वास्तु में दिशाएं बहुत मायने रखती हैं, जीवन पर पड़ता है असर

हमारे दैनिक जीवन में हमें अपना भोजन बनाना होता है, सोना होता है तथा अनेक दूसरी गतिविधियां संपादित करनी होती हैं। इन सभी गतिविधियों को तीन प्रकृति सात्विक, राजसिक एवं तामसिक में वर्गीकृत किया जा सकता है। ग्रहों के कारकत्व के अनुसार घर की प्रत्येक दिशा एवं हिस्सा हमारे जीवन के विभिन्न विभागों से संबंधित हैं।

Dec 28, 2024 - 23:11
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वास्तु में दिशाएं बहुत मायने रखती हैं, जीवन पर पड़ता है असर

संपूर्ण विश्व पंच महाभूतों अथवा पंचतत्वों जैसे पृथ्वी, अपा, तेजस, वायु एवं आकाश से निर्मित है। आकाश तत्व जीवन के उच्चतर स्तर पर कार्य करता है जबकि चार आधारभूत तत्व जैसे पृथ्वी, अपा, तेजस एवं वायु मनुष्य के दिनानुदिन जीवन के लिए उपयोगी हैं। वह स्वयं भी पंच महाभूत का उत्पाद है। वह घर जिसमें वह निवास करता है, यदि उसमें तत्वों के तीन अवयवों की उपस्थिति रहती है तो जीवन में पीड़ा एवं चिंता बनी रहती है।

हमारे दैनिक जीवन में हमें अपना भोजन बनाना होता है, सोना होता है तथा अनेक दूसरी गतिविधियां संपादित करनी होती हैं। इन सभी गतिविधियों को तीन प्रकृति सात्विक, राजसिक एवं तामसिक में वर्गीकृत किया जा सकता है। ग्रहों के कारकत्व के अनुसार घर की प्रत्येक दिशा एवं हिस्सा हमारे जीवन के विभिन्न विभागों से संबंधित हैं।

यदि नियमों की अवहेलना की जाती है तो वहां भ्रम एवं संशय की स्थिति उत्पन्न होगी तथा उस स्थान में रहने वाले लोग स्वास्थ्य एवं धनागमन से संबंधित अनेक समस्याओं का सामना करेंगे। घर में रहने वाले सभी सदस्यों में आपसी समझ की कमी होगी तथा विरोधाभासों के कारण तनाव उत्पन्न होगा।

आइये, अब हम विभिन्न दिशाओं एवं उनके स्वामियों को समझने की कोशिश करें। पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं तथा पश्चिम दिशा के स्वामी शनि हैं। इसी प्रकार उत्तर दिशा के स्वामी बुध एवं दक्षिण दिशा के स्वामी मंगल हैं। उत्तर-पूर्व दिशा के स्वामी बृहस्पति एवं दक्षिण-पूर्व दिशा के स्वामी शुक्र हैं। उत्तर-पश्चिम दिशा चंद्रमा के द्वारा शासित होती है तथा दक्षिण-पश्चिम दिशा राहु के द्वारा शासित है।

स्वास्थ्यवर्धक होती है पूर्व दिशा

सूर्य जो कि पूर्व दिशा का स्वामी है, स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है, इसीलिए सूर्य की किरणों का प्रवेश सुबह घर में होना चाहिए। इसीलिए हम घर के दरवाजे एवं खिड़‌कियां इस प्रकार से रखते हैं कि घर में सूर्य का प्रकाश अच्छी तरह से आ सके। खिड़कियां सूर्य एवं चंद्र के द्वारा शासित होती हैं, जिन्हें प्रकाशपुंज कहा जाता है तथा दूसरे शब्दों में यही ग्रह मानव जीवन में प्रकाश प्रदान करने में सक्षम हैं।

खासकर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए। सूर्य के जीवनदायिनी सिद्धांतों को मानते हुए दरवाजे एवं खिड़‌कियों को खुला रखा जाता है ताकि घर में सूर्य की किरणों का प्रवेश हो सके। सुबह के सूर्य में जल को शुद्ध करने के गुण होते हैं। सूर्य के प्रकाश का सुबह में प्रवेश जीवन को संरक्षा प्रदान करता है, क्योंकि जैसे ही सूर्य ऊपर चढ़ता जाता है, इसकी विध्वंसकारी शक्तियां बढ़‌ती जाती हैं।

शाम में जब यह नीचे उतरता है तब भी इसका प्रभाव काफी मनभावन होता है। यदि रसोई घर के पूर्व में स्थित हो तो चूंकि शुक्र सूर्य का शत्रु है, इसलिए गृह स्वामिनी को वायवीय विकारों तथा घबराहट जैसी परेशानी होगी। साथ ही मूत्राशय से संबंधित परेशानियां भी हो सकती हैं।

भोजन कक्ष के पश्चिम उपयुक्त दिशा

पश्चिम दिशा का शासक ग्रह शनि है। यह दिशा भोजन कक्ष के लिए काफी उपयुक्त है तथा यह परिवार में शुभ प्रभाव लाती है। जिन व्यक्तियों के इस दिशा में मुख्य द्वार होते हैं उन्हें काफी कठिनाइयों से गुजरना होता है तथा वह अपनी आजीविका शारीरिक श्रम से अर्जित करता है, क्योंकि शनि श्रम एवं कठिन परिश्रम का द्योतक है। इस दिशा में खाद्यान्न रखना लाभदायक है।

खजाने के लिए उत्तर दिशा सबसे बेहतर

चूंकि उत्तर दिशा बुध के द्वारा शासित होता है जो कि मस्तिष्क, शिक्षा आदि का ग्रह है, इसलिए हम इस दिशा में अध्ययन कक्ष बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस दिशा में धन रखने के लिए खजाना अथवा लॉकर भी स्थापित कर सकते हैं। धन के स्वामी बुध हैं जो कि भगवान विष्णु के प्रतीक हैं।

यदि घर का मुख्य द्वार इस दिशा में रखा जाता है तो परिवार का मुखिया काफी बुद्धिमान होगा तथा वह अपनी आजीविका व्यावसायिक उद्यमों अथवा बौद्धिक कार्यों के द्वारा अर्जित करेगा क्योंकि बुध बुद्धि का द्योतक तथा परामर्श एवं संवाद का कारक है। सामान्यतः धन रखने के लिए खजाना अथवा लॉकर के लिए यह दिशा काफी उपयुक्त है। 

शयन कक्ष के लिए सर्वाधिक उपयुक्त दक्षिण दिशा

दक्षिण दिशा के स्वामी मंगल हैं। यह दिशा शयन कक्ष के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। पति के कारक ग्रह मंगल एवं पत्नी के कारक ग्रह शुक्र दोनों एक दूसरे के मित्रवत हैं। अतः इसीलिए यह दिशा दोनों के सोने तथा आपसी प्रेम एवं समझ विकसित करने के उद्देश्य से श्रेष्ठ है। यदि रसोई घर एवं शयन कक्ष दोनों एक दिशा में स्थित होते हैं तो दम्पत्ति को काफी मानसिक तनाव का अनुभव करना पड़ता है। इस दिशा में बैठकर खाना खाना भी उपयुक्त नहीं है क्योंकि इससे स्वास्थ्य खराब हो सकता है तथा अनेक प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इस दिशा को मृत्यु के भगवान की दिशा कहा जाता है।

खाद्यान्न के लिए शुभ है उत्तर-पश्चिम दिशा

इस दिशा के स्वामी वायु हैं। वायु हवाओं के देव हैं तथा इसके शासक ग्रह चंद्रमा हैं। यदि मुख्य द्वार इस दिशा में होता है तो गृह स्वामी को काफी यात्राएं करनी पड़ती हैं। यह स्थान खाद्यान्न रखने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। यहां पर पूजा गृह रखने से भी काफी शुभ संकेत प्राप्त होंगे।

मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम बेस्ट

यह दिशा राहु के द्वारा शासित होता है। इस स्थान पर मास्टर बेडरूम का निर्माण करना चाहिए। यदि किसी कारण से इस दिशा की दीवारें जीर्ण-शीर्ण हों तो वहां मृत आत्माओं का आगमन होता है।

उत्तर-पूर्व आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त

यह दिशा बृहस्पति के द्वारा शासित होती है तथा यहां के शासक देवता ईश्वर होते हैं। यह स्थान आध्यात्मिक कार्यों के सर्वाधिक उपयुक्त है। इस दिशा में पूजा की मूर्तियां स्थापित होनी चाहिए। ऐसा होने पर गृह स्वामी को समाज में अच्छा सम्मान, प्रतिष्ठा एवं इज्जत प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में पूजा गृह एवं स्नान गृह काफी शुभ परिणामदायी होते हैं तथा दीर्घजीविता, अच्छा स्वास्थ्य, सौभाग्य एवं मन की शांति प्रदान करते हैं।

रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व सबसे अच्छा

दक्षिण पूर्व के स्वामी अग्नि हैं तथा इन्हें अग्नि देव कहा जाता है। शुक्र इस दिशा के स्वामी ग्रह हैं। यदि इस दिशा में रसोई घर बनाया जाता है तो परिवार में शांति एवं सौहार्द्र कायम रहता है। यदि किसी कारणवश यहां पर ओवरहेड टैंक अथवा अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री रखी जाता है तो गृह स्वामिनी एवं उनकी पुत्रियों को खराब स्वास्थ्य का सामना करना पड़ता है।

-डॉ० अरविन्द मिश्र

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद

भविष्य बनाओ ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान,शॉप नं, 21, ब्लॉक नं. 25, ग्राउंड फ्लोर (निकट आहार रेस्टोरेंट) संजय प्लेस, आगरा।

परामर्श समय प्रातः 10:50 बजे से सायं 6:30 बजे तक।

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SP_Singh AURGURU Editor