'मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताना इतिहास और देशभक्ति का अपमान', मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जताई कड़ी आपत्ति

-आरके सिंह- बरेली। मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताए जाने संबंधी बयानों पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने लेखिका तस्लीमा नसरीन और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे बयान ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करने वाले और सांप्रदायिक सोच को बढ़ावा देने वाले हैं।

Aug 5, 2026 - 19:59
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'मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताना इतिहास और देशभक्ति का अपमान', मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जताई कड़ी आपत्ति
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जारी बयान में कहा कि तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता के एक कार्यक्रम में मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया था। इसके बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मदरसे अघोषित रूप से आतंकवादियों के अड्डे हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों बयानों की वह कड़ी निंदा करते हैं।

मौलाना ने कहा कि मदरसों का इतिहास पढ़े बिना इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मदरसों का इतिहास उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध है और उसे पढ़ने के बाद ही कोई राय बनानी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि भारत की आजादी की लड़ाई में मदरसों से जुड़े उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार रुहेलखंड के बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर से लेकर दिल्ली तक अनेक उलेमा और छात्रों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और अपनी जान की कुर्बानी दी।

मौलाना ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि अनेक उलेमा और छात्र देश की आजादी के लिए शहीद हुए। ऐसे संस्थानों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाना उन लोगों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।

उन्होंने कहा कि जिन मदरसों से जुड़े लोगों ने देश के निर्माण और आजादी के संघर्ष में योगदान दिया, आज उन्हीं संस्थानों को आतंकवाद का अड्डा बताया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार इस प्रकार के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और इनसे बचा जाना चाहिए।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि देश में किसी भी शैक्षणिक या धार्मिक संस्था पर टिप्पणी करते समय तथ्यों और इतिहास का सम्मान किया जाना चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक विवाद और वैमनस्य की स्थिति पैदा न हो।

SP_Singh AURGURU Editor