23 दिन में एक्सप्रेसवे की खुली पोल, एनएचएआई का पीएनसी इंफ्राटेक पर बड़ा प्रहार, टोल भी बंद

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बारिश के दौरान सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ा फैसला लिया है। एक्सप्रेसवे की मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली पर रोक लगा दी गई है। निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को नोटिस जारी करते हुए उसे नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कंपनी की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर जुर्माने का प्रस्ताव है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। सड़क की गुणवत्ता की जांच अब आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम करेगी। उल्लेखनीय है कि आगरा स्थित पीएनसी इंफ्राटेक के मालिक प्रदीप जैन हैं, जो भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई हैं।

Aug 5, 2026 - 19:29
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23 दिन में एक्सप्रेसवे की खुली पोल, एनएचएआई का पीएनसी इंफ्राटेक पर बड़ा प्रहार, टोल भी बंद

भाजपा सांसद नवीन जैन के परिवार की है कंपनी, बारिश में बार-बार धंसी सड़क, एनएचएआई ने जारी किया नोटिस, पीएनसी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू, आईआईटी खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच

आगरा। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 23 दिन बाद ही सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के दौरान कई स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई ) ने निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। एनएचएआई ने साफ कर दिया है कि जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित और दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक टोल टैक्स की वसूली नहीं की जाएगी। इससे पहले इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर कार से एक तरफ का टोल 290 रुपये लिया जा रहा था।

पीएनसी इंफ्राटेक पर कार्रवाई, भविष्य की परियोजनाओं पर भी संकट

एनएचएआई ने सड़क निर्माण में गंभीर खामियां मिलने के बाद पीएनसी इंफ्राटेक को नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो कंपनी के लिए भविष्य में एनएचएआई की नई परियोजनाएं हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा कंपनी की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर 2 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं परियोजना से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ तीन वर्ष तक डिबारमेंट की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

कंपनी के अधिकारियों पर भी गिरी गाज

एनएचएआई ने परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। हटाए गए अधिकारियों में प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंजीनियर सुरेंद्र कुमार, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार शामिल हैं। इन अधिकारियों को आगामी दो वर्षों तक एनएचएआई की किसी भी परियोजना में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा एनएचएआई की ओर से प्रोजेक्ट मैनेजर रहे नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ चौरसिया सहित संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

आईआईटी खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच

सड़क आखिर बार-बार क्यों धंस रही है, इसका पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम को जांच सौंपी गई है। विशेषज्ञ सड़क की डिजाइन, निर्माण सामग्री, ड्रेनेज व्यवस्था और तकनीकी मानकों की विस्तृत जांच करेंगे।

मरम्मत का पूरा खर्च भी कंपनी ही उठाएगी

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के अनुसार, सड़क की मरम्मत पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। यह पूरा खर्च निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को अपने स्तर पर उठाना होगा। 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-64 पर पहली बार सड़क धंसने (स्लिपेज) की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद कई स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी।

आगरा की कंपनी, राजनीतिक चर्चा भी तेज

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण आगरा स्थित पीएनसी इंफ्राटेक ने किया है। कंपनी के मालिक प्रदीप जैन हैं, जो भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई हैं। सड़क निर्माण में सामने आई खामियों और एनएचएआई की सख्त कार्रवाई के बाद इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक एनएचएआई की कार्रवाई निर्माण गुणवत्ता और अनुबंधीय जिम्मेदारियों के आधार पर की गई है। किसी राजनीतिक व्यक्ति के विरुद्ध कोई आधिकारिक आरोप नहीं लगाया गया है।