चिकित्सक-रोगी संबंध पर परिचर्चा: चिकित्सक की संवेदना ही उपचार की पहली दवा, भरोसे के बिना अधूरा है मरीज का इलाज

आगरा। चिकित्सक और रोगी के बीच संबंध केवल बीमारी के निदान और उपचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विश्वास, संवेदना, संवाद और मानवीयता पर आधारित होना चाहिए। रोगी चिकित्सक के पास सिर्फ इलाज कराने नहीं, बल्कि उम्मीद और भरोसा लेकर पहुंचता है। चिकित्सा विज्ञान और तकनीक भले ही तेजी से आधुनिक हो रही हो, लेकिन चिकित्सक के संवेदनशील और मानवीय व्यवहार का कोई विकल्प नहीं है। यह विचार दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा की ओर से होटल ओपल कोर्टयार्ड, सिकन्दरा में आयोजित “चिकित्सक-रोगी सम्बन्ध” विषयक परिचर्चा में वक्ताओं ने व्यक्त किए।

Aug 30, 2026 - 22:23
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चिकित्सक-रोगी संबंध पर परिचर्चा: चिकित्सक की संवेदना ही उपचार की पहली दवा, भरोसे के बिना अधूरा है मरीज का इलाज
सिकंदरा स्थित होटल में रविवार को आयोजित चिकित्सक रोगी संबंध विषयक परिचर्चा में मौजूद चिकित्सक, वक्ता और अतिथिगण।

परिचर्चा में चिकित्सा जगत, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पंकज नगाइच ने कहा कि चिकित्सक और रोगी के बीच विश्वास एवं संवाद चिकित्सा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। रोगी की बात को धैर्यपूर्वक सुनना, उसकी स्थिति और भावनाओं को समझना तथा उपचार के संबंध में उचित जानकारी देना चिकित्सकीय सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विश्वास का वातावरण बनने से उपचार की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होती है।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि चिकित्सा केवल रोग के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। चिकित्सक और रोगी के बीच बेहतर संवाद, पारदर्शिता, सम्मान एवं आपसी विश्वास को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं के साथ सेवा भावना और मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मुख्य वक्ता डॉ. ए. के. गुप्ता ने चिकित्सक-रोगी संबंध के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि चिकित्सा का मूल उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि रोगी के मन में विश्वास पैदा करना भी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से आधुनिक हो रहा है और नई तकनीकें उपचार को बेहतर बना रही हैं, लेकिन चिकित्सक की संवेदनशीलता, धैर्य और मानवीय व्यवहार का कोई विकल्प नहीं है। चिकित्सक को रोगी की बीमारी के साथ-साथ उसकी चिंता, भय और मानसिक स्थिति को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक और रोगी के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, चिकित्सा व्यवस्था उतनी ही प्रभावी और मानवीय बनेगी।

विशिष्ट अतिथि विजय पाल सिंह चौहान ने कहा कि रोगी और उसके परिवार के लिए बीमारी का समय मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सक का व्यवहार रोगी के मनोबल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में संवेदनशीलता और सेवा भावना को हमेशा सर्वोच्च स्थान मिलना चाहिए।

वक्ता सुरेश कुशवाह ने चिकित्सक-रोगी संबंध में संवाद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार संवाद की कमी से गलतफहमियां उत्पन्न होती हैं। चिकित्सक और रोगी के बीच सहज, स्पष्ट एवं सम्मानपूर्ण संवाद से विश्वास का वातावरण तैयार किया जा सकता है। उन्होंने समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

मुख्य विचारक डॉ. डी. वी. शर्मा ने परिचर्चा में रोगियों के दृष्टिकोण को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि रोगी चिकित्सक के पास केवल बीमारी का उपचार कराने नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद लेकर आता है। उन्होंने कहा कि रोगी चाहता है कि चिकित्सक उसकी बात को धैर्यपूर्वक सुने, उसकी आशंकाओं को समझे और उपचार के संबंध में उसे सरल भाषा में स्पष्ट जानकारी दे। चिकित्सक का संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार रोगी के विश्वास को मजबूत करता है और उपचार के प्रति सकारात्मक भावना पैदा करता है।

कार्यक्रम की स्वागताध्यक्ष डॉ. अलका सेन ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक-रोगी संबंध केवल बीमारी और उपचार का संबंध नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और मानवीय जुड़ाव का संबंध है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज और चिकित्सा जगत के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम का संचालन संतोष कुलश्रेष्ठ ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को क्रमबद्ध एवं सहज रूप से संचालित करते हुए सभी वक्ताओं को विषय के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखने का अवसर दिया। अंत में सचिव राकेश चन्द्र शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक-रोगी संबंध केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास और मानवीय संवेदना का संबंध है। उन्होंने कहा कि दिव्य सेवा ट्रस्ट ऐसे विषयों पर सार्थक संवाद के माध्यम से समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने तथा जनहित के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा वर्ष 2017 से स्वास्थ्य, शिक्षा, साहित्य, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में निरंतर जनसेवा के कार्य कर रहा है। ट्रस्ट की संस्थापिका डॉ. अरुणा गुप्ता के मार्गदर्शन एवं प्रयासों से संस्था की ओर से विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान सोनिका अग्रवाल के निर्देशन में उनकी शिष्याओं ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति को उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने सराहा।

कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष डॉ. अलका सेन, सचिव राकेश चन्द्र शुक्ला, कोषाध्यक्ष डॉ. संजय सेन, संरक्षक संतोष कुलश्रेष्ठ, उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी सौरभ कुलश्रेष्ठ सहित ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस अवसर पर डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. हरिनारायण चतुर्वेदी, डॉ. आर. वी. सिंह, डॉ. शिवंकर, सोनिका अग्रवाल, सुशील कुमार, डॉ. अनिल शाश्वत, चंद्रशेखर शर्मा, जगमोहन गुप्ता, डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान, श्रीमती शुचिता हरवीर, डॉ. मीनाक्षी वर्मा, मृदुल सहित अनेक चिकित्सक, समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor