शेख हसीना बोलीं,  'मुझे अपनी नहीं, बांग्लादेश के भविष्य की चिंता, वो मुझे मार सकते हैं,  फिर भी जाऊंगी'

  शेख हसीना ने बांग्लादेश में 2024 में हुए छात्रों के प्रदर्शन पर बोलते हुए कहा कि वो स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं था। वह एक ऑर्गेनाइज्ड प्रोटेस्ट था। वहीं, बांग्लादेश की वापसी के फैसले पर शेख हसीना ने खुलकर कहा कि वो डर की वजह से रुकने वाली नहीं हैं। वह बांग्लादेश जाएंगी। इस बीच  बांग्लादेश ने इस पर आपत्ति जताई है। बांग्लादेश की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना या आवामी लीग के किसी भी नेता या व्यक्ति को भारतीय जमीन का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करने के लिए न करने दिया जाए।

Aug 5, 2026 - 20:03
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शेख हसीना बोलीं,  'मुझे अपनी नहीं, बांग्लादेश के भविष्य की चिंता, वो मुझे मार सकते हैं,  फिर भी जाऊंगी'

 
नई दिल्ली। बांग्लादेश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेशी आवामी लीग की अध्यक्षा शेख हसीना ने संबोधन दिया। इस कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा कि ये वो बांग्लादेश नहीं जिसके लिए 30 लाख लोग बलिदान हुए। 1971 का मूवमेंट हुआ। यह कहते हुए शेख हसीना इमोशनल भी हो गईं। मैं एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बोल रही हूं जिसने अपनी जिंदगी बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताई है, जिसे अपने देश से दूर जाने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई। शेख हसीना बोलीं कि मुझे अपने भविष्य की नहीं, बांग्लादेश के फ्यूचर की चिंता है। बांग्लादेश के लोगों को सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति चाहिए।
 
शेख हसीना ने कहा कि 1981 में जब मैं बांग्लादेश लौटी थी तब भी उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश की। वापसी के बाद मुझे कई बार गिरफ्तार किया गया। लेकिन मैं वतन वापसी से नहीं रुकी। मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है, मुझे बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है। मुझे पता है कि बांग्लादेश जाने पर वह मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मार सकते हैं या जेल में डाल सकते हैं, लेकिन मैं वापस जरूर जाऊंगी।
दो साल पहले बांग्लादेश के प्रदर्शन पर शेख हसीना ने कहा, 'पिछले दो सालों से, मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को मुश्किलों से गुजरते देखा है। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था, यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी। मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हूं। यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। शुरू से ही, मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य से इस मुद्दे को शांति से सुलझाने की कोशिश की। लेकिन सुधार की बात की आड़ में, कुछ संगठित समूह छात्रों की माँगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश कर रहे थे।'
 
शेख हसीना के बोलने से पहले निर्वासन में रह रहे शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के नेताओं ने बांग्लादेश की सत्ता के पूर्व सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर भी जुबानी हमला बोला। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार में मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने कहा कि हम बदला नहीं चाहते हैं। हम बस इंसाफ चाहते हैं। हम अपील करना चाहते हैं कि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद को सपोर्ट ना करें। हम बांग्लादेश को एक फेल्ड स्टेट नहीं बनने देना चाहते हैं।
शेख हसीना की ये वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के द फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में हुई। इसको लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार का इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से कोई लेना-देना नहीं है। ना ही इस मंच से कही जाने वाली बातों का समर्थन करती है।
 
अब इस पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'जिस प्रोग्राम की आप बात कर रहे, उसका आयोजन एक प्राइवेट मीडिया संस्था कर रही है। भारत सरकार की इसमें किसी तरह की भूमिका नहीं है। सरकार इस कार्यक्रम में रखे जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती है।'