आगरा में सात घंटे तक नाले में तड़पती रही गर्भवती गाय, सूचना देने के बाद भी नगर निगम अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी, थक हारकर पार्षद किशन नायक ने नाले में खुद उतरकर सफाईकर्मियों की मदद से बचाई बेजुबान की जान
आगरा। स्मार्ट सिटी आगरा में नगर निगम की लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। वॉटर वर्क्स स्थित जलकल विभाग के सामने खुले गहरे नाले में एक गर्भवती गाय करीब सात घंटे तक फंसी तड़पती रही, लेकिन सूचना दिए जाने के बावजूद नगर निगम की कोई रेस्क्यू टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची। क्षेत्रीय पार्षद किशन नायक द्वारा नगर निगम के कई अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी लगभग तीन घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार पार्षद स्वयं कर्मचारियों के साथ नाले में उतरे और कड़ी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला।

गाय के रेस्क्यू के दौरान नाले पर मौजूद लोग।
इधर पार्षद द्वारा नगरायुक्त से शिकायत किए जाने के बाद नगर निगम की मशीनरी हरकत में आई, लेकिन जब तक नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, तब तक लोगों द्वारा गाय को बाहर निकाला जा चुका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह प्रयास नहीं किया जाता तो बेजुबान गौ माता की जान भी जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह वॉटर वर्क्स स्थित जलकल विभाग के सामने बने खुले नाले में एक गर्भवती गाय गिर गई थी। गहरे नाले में फंसने के कारण वह कई घंटों तक बाहर नहीं निकल सकी और लगातार तड़पती रही।
जैसे ही घटना की जानकारी क्षेत्रीय पार्षद किशन नायक को मिली, उन्होंने तत्काल नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, निर्माण विभाग तथा मेट्रो व एलटी विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर रेस्क्यू टीम भेजने का अनुरोध किया।
पार्षद किशन नायक के अनुसार, सूचना देने के बाद भी करीब तीन घंटे तक कोई अधिकारी या रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची। लगातार इंतजार के बाद भी जब राहत कार्य शुरू नहीं हुआ तो पार्षद किशन नायक ने नगर आयुक्त को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद नगर निगम का अमला हरकत में तो आया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी, क्योंकि तब तक गाय को बाहर निकाला जा चुका था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पार्षद किशन नायक स्वयं सफाई कर्मचारियों के साथ नाले में उतर गए। स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि पार्षद खुद पहल नहीं करते तो गौ माता की जान बचाना मुश्किल हो सकता था।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी घटना के दौरान सवालों के घेरे में रही। गौ माता के सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब उन्हें जानकारी मिली कि रेस्क्यू पूरा हो चुका है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर अधिकारी पहुंचते तो राहत कार्य और तेजी से पूरा किया जा सकता था।
पार्षद किशन नायक का कहना है कि घटना के दौरान क्षेत्र का सुपरवाइजर, एसएफआई इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य अधिकारी और निर्माण विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। इससे नगर निगम की कार्यशैली और आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि बरसात के मौसम में खुले नाले पहले ही हादसों को न्योता दे रहे हैं। यदि समय रहते इन्हें सुरक्षित नहीं किया गया और आपात स्थिति में विभागीय टीमें सक्रिय नहीं हुईं तो भविष्य में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को न मिले।