आईवीआरआई बरेली में ‘मीट प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
तेजी से बढ़ती मांस एवं पोल्ट्री उत्पादों की मांग के बीच स्वरोज़गार और आय वृद्धि की नई संभावनाओं को रेखांकित करते हुए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली में ‘मांस प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ विषय पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। यह कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम पहल है।
-रमेश कुमार सिंह-
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए. के. विश्वास ने कहा कि प्रसंस्कृत मांस उत्पादों, विशेषकर पोल्ट्री उत्पादों की मांग देश और विदेश दोनों स्तरों पर लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसमें और तेज़ी आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि मांस उद्योग केवल मांस विक्रय तक सीमित नहीं है, बल्कि कटिंग-डिबोनिंग, मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण, उप-उत्पादों का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन जैसे अनेक आयामों से जुड़ा है। इन क्षेत्रों में लघु स्तर पर उद्यम स्थापित कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
डॊ. विश्वास आईवीआरआई में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। आईसीएआर–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के संयुक्त निदेशालय (प्रसार शिक्षा) तथा पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत ‘मांस प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ विषय पर इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समुदाय के 25 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम निदेशक डॉ. ए. आर. सेन ने स्वच्छ मांस उत्पादन, मूल्य संवर्धन, उप-उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग और आधुनिक पैकेजिंग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि देश में उत्पादित मांस का बहुत ही कम हिस्सा प्रसंस्कृत उत्पादों में परिवर्तित हो पाता है, जबकि इस क्षेत्र में लघु एवं सूक्ष्म स्तर पर लाभकारी उद्यमों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि किसान, उद्यमी और युवा आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो यह क्षेत्र स्थायी आय और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता कर अधिकतम व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सागर चंद ने प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक मांस उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और उप-उत्पादों के उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्वच्छ मांस उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, चिलिंग, फ्रीजिंग तथा विभिन्न मूल्य संवर्धित मांस उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमन तालुकदार, वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा किया गया, जबकि समापन अवसर पर डॉ. देवेंद्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।