहिये। घटिया सड़कें और पुल बनकर तैयार हो जाते हैं, पर कोई ड्रोन से देखता भी नहीं। घुसपैठियों को कौन मदद कर रहा है, सभी सुविधाएं होकर भी पता नहीं चलता। खेत की सतह के नीचे नकली नोट छपते हैं, पर पता नहीं चलता।

मोदी जी जब अकेले ही अब तक इतना सभी कुछ करते रहे, तब समझिये कि कितना बढ़िया होगा कि पांच से सात उप - प्रधानमंत्री उनके हाथ बटायें, और ऐसे समय में जब देश अनेक उलझनों और मुद्दों से जूझ रहा हो। देश भी तो मोदी जी को अगले कई वर्षों तक प्रधानमंत्री देखना चाहता है। ऐसा समझिये कि कठिन घड़ी में उनके छोटे भाई उनके साथ खड़े हो रहे हैं।

SP_Singh AURGURU Editor