ब्राह्मण समन्वय संवाद–2 में उठा राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा, ब्राह्मण आयोग और राजनीतिक पार्टी की जरूरत पर जोर

आगरा। श्याम नगर, रामबाग स्थित महादेवी सेवा सदन में रविवार को ‘ब्राह्मण समन्वय संवाद–2’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ब्राह्मण संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चिंतन, संवाद और संकल्प के साथ समाज को संगठित करने, राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने तथा विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा हुई।

Aug 30, 2026 - 22:07
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ब्राह्मण समन्वय संवाद–2 में उठा राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा, ब्राह्मण आयोग और राजनीतिक पार्टी की जरूरत पर जोर
रामबाग स्थित महादेवी सेवा सदन में रविवार को आयोजित ‘ब्राह्मण समन्वय संवाद–2’ कार्यक्रम में मौजूद महेश शर्मा, लेखिका भावना वरदान शर्मा, राजेंद्र शास्त्री, सोनम शर्मा और राजकुमार शर्मा आदि।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संयोजक सुरेश शर्मा और अध्यक्ष अजय शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में महेश शर्मा, लेखिका भावना वरदान शर्मा, राजेंद्र शास्त्री, सोनम शर्मा और राजकुमार शर्मा वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अजय शर्मा ने किया।

ब्राह्मण आयोग की मांग उठी

लेखिका भावना वरदान शर्मा ने कहा कि ब्राह्मणों की देश में अपनी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही ब्राह्मणों के लिए कोई संवैधानिक आयोग है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार ब्राह्मण राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर पिछड़ा हुआ है। ऐसे में समय की मांग है कि ब्राह्मण समाज अपनी राजनीतिक पार्टी बनाए और ब्राह्मण आयोग के गठन की मांग को मजबूती से उठाए।

उन्होंने ब्राह्मण संरक्षण एक्ट, सवर्ण/ब्राह्मण आयोग के गठन, ब्राह्मण विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, मंदिरों के विप्र पुजारियों के लिए भत्ता, यूजीसी के प्रावधानों में बदलाव की मांग समेत कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यदि ब्राह्मणों की समस्याओं के प्रति वास्तव में चिंता है तो ब्राह्मण आयोग का गठन होना चाहिए। उन्होंने मंदिरों की संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, यूजीसी के प्रावधानों में बदलाव, ईडब्ल्यूएस व्यवस्था को सरल बनाने और गौहत्या प्रतिबंध कानून की भी मांग रखी।

भावना वरदान शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समाज को राजनीतिक और सामाजिक रूप से अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने ब्राह्मणों के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप लगाते हुए समाज के लिए आरक्षण की आवश्यकता की बात भी रखी।

संगठन में सभी को अवसर देने पर जोर

संयोजक सुरेश शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। उन्होंने कहा कि कई बार समाज के लोग अपने ही लोगों को आगे आने से रोकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं कोई उनसे आगे न निकल जाए। समाज में किसी एक व्यक्ति का आगे बढ़ना किसी दूसरे की हार नहीं है।

सुरेश शर्मा ने कहा कि उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को नेता बनाना नहीं, बल्कि हर योग्य व्यक्ति को नेतृत्व का अवसर देना है। उन्होंने समाज के लोगों से केवल भीड़ का हिस्सा बनकर कार्यक्रम में आने के बजाय अपनी बात रखने, दूसरों की बात सुनने और समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने ब्राह्मण समाज में आपसी समन्वय, संवाद और संगठन की आवश्यकता पर जोर दिया। विभिन्न ब्राह्मण संगठनों की सहभागिता के बीच हुए संवाद में समाज से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और भविष्य में एकजुट होकर कार्य करने पर बल दिया गया।

SP_Singh AURGURU Editor