शीतलहर से जंग: हाथी–भालुओं के लिए हीटर, कंबल और खास आहार, वाइल्डलाइफ एसओएस की चौकस पहल

आगरा/मथुरा। पूरे उत्तरी भारत में कड़ाके की सर्दी के बीच, वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाए गए हाथियों और स्लॉथ भालुओं को शीतलहर के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए व्यापक और वैज्ञानिक शीतकालीन देखभाल व्यवस्था लागू कर दी है। आगरा स्थित भालू संरक्षण केंद्र और मथुरा के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में मौसमी देखभाल प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए हैं, ताकि उम्रदराज़, बीमार और विशेष ज़रूरतों वाले जानवरों को गर्म, पोषित और सुरक्षित रखा जा सके।

Jan 9, 2026 - 13:46
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शीतलहर से जंग: हाथी–भालुओं के लिए हीटर, कंबल और खास आहार, वाइल्डलाइफ एसओएस की चौकस पहल
वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी और भालू संरक्षण केंद्रों पर जानवरों को ठंड से बचाने के लिए किये गये उपाय।

हाथियों के लिए खास शीतकालीन प्रबंधन

हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में मौजूद कई हाथी वृद्ध हैं या पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे हाथियों को ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़ों में हैलोजन लैंप लगाए गए हैं और तिरपाल की चादरों से घेराबंदी की गई है, जिससे ठंडी हवाओं को रोका जा सके।
विशेष रूप से बुजुर्ग हाथियों के लिए कस्टम-मेड कंबल तैयार कराए गए हैं। उनकी रोज़मर्रा की देखभाल में तेल मालिश को शामिल किया गया है, जिससे रक्त संचार बेहतर हो और ठंड से होने वाली अकड़न में राहत मिले।

सर्दियों को ध्यान में रखते हुए हाथियों के आहार में भी बदलाव किया गया है। उनके भोजन में लौंग, हल्दी, अदरक, लहसुन, काला नमक, अजवाइन और हींग जैसे गर्म मसालों का मिश्रण शामिल किया गया है, जिसे गुड़ और घी के साथ परोसा जाता है। इसके साथ ही, उनकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पौष्टिक मौसमी चारा भी दिया जा रहा है।

भालुओं के लिए गर्माहट और पोषण का संतुलन

आगरा भालू संरक्षण केंद्र में सर्दियों के दौरान भालुओं को बाजरा और रागी से बना गर्म दलिया खिलाया जा रहा है, जिसमें गुड़ और उबले अंडे मिलाए जाते हैं। इसके अलावा मुरमुरे, गुड़ और मूंगफली से बनी विशेष ट्रीट दी जाती हैं, जिससे भालुओं में प्राकृतिक भोजन खोजने की प्रवृत्ति बनी रहे और वे मानसिक रूप से सक्रिय रहें।

भालुओं के आराम के लिए उनके मांदों, गड्ढों और बाड़ों में धान का भूसा और सूखी घास बिछाई गई है। बुजुर्ग और गठिया से पीड़ित भालुओं के लिए अतिरिक्त हीटर लगाए गए हैं, जबकि ठंडी हवाओं से बचाव के लिए बाड़ों को तिरपाल से ढका गया है। धूप वाले दिनों में भालू झूलों या गड्ढों में धूप सेंकते नजर आते हैं, जहां उन्हें गर्माहट के साथ मुलायम बिस्तर भी मिलता है।

वाइल्डलाइफ एसओएस का पक्ष

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हमारे केंद्रों में सर्दियों की देखभाल केवल आश्रय तक सीमित नहीं है। हमारा फोकस जानवरों को ठंड से होने वाले तनाव से मुक्त रखना, उन्हें पर्याप्त गर्मी, संतुलित पोषण और बेहतर रक्त संचार उपलब्ध कराना है।

संस्था के पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. एस. इलयाराजा ने बताया
कि हाथियों के आहार में शामिल गर्म मसाले सर्दियों में पाचन, रक्त संचार और शरीर की गर्मी बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं भालुओं के लिए तैयार पौष्टिक दलिया और मौसमी आहार उन्हें ठंड के महीनों में स्वस्थ और ऊर्जावान रखता है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा, सर्दियों का मौसम अतिरिक्त चुनौतियां लेकर आता है। हमारी टीमें यह सुनिश्चित करती हैं कि बचाया गया हर जानवर इस दौरान सुरक्षित, गर्म और आरामदायक रहे।

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SP_Singh AURGURU Editor