डीएससी-एनएससी सम्मेलन का डीईआई में समापनः चेतना और सतत भविष्य पर गहन विमर्श
आगरा। दयालबाग शैक्षिक संस्थान (डीईआई) में विज्ञान एवं अभियांत्रिकी ऑफ एवोल्यूशनरी/री-एवोल्यूशनरी कॉन्शसनेस (डीएससी) और 48वां नेशनल सिस्टम्स कॉन्फ्रेंस (एनएससी) का अंतिम दिन बुधवार को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समापन दिवस पर अनेक महत्वपूर्ण सत्रों, पुरस्कार वितरण, पैनल चर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सम्मेलन को सार्थक और अविस्मरणीय बना दिया। सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसएसआई) की वार्षिक आम बैठक से शुरू होकर यह दिवस चेतना, सतत विकास और समाज में विज्ञान के योगदान पर गहन विमर्श का साक्षी बना।
समापन दिवस की शुरुआत सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसएसआई) की वार्षिक आम बैठक से हुई। इसके बाद प्रो. ए.एल. अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन फॉर द ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट इन इंडिया (एटीडीआई), नई दिल्ली एवं उनके पुत्र अमिया अग्रवाल का आमंत्रित व्याख्यान हुआ। उन्होंने ‘मोबिलिटी और पावर्टी (परिवहन तंत्र)’ विषय पर अपने विचार रखे। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. डी. भगवन दास (डीईआई) ने की।
शोधार्थियों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष सत्र आयोजित हुआ, जिसमें दयालबाग संत सुपर्ह्यूमन एवोल्यूशनरी स्कीम के बच्चों ने योगदानात्मक प्रस्तुतियां दीं।
दयाल अनुपमा न्यारी ने ‘Climbing Up to the Shiny World: पिंड, ब्रह्माण्ड और निर्मल चेतन देश’ विषय पर ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति दी।
अनमोल बांदगी ने ‘The Law of Imprints: A Child’s System Model of Work is Worship’ पर व्याख्यान दिया।
सुमेरा कुमार ने ‘Impact of Consciousness Studies in the Academic Discipline’ विषय पर चित्रात्मक प्रस्तुति दी।
के. अगम्भदा और के. सुरतशब्दा ने ‘Energy Consciousness: Towards a Net (Near) Zero Energy Lifestyle’ विषय पर प्रस्तुतिकरण किया।
इस सत्र की संयोजक प्रो. रूपाली सतसंगी (डीईआई) रहीं। प्रस्तुतकर्ताओं को मोमेंटो और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
हैकाथॊन विजेताओं की प्रस्तुतियां
इसके बाद एनएससी-ScHii हैकाथॉन के विजेताओं की प्रस्तुतियां हुईं। संयोजक हार्दिक चड्ढा (डीईआई) रहे। विजेता प्रोजेक्ट्स थे- ध्रुव सतसंगी और सुरत सारुप: ‘Biometrics for Cows’, मेहर माथुर और सान्या कल्याण: ‘Solar Panel Cleaner’, आरना दयाल और बानी सतसंगी: ‘Multi-Model Digital Assistant’। विजेताओं को डीईआई निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए।
इन्हें मिले एसएसआई पुरस्कार
एसएसआई के प्रतिष्ठित पुरस्कार विभिन्न योगदानकर्ताओं को दिए गए। लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड: प्रो. एस.एस. भोजवानी एवं डॉ. एस.के. सतसंगी, नेशनल सिस्टम्स गोल्ड मेडल: प्रो. हुजूर सरन (आईआईटी दिल्ली), राजकुमार वरुणशेय अवार्ड: डॉ. अंबालाल वी. पटेल (वैज्ञानिक, जी. एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी) एसएसआई विक्रम अवार्ड: डॉ. अंकित साहाई (डीईआई) यंग सिस्टम्स साइंटिस्ट अवार्ड: डॉ. वीरेश्वर कुमार (आईआईटी दिल्ली) को मिला।
पर्यावरण के साथ सामंजस्य में न्यायसंगत, लचीले और सतत भविष्य के लिए पुनर्योजी प्रणालियां पर पैनल चर्चा
समापन दिवस पर एक संवादात्मक पैनल चर्चा आयोजित हुई जिसका विषय था- पर्यावरण के साथ सामंजस्य में न्यायसंगत, लचीले और सतत भविष्य के लिए पुनर्योजी प्रणालियां। इसके मुख्य पैनलिस्ट में शामिल प्रो. वी.बी. गुप्ता (डीईआई) ने निःस्वार्थ सेवा को शांति और सुख का कारण बताया। गुर सरूप सूद (अध्यक्ष, रा धा स्वा मा मी सत्संग सभा, दयालबाग व डीईआई) ने चेतना को सार्वभौमिक घटना बताया। डॉ. अनूप श्रीवास्तव (उपाध्यक्ष, रा धा स्वा मा मी सत्संग सभा, दयालबाग) ने चेतना के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
डॉ. एस.के. सतसंगी (अध्यक्ष, पूर्व छात्र संघ, डीईआई) ने कहा कि जाति आत्म-साक्षात्कार में बाधा नहीं है, यह दयालबाग जीवन शैली से प्रमाणित है। प्रो. आनंद श्रीवास्तव (यूनिवर्सिटी ऑफ कील, जर्मनी) ने सतत भविष्य हेतु देशों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। प्रो. अन्ना एम. होरात्शेक (यूनिवर्सिटी ऑफ कील, जर्मनी) ने Human और Humane शब्दों के अंतर को स्पष्ट किया।
अन्य पैनलिस्ट में प्रो. पम्मी दुआ, प्रो. हुजूर सरन, डॉ. अपूर्वा नारायण, प्रो. सरूप रानी माथुर, डॉ. अपूर्वा रतन मूर्ति, प्रो. पी.के. कालरा, प्रो. सी. पटवर्धन, प्रो. आनंद मोहन और श्रीमती स्नेह बिजलानी शामिल रहे। संचालन डॉ. संजय भूषण ने किया।
इस सत्र में डीएससी और एनएससी 2026 के आयोजन हेतु सहमति-निर्माण बैठक भी हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. सी. पटवर्धन ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
सम्मेलन के अंत में डीईआई के छात्र-छात्राओं और संत सुपर्ह्यूमन एवोल्यूशनरी स्कीम के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत, पश्चिमी संगीत (राष्ट्रीय युवा महोत्सव में प्रथम पुरस्कार विजेता), मिथिलांचल लोकगीत और तीन विशेष प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं जिनमें समूह नृत्य और गुरु वंदना प्रमुख रहे।
सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र व पोस्टर पुरस्कार
डीएससी सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार: पुष्पनीत कौर एवं प्रो. वी. प्रेमलता, डीएससी सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार: डॉ. एम.एस. भारद्वाज, एनएससी सर्वश्रेष्ठ पेपर पिक्सल्स पुरस्कार: अगम प्रकाश, झनकार नैय्यर, डॉ. दयाल प्यारी श्रीवास्तव, गुरुप्रिय, निरपेश दीक्षित, हिमांशु बंसल, प्रो. सुखदेव राय, शिवानी गौतम, सुरिमान पुलान एवं डॉ. कविता कुमार और एनएससी सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार: हिमांशु भारद्वाज को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. कुमार रत्नाकर (डीईआई) के धन्यवाद प्रस्ताव, संस्थान गीत और विदाई भोज के साथ हुआ।