जिस परिवार को सींचा, वही बना दुश्मन, भाजपा नेता आचार्य हरिओम पर जानलेवा हमला
आगरा। आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी के गंगा प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय सह-संयोजक और लोक आराधना न्यास के संस्थापक-अध्यक्ष आचार्य हरिओम गुप्ता (67) ने अपनी ही पत्नी और पुत्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस आयुक्त के आदेश से थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
आगरा। आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी के गंगा प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय सह-संयोजक और लोक आराधना न्यास के संस्थापक-अध्यक्ष आचार्य हरिओम गुप्ता (67) ने अपनी ही पत्नी और पुत्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस आयुक्त के आदेश से थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
आचार्य हरिओम गुप्ता ने बताया कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और हाल ही में हृदय रोग के कारण एंजियोप्लास्टी से गुजरे हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि गांधी नगर स्थित लोक आराधना न्यास के कार्यालय-भवन पर उनकी पत्नी सीमा और पुत्र मानस अवैध कब्जा करना चाहते हैं। इस पूरे षड्यंत्र में पत्नी के भाई पवन गुप्ता की भूमिका भी बताई गई है, जिनके निर्देश पर दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित के अनुसार, 19 नवंबर 2025 की रात करीब एक बजे पत्नी और पुत्र ने ट्रस्ट कार्यालय खाली करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उनके साथ लात-घूंसों, डंडों और लोहे की रॉड से बेरहमी से मारपीट की गई। शोर सुनकर चालक मौके पर पहुंचा, जिससे उनकी जान बच सकी, लेकिन उन्हें गंभीर चोटें आईं।
इतना ही नहीं, 22 नवंबर 2025 की दोपहर एक बार फिर उन पर हमला किया गया। किसी तरह जान बचाकर वे मौके से बाहर निकल पाए। आचार्य गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सितंबर माह में सीने में दर्द के दौरान भी उनके साथ मारपीट की गई थी, जो उनकी जान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी।
पीड़ित का कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। ट्रस्ट की संपत्ति अपने नाम न करने पर हत्या कर संपत्ति बेच देने तक की धमकी दी गई है। थाना हरीपर्वत पुलिस के अनुसार, मामला दर्ज कर लिया गया है और सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। वरिष्ठ नागरिक से जुड़े इस मामले ने न केवल समाजसेवी हलकों में चिंता बढ़ाई है, बल्कि पारिवारिक विवादों में कानून-व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।