आगरा में नकली दवाओं की जड़ें गहरी, सैकड़ों शार्क तैर रही हैं, दो का खुलासा तो बस ‘ट्रेलर’

आगरा। आम लोगों की सेहत को चाटता आगरा का नकली दवा कारोबार एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। पिछले दो दिन की छापेमारी ने साफ कर दिया है कि आगरा नकली दवा माफिया का गढ़ बन चुका है। जानकारों का कहना है कि इस कार्रवाई में अभी तो केवल दो मछलियां ही जाल में फंसी हैं, जबकि शहर में ऐसे सौ-दो सौ शार्क खुलेआम तैर रही हैं। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मंडी ड्रग विभाग की आंखों से कैसे बची रही? जवाब सबको मालूम है- डिपार्टमेंट की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव ही नहीं।

Aug 24, 2025 - 18:31
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आगरा में नकली दवाओं की जड़ें गहरी, सैकड़ों शार्क तैर रही हैं, दो का खुलासा तो बस ‘ट्रेलर’

दवा बाजार के जानकारों का कहना है कि अब तक हुई बरामदगी तो महज छोटा सा अंश है। सरकारी तंत्र और गहरे में उतरेगा तो इतना बड़ा नेटवर्क सामने आएगा कि आंखें फटी की फटी रह जाएंगी।

लखनऊ से बनी टीम और खुल गया खेल

ड्रग विभाग की ढुलमुल कार्यवाही के बीच जब लखनऊ से स्पेशल टीम बनी, तभी जाकर खेल खुला। अलग-अलग मंडलों के सहायक औषधि नियंत्रकों, औषधि निरीक्षकों और एसटीएफ के आने का नतीजा यह हुआ कि फव्वारा मार्केट की हड्डियां तक कांप उठीं। नकली दवा कारोबारियों को लगा था कि सब कुछ सेट है, मगर जब लखनऊ से आई टीम ने दबिश दी तो असली चेहरे सामने आ गए।

एक करोड़ सामने धर दिए, पर बचा न पाई पाप की कमाई

हिम्मत देखिए नकली दवाओं के बूते चंद सालों में करोड़ों में खेलने वाले हिमांशु अग्रवाल की! छापा मारने वालों के सामने सीधे एक करोड़ रुपये कैश रख दिया। सूत्र बताते हैं कि रकम को दोगुना करने का ऑफर भी दिया गया। लेकिन यहां माफिया की दाल नहीं गली। करोड़ों के मालिक बनने का उसका सफर आखिरकार उसे जेल की सलाखों के पीछे ले जा पहुंचा। ये वही हिमांशु है, जो कुछ साल पहले तक मामूली जिंदगी जी रहा था। नकली दवाओं के धंधे ने उसे अचानक मालामाल कर दिया और अब उसी धंधे ने उसका खेल खत्म कर दिया।

ब्रांडेड कंपनियों का दबाव और सच्चाई का विस्फोट

यह कार्रवाई हवा-हवाई नहीं हुई। असली दबाव जायडस सन फार्मा, ग्लेनमार्क और सनोफी जैसी उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों का था जिनकी दवाओं के नाम पर नकली पैकिंग करके बाजार में माल आधी कीमत पर बेचा जा रहा था। बिक्री में लगातार गिरावट के बाद कंपनियों के स्टाकिस्ट्स और प्रतिनिधियों ने अपने हेड ऒफिस तक बात पहुंचाई। कंपनियों के स्तर से मामला सीधे लखनऊ पहुंचा और फिर यहां की धरपकड़ की प्लानिंग हुई।

करोड़ों का माल जब्त, गोदाम सील

फव्वारा मार्केट में हेमा मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर पर अब तक कार्रवाई हो चुकी है। बंसल मेडिकल स्टोर और उसके गोदामों को सील कर दिया गया है। वहीं, हेमा मेडिको के चार-चार गोदामों से बरामद हुई करोंड़ों रुपये कीमत की नकली दवाओं की सूची तैयार की जा रही है। यह दवाएं कैंसर, हार्ट और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की थीं, जिन्हें नकली पैकिंग कर असली ब्रांड के नाम पर ठेला जा रहा था। हेमा मेडिको की दवाओं की सूची बनने के बाद बंसल मेडिकल स्टोर के गोदाम खोले जाएंगे।

अभी तो शुरुआत है...

गिरफ्तार व्यापारी हिमांशु अग्रवाल पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब उसके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं। सप्लाई चेन सिर्फ आगरा तक नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर दूसरे राज्यों तक फैली हुई थी। पिछले साल नवंबर में भी 1.36 करोड़ की नकली दवाएं पकड़ी गई थीं, और अब तीन करोड़ से अधिक। ये सबूत काफी हैं कि आगरा नकली दवा कारोबार का गढ़ बन चुका है।

नाम और बैच नंबर नकली प्रिंट कराते थे

अब तक की जांच में सामने आया है कि नकली दवाओं का कारोबार करने वाले नामी दवा कंपनियों का कुछ माल मंगाते हैं। इन कंपनियों की असली दवाओं के ब्रांड नेम और बैच नंबर को प्रिंट कराकर नकली दवाओं को खपाते थे। बैच नंबर और ब्रांड नेम की वजह से असली और नकली की पहचान मुश्किल हो जाती थी। यह पता भी न चल पाता, अगर इनकी नकली दवाएं आधी कीमत में बाजार में न बिक रही होतीं। आधी कीमत पर नकली दवाओं की उपलब्धता होने पर कंपनियों की असली दवाओं की बिक्री बहुत घट गई थी। इसके बाद ही सभी का माथा ठनका और रेकी कर सारे मामले का खुलासा किया गया।  

SP_Singh AURGURU Editor