अनुभव प्रमाण पत्र का खेल पड़ा भारी, तीन साल के लिए ठेके की दौड़ से बाहर हुई फर्म

आगरा विकास प्राधिकरण में श्रेणी-बी (सिविल) ठेकेदारी पंजीकरण के लिए मैसर्स हनुमान इंटरप्राइजेज की ओर से मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नाम से अनुभव प्रमाण पत्र लगाए गए थे। सत्यापन में मथुरा प्राधिकरण ने इन प्रमाण पत्रों को अपने द्वारा जारी किए जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद एडीए ने फर्म और उसके प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा को तीन साल के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से डिबार कर दिया।

Sep 8, 2026 - 19:00
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अनुभव प्रमाण पत्र का खेल पड़ा भारी, तीन साल के लिए ठेके की दौड़ से बाहर हुई फर्म

आगरा। ठेका हासिल करने के लिए अनुभव का सहारा लेना एक फर्म को भारी पड़ गया। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में ठेकेदारी पंजीकरण के लिए लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्रों की सत्यापन प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। फर्म ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नाम से अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, लेकिन सत्यापन में संबंधित प्राधिकरण ने साफ कर दिया कि ऐसे प्रमाण पत्र उसकी ओर से जारी ही नहीं किए गए।

मामला मैसर्स हनुमान इंटरप्राइजेज और उसके प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा से जुड़ा है। फर्म की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आगरा विकास प्राधिकरण में श्रेणी-बी (सिविल) में ठेकेदारी पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन के साथ फर्म के अनुभव को साबित करने के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, मथुरा के नाम से जारी बताए गए प्रमाण पत्र भी संलग्न किए गए।

ठेकेदारी पंजीकरण की प्रक्रिया के तहत एडीए ने दस्तावेजों की सत्यता की जांच शुरू की। इसी क्रम में अनुभव प्रमाण पत्रों को संबंधित प्राधिकरण से सत्यापित कराया गया। जांच में मामला उस समय पलट गया, जब 29 अगस्त 2026 को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की ओर से एडीए को जवाब भेजा गया। संबंधित प्राधिकरण ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि हनुमान इंटरप्राइजेज के नाम से लगाए गए उक्त अनुभव प्रमाण पत्र मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद एडीए के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और फर्म के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की।

फर्जी अनुभव के सहारे ठेकेदारी की कोशिश

ठेकेदारी में अनुभव को महत्वपूर्ण योग्यता माना जाता है। इसी अनुभव के आधार पर फर्मों को विभिन्न श्रेणियों में पंजीकरण और निविदा प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है। ऐसे में किसी दूसरे सरकारी प्राधिकरण के नाम से अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर पात्रता हासिल करने का प्रयास गंभीर मामला माना गया।

एडीए की जांच में जब प्रमाण पत्रों की वैधता ही सामने नहीं आई तो फर्म की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों पर सवाल खड़े हो गए। इसके बाद प्राधिकरण ने नियमों के तहत सख्त कदम उठाते हुए मैसर्स हनुमान इंटरप्राइजेज और उसके प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा को तीन वर्ष की अवधि के लिए निविदा प्रक्रिया में प्रतिभाग करने से डिबार कर दिया। यानी जिस ‘अनुभव’ के सहारे फर्म ठेकेदारी की दौड़ में शामिल होना चाहती थी, सत्यापन में वही दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद उसकी पूरी दावेदारी खत्म हो गई।

एडीए की कार्रवाई से मचा हड़कंप

सरकारी निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता को लेकर एडीए की ओर से अपनाई जा रही सख्ती का यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राधिकरण ने दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कार्रवाई करते हुए साफ संदेश दिया है कि फर्जी अथवा गलत दस्तावेजों के आधार पर ठेकेदारी हासिल करने का प्रयास करने वाली फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि एडीए इससे पहले भी एक फर्म को डिबार कर चुका है। ऐसे में लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद ठेकेदारी से जुड़े दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। फिलहाल हनुमान इंटरप्राइजेज और उसके प्रोपराइटर विनोद कुमार कुकरेजा के लिए तीन साल तक एडीए की निविदा प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता बंद हो गया है।