टीटीजेड में हरियाली का संहार जारी: गौहरपुर में वन विभाग की मिलीभगत से पेड़ों की अवैध कटाई

ताज ट्रेपेजियम जोन क्षेत्र में हरियाली के लगातार हो रहे कत्लेआम से स्पष्ट है कि वन विभाग और माफियाओं की मिलीभगत से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का मखौल उड़ाया जा रहा है। अगर प्रशासन गंभीर नहीं हुआ तो जल्द ही आगरा जिले के रेगिस्तान में तब्दील होते देर नहीं लगेगी।

May 29, 2025 - 20:59
May 29, 2025 - 21:02
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टीटीजेड में हरियाली का संहार जारी: गौहरपुर में वन विभाग की मिलीभगत से पेड़ों की अवैध कटाई
आगरा में हरे पेड़ों का खुलेआम किया जा रहा संहार।

आगरा। पर्यावरण संरक्षण के लिए संवेदनशील घोषित ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (टीटीजेड) में हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर कुर्राचित्तरपुर क्षेत्र के गौहरपुर गांव में बीते पांच दिन में दर्जन भर से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनमें सात विशाल नीम जैसे पर्यावरण हितैषी पेड़ भी शामिल हैं। खास बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र टीटीजेड  में आता है, जहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेड़ों की छंटाई तक पर रोक है, फिर भी खुलेआम आरी चल रही है।

पहली घटना: शनिवार, 25 मई 2025

गांव गौहरपुर में नीम के सात बड़े पेड़ों सहित कुल दस पेड़ काट दिए गए। इस कटाई की सूचना सार्वजनिक होने के बाद वन विभाग ने मात्र चार पेड़ों की रिपोर्ट दर्ज कराई। पेड़ बेचने वाले मालिकों पर कार्रवाई के नाम पर विभाग चुप्पी साधे हुए है। जिस दिन गौहरपुर में दस पेड़ों को काटे जाने की घटना हुई, उस दिन कुर्राचित्तरपुर पुलिस चौकी के कर्मी अपने एक बीमार साथी के उपचार में व्यस्त थे। इस दौरान लकड़हारे मौके का फायदा उठाकर भारी पेड़ों पर आरी चला गए।

दूसरी घटना: बुधवार, 29 मई 2025

बीते शनिवार को पेड़ों की कटाई के मामले में वन विभाग द्वारा बरती गई लापरवाही का ही नतीजा था कि पहली घटना के तीन दिन बाद बुधवार को फिर कई हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर दी गई। पेड़ों पर आरी चला रहे लकड़हारों ने स्वीकारा कि यह कटाई वन दरोगा की मौखिक अनुमति से की जा रही है। इस आशय का एक ऒडियो भी सामने आया है।

वन विभाग की चुप्पी और टालमटोल

फतेहाबाद रेंज के आरएफओ विशाल राठौड़ से जब इस अवैध कटाई पर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बिना जवाब दिए फोन काट दिया। सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद न केवल पेड़ कटे, बल्कि विभाग उन्हें छोटे पेड़ बताकर बचाव की मुद्रा में भी नजर आया।

ग्रामीणों की आपत्ति और आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से यह अवैध कटाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में पेड़ नहीं काटे जा सकते। पहले भी कई बार सूचना देने पर वन विभाग ने या तो कोई कार्रवाई नहीं की या औपचारिक कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया।

टीटीजेड में पेड़ कटाई पर है सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताज ट्रेपेजियम ज़ोन में पेड़ कटाई पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। पिछले महीने ही अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने तो दूर, छंटाई तक के लिए अनुमति लेना आवश्यक कर दिया था। बावजूद इसके, आगरा के इस संवेदनशील क्षेत्र में वन विभाग की मिलीभगत से हरियाली का संहार हो रहा है।

सवाल जिनके जवाब मिलने बाकी हैं

वन विभाग ने पहले काटे गये दस में से केवल चार पेड़ों की रिपोर्ट क्यों लिखाई? तीन दिन बाद फिर से कटाई कैसे हुई, जब मामला पहले से सार्वजनिक था? वायरल ऑडियो-वीडियो में सामने आए तथ्यों की जांच क्यों नहीं हो रही? पेड़ बेचने वाले ज़मीन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?

SP_Singh AURGURU Editor