इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानी सम्मानित, पहली बार सरकारी स्तर पर मना ‘आपातकाल दिवस’

आगरा। भारत में आपातकाल लागू हुए 50 साल पूरे हो चुके हैं। पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर ‘आपातकाल दिवस’ को आधिकारिक रूप से मनाया गया। आगरा में इस मौके पर जिला प्रशासन द्वारा कलक्ट्रेट सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता विधायक और लोकतंत्र सेनानी पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने की।

Jun 25, 2025 - 18:43
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इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानी सम्मानित, पहली बार सरकारी स्तर पर मना ‘आपातकाल दिवस’
देश में आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर सरकारी स्तर पर कलक्ट्रेट सभागार और विश्वविद्यालय के सेठ पदम जैन संस्थान में हुए कार्यक्रमों की कुछ तस्वीरें, जिनमें विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल भी हैं।

पहली बार किसी सरकार ने आपातकाल दिवस को आधिकारिक रूप से आयोजित किया। इसके जरिए लोकतंत्र सेनानियों को शासन की ओर से प्रत्यक्ष मान्यता और सम्मान मिला। इसके जरिए नई पीढ़ी को आपातकाल की हकीकत और लोकतंत्र की कीमत का बोध कराया गया। सरकार के निर्देश थे कि आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम कर उस समय की त्रासदी के बारे में आम जनता को बताया जाए।

इस कार्यक्रम में 1975 के आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों व उनके आश्रितों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें उस दौर के दमन और संघर्ष को दर्शाया गया।

संविधान के प्रति निष्ठा का संकल्प लिया गया

कार्यक्रम के दौरान सामूहिक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें लोकतंत्र की मजबूती और संविधान के प्रति निष्ठा व्यक्त की गई।
लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल की घटनाओं और जेलों में बिताए दिनों की पीड़ा साझा की, जिसे सुनकर सभागार में मौजूद लोग भावुक हो उठे।

विधायक खण्डेलवाल ने कहा- आपातकाल लोकतंत्र पर काला धब्बा

विधायक पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने अपने संबोधन में कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे अंधकारमय दिन था। उस समय जिन लोगों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी, वे आज भी समाज के लिए प्रेरणा हैं। आज का दिन हमें इस बात का संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहें। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के गोल्डन कार्ड, पेंशन, और उनके आश्रितों को सम्मान राशि जैसी मांगों पर शासन से नीति संशोधन की बात भी कही।

कार्यक्रम में ये लोग मौजूद रहे

इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी नरेंद्र सिंह जग्गा, पुरुषोत्तम सिंह, महाजन, रेखा, सहित कई सेनानी और उनके परिवारजन मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) प्रशांत तिवारी, कलक्ट्रेट संघ अध्यक्ष नरेंद्र कुमार भारद्वाज, दुलीचंद शर्मा, तुषार सक्सेना, विवेक सक्सेना, रामनरेश, शिव कुमार कर्दम, भूपेंद्र सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

विश्वविद्यालय में भी हुआ आयोजन, छात्रों ने जाना आपातकाल का इतिहास

भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के सेठ पदमचंद जैन प्रबंधन संस्थान में छात्र अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद स्वरूप शर्मा के नेतृत्व में इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक खण्डेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

संस्थान के निदेशक प्रो. बृजेश रावत ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की।
डॉ. रुचिरा प्रसाद के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक खण्डेलवाल ने 1975 के आपातकाल की घटनाएं साझा करते हुए बताया कि कैसे देश के नेताओं को रातों-रात बिना वारंट गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया। देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
यह दौर ब्रिटिश हुकूमत से भी ज़्यादा भयावह था, क्योंकि यह ज़ुल्म अपने ही देश की सरकार कर रही थी।

30 लोकतंत्र सेनानियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में 30 लोकतंत्र सेनानियों को शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संतोष बिहारी शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में प्रो. शरद चन्द उपाध्याय, परीक्षा नियंत्रक ओम प्रकाश, एनएसएस समन्वयक डॉ. पूनम तिवारी, एडीएसडब्लू रत्ना पांडे, सीमा सिंह, मीनाक्षी चौधरी, सुमित पाठक सहित विश्वविद्यालय परिवार और छात्र उपस्थित रहे।

भाजपा को इंदिरा गांधी की उपलब्धियां भी याद करनी चाहिए: रमाशंकर शर्मा
आगरा। 25 जून को भाजपा द्वारा ‘आपातकाल विरोध दिवस’ मनाए जाने पर राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा केवल इंदिरा गांधी की आलोचना कर रही है, लेकिन देशहित में उनके ऐतिहासिक योगदानों पर मौन साधे हुए है।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी केवल एक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, विकास और आत्मसम्मान की प्रतीक थीं। उनके नेतृत्व में बैंकों का राष्ट्रीयकरण, राजा-महाराजाओं के प्रिवी पर्स की समाप्ति, 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को विभाजित कर बांग्लादेश को देश बनाना, पोखरण में भारत का पहला परमाणु परीक्षण, निर्गुट आंदोलन के जरिए 145 देशों की आवाज बनना और आनंद भवन जैसे पारिवारिक धरोहर को राष्ट्र को समर्पित करने जैसी उपलब्धियां भी हैं।

उन्होंने कहा कि ना विकास की बात, ना महंगाई पर नियंत्रण, बेरोजगारी चरम पर, मीडिया दबाव में और जनता की आवाज उठाने वाला हर व्यक्ति देशद्रोही करार दिया जाता है। क्या यही लोकतंत्र है?

SP_Singh AURGURU Editor