कुमाऊं के सीमावर्ती बच्चों ने देखी देश की ताकत और विरासत, पहला राष्ट्रीय एकता दौरा पूरा; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात बनी यादगार
-आरके सिंह- बरेली। भारतीय सेना की ‘सद्भावना’ पहल के तहत कुमाऊं क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों के बच्चों के लिए आयोजित पहला राष्ट्रीय एकता दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 15 दिनों के इस दौरे में कुमाऊं के दूर-दराज सीमावर्ती इलाकों से 20 छात्र और दो शिक्षक शामिल हुए। यात्रा के दौरान बच्चों को देश की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सैन्य परंपराओं और तकनीकी प्रगति को करीब से जानने-समझने का अवसर मिला। इस पूरे दौरे का सबसे यादगार क्षण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बच्चों की मुलाकात और बातचीत रही।
पिथौरागढ़ से शुरू हुआ सफर
राष्ट्रीय एकता दौरे के दल को पिथौरागढ़ से पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर गौतम पठानिया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने छात्रों को सीखने और देश को करीब से समझने के इस अनूठे अवसर का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
दौरे के दौरान छात्रों ने देश के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया और भारत की समृद्ध विरासत एवं आधुनिक विकास को समझा। कई प्रतिभागियों के लिए यह अपने कुमाऊं क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों से बाहर की पहली यात्रा थी।
राष्ट्रपति से मुलाकात बनी अविस्मरणीय
दौरे की सबसे खास उपलब्धि छात्रों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात रही। बच्चों ने राष्ट्रपति के साथ बातचीत की, जो उनके लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गया। खासतौर पर उन छात्रों के लिए यह अनुभव बेहद महत्वपूर्ण रहा, जो इससे पहले अपने गांवों से बाहर नहीं निकले थे।
दल ने राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और लाल किला समेत कई ऐतिहासिक स्मारकों एवं संग्रहालयों का दौरा किया। छात्रों ने नेहरू तारामंडल में भी भ्रमण किया। इसके अलावा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इन यात्राओं के माध्यम से छात्रों ने भारत के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और सशस्त्र बलों के बलिदानों को करीब से जाना।
सेना की परंपरा और अनुशासन से हुए परिचित
देहरादून में छात्रों ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा किया।
इन संस्थानों में छात्रों को शिक्षा, नेतृत्व, अनुशासन और भारतीय सशस्त्र बलों की कार्य-संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। बच्चों ने सैन्य प्रशिक्षण और नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं को समझा तथा देश की सेवा के लिए समर्पण और अनुशासन के महत्व को जाना।
बरेली में साझा किए दौरे के अनुभव
राष्ट्रीय एकता दौरे के तहत दल बरेली भी पहुंचा। यहां छात्रों ने जीओसी, हेडक्वार्टर उत्तर भारत एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, AVSM से मुलाकात की। छात्रों ने उनके साथ दौरे के दौरान मिले अनुभव और अपनी प्रमुख सीख साझा कीं।
इसके बाद दल लखनऊ के लिए रवाना हुआ, जहां हेडक्वार्टर सूर्या कमांड में उसका स्वागत किया गया। लखनऊ दर्शन के बाद दल मुनस्यारी के लिए रवाना हुआ और इसके साथ ही 15 दिवसीय राष्ट्रीय एकता दौरे का सफल समापन हुआ।
बढ़ा आत्मविश्वास, मजबूत हुई राष्ट्रीय एकता की भावना
राष्ट्रीय एकता दौरे ने सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों के अनुभवों का दायरा व्यापक किया। यात्रा के दौरान उन्होंने देश की विविधता, सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक व्यवस्था, सैन्य परंपराओं और तकनीकी प्रगति को करीब से समझा।
इस यात्रा से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा और उनमें देशभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत हुई। भारतीय सेना की ‘सद्भावना’ पहल के तहत आयोजित इस दौरे ने दूर-दराज सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं के सर्वांगीण विकास के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।