समाज के भय, बदनामी की आशंका और दोस्त के साथ न मिलने की टीस ने 14 साल की किशोरी को मौत के मुंह में पहुंचा दिया
आगरा। एत्मादपुर थाना क्षेत्र के नगला नथोली गांव की 14 वर्षीय किशोरी लक्ष्मी मौत की गुत्थी सुलझ गई है। संकट काल में डर और दोस्त के साथ की ना उसे मौत के मुहाने तक ले गई। पुलिस ने खुलासा किया है कि चचेरी बहन की शादी के दौरान लापता हुई किशोरी ने अपमान और सामाजिक भय से टूटकर यमुना नदी में कूदकर आत्महत्या की थी। जांच में सामने आया कि वह सिर्फ इतना चाहती थी कि उसका किशोर दोस्त उसके साथ घर चलकर परिजनों के सामने सच्चाई बता दे, लेकिन कच्ची उम्र के डर में जकड़े उसके दोस्त ने ना कहा तो किशोरी ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
10 फरवरी को नगला नथोली गांव में एक परिवार में शादी थी। इसी परिवार की 14 वर्षीय किशोरी अपनी भाभी का मोबाइल लेकर सोने के लिए जाने की बात कहकर निकली, लेकिन देर रात तक नहीं लौटी। परिजनों ने खोजबीन की और अगले दिन एत्मादपुर थाना में गुमशुदगी दर्ज कराई।
घटना के तीसरे दिन रात को किशोरी का शव यमुना किनारे मिला। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया, जिसमें मौत की वजह पानी में डूबने से आई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या का आरोप लगाया तो पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ाकर जांच शुरू की।
एत्मादपुर थाने के इंस्पेक्टर आलोक सिंह के मुताबिक, जांच में सामने आया कि किशोरी की गांव के ही 16 वर्षीय किशोर से दोस्ती थी। शादी की रात वह उसी से मिलने गई थी। उस वक्त भावेश के साथ उसका 19 वर्षीय साथी विजय भी मौजूद था। तभी कुछ ग्रामीणों ने तीनों को साथ देख लिया। यह देखकर किशोरी घबरा गई। उसने दोनों लड़कों से कहा कि वे उसके साथ घर चलें और परिजनों को सारी बात बता दें क्योंकि गांव में बात फैलने पर उसके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
लेकिन दोनों लड़के खुद भी डर गए और किशोरी के साथ चलने से मना कर दिया। इसके बाद किशोरी इनर रिंग रोड पर चढ़ गई। उसने किसी वाहन के सामने आकर आत्महत्या करने की सोची। आरोप है कि इसके बावजूद दोनों लड़के उसे वहीं छोड़कर चले गए। इससे किशोरी बुरी तरह टूट गई। उसके अंदर अंतर्द्वंद्व चल रहा था कि परिवार को कैसे फेस करेगी। अंततः वह यमुना में कूद गई।
पुलिस को जांच के दौरान फोन से मैसेज भी मिले, जो दोस्ती और उस रात की बातचीत की पुष्टि करते हैं। पुलिस ने घटना को छुपाने और मदद न करने के आरोप में नाबालिग किशोर और उसके साथी विजय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। किशोर को बाल सुधार गृह और विजय को जेल भेज दिया गया।
यह घटना किसी साजिश से ज्यादा किशोरवय की कच्ची समझ और सामाजिक डर का नतीजा है। एक लड़की सिर्फ भरोसा और साथ चाहती थी कि उसका दोस्त उसके साथ खड़ा होकर घरवालों के सामने जाकर उसे मुसीबत से बचा ले, लेकिन दोस्त की ना से डर, बदनामी का भय और गलत फैसला उसकी जिंदगी निगल गया।