ब्रज वैभव अभियान से नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का प्रयास: शैलजाकांत मिश्र, ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ में श्लोकों के जरिए अंतर्मुखी अनुभव पर जोर

मथुरा में आयोजित दो दिवसीय ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान को अंतर्मुखी अनुभव और दैनिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया गया। ‘ब्रज वैभव अभियान’ के माध्यम से ब्रज की आध्यात्मिक विरासत के साथ भारतीय ज्ञान-परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास को भी रेखांकित किया गया।

Aug 29, 2026 - 20:30
 0
ब्रज वैभव अभियान से नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का प्रयास: शैलजाकांत मिश्र, ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ में श्लोकों के जरिए अंतर्मुखी अनुभव पर जोर
हार्टफुलनेस जन्मभूमि आश्रम, मथुरा में दो दिवसीय आवासीय ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ कार्यक्रम में ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र को स्मृति चिह्न प्रदान करते आयोजक।

मथुरा। ब्रज की आध्यात्मिक चेतना, श्रीमद्भगवद्गीता के कालजयी संदेश और हार्टफुलनेस ध्यान के समन्वय से हार्टफुलनेस जन्मभूमि आश्रम, मथुरा में दो दिवसीय आवासीय ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘ब्रज वैभव अभियान’ के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में गीता के श्लोकों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी आंतरिक स्थिति को समझने और गीता के संदेश को दैनिक जीवन में अनुभव करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने किया। उन्होंने ‘ब्रज वैभव अभियान एवं श्रीमद्भगवद्गीता’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए ब्रज की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्ता और श्रीमद्भगवद्गीता की कालजयी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

शैलजाकांत मिश्र ने गुरुतत्व पर भी विचार रखे। उन्होंने उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के गठन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तीर्थ स्थलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके भाव को भी साझा किया।

पुस्तक का हुआ लोकार्पण

उद्घाटन सत्र में ग्लोबल हार्टफुलनेस गाइड कमलेश डी. पटेल (दाजी) द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर ‘ब्रज वैभव अभियान’ के मथुरा समन्वयक निशांत शर्मा ने विभिन्न केंद्रों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम का केंद्रीय भाव ‘अंतःस्थिति के दर्पण के रूप में श्लोक’ रहा। प्रतिभागियों को गीता के श्लोकों के माध्यम से अपनी आंतरिक स्थिति को समझने तथा श्लोकों में निहित संदेश को अपने दैनिक जीवन में अनुभव करने के लिए प्रेरित किया गया।

स्वधर्म से भक्ति तक विभिन्न सत्र

दो दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय, स्वधर्म, त्रिगुणात्मक प्रकृति, स्थितप्रज्ञ, त्याग और भक्ति जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही हार्टफुलनेस ध्यान और चिंतनपरक अभ्यास भी कराए गए।

कार्यक्रम का मार्गदर्शन हार्टफुलनेस गीतोपदेश टीम के ऋषि रंजन, गोरख पारुलकर, कृष्णा सचदेवा और रामकृष्ण द्विवेदी ने किया। सत्रों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गीता का ज्ञान केवल बौद्धिक समझ तक सीमित न रहे, बल्कि उसका अनुभव व्यक्ति के जीवन, संबंधों, कर्तव्यों और आंतरिक विकास में दिखाई दे।

नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ‘ब्रज वैभव अभियान’ का उद्देश्य केवल ब्रज के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव को सामने लाना नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना भी है। इसी क्रम में ‘गीतोपदेश—हृदय मम पश्यसि’ जैसे कार्यक्रम समाज को श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वकालिक संदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गीता का संदेश जीवन के प्रत्येक पक्ष से जुड़ा है। इसे केवल पढ़ने और समझने के बजाय जीवन में उतारने तथा उसके संदेश को आंतरिक अनुभव में बदलने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में ध्यान, चिंतन और श्लोकों के अभ्यास के माध्यम से इसी दिशा में प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया।

इस दौरान अर्चना अष्टकार, रेखा अग्रवाल, शोभिता श्रीवास्तव, प्रियदर्शनी सक्सेना, बिमला देवी, सुरेंद्र शर्मा, विशाल शर्मा, एम.एस. सोलंकी, एस.एस. भारद्वाज, रंजीत, संजय और जे.पी. सिंह सहित अनेक गणमान्यजन एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor