एडीए में फर्जी हैसियत प्रमाण पत्र का खेल, एएस इंटरप्राइजेज पर अब दर्ज होगा मुकदमा
आगरा विकास प्राधिकरण में फर्जी हैसियत प्रमाण पत्र लगाने का मामला सामने आया है। मैसर्स एएस इंटरप्राइजेज के प्रमाण पत्र के ऑनलाइन सत्यापन में जारी करने की तारीख और धनराशि में हेरफेर पकड़ी गई। इसके बाद एडीए ने फर्म को तीन साल के लिए डिबार कर दिया है। अब प्राधिकरण फर्म के खिलाफ थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। मामले के बाद कई अन्य संदिग्ध फर्मों की फाइलें भी जांच के दायरे में आ गई हैं। गड़बड़ी मिलने पर डिबार करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ऑनलाइन सत्यापन में खुली फर्जीवाड़े की पोल, प्रमाण पत्र की तारीख और धनराशि में की गई थी छेड़छाड़, पहले ही तीन साल के लिए डिबार हुई फर्म
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में फर्जी दस्तावेज लगाकर काम हासिल करने के प्रयास का मामला सामने आने के बाद अब संबंधित फर्म के खिलाफ मुकदमे की तैयारी शुरू हो गई है। मैसर्स एएस इंटरप्राइजेज की ओर से एडीए में लगाए गए हैसियत प्रमाण पत्र के ऑनलाइन सत्यापन के दौरान दस्तावेज में हेरफेर पकड़ी गई। जांच में प्रमाण पत्र की जारी करने की तारीख और धनराशि में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद एडीए ने फर्म को गंभीर अनियमितता का दोषी मानते हुए तीन साल के लिए डिबार कर दिया है। अब प्राधिकरण की ओर से संबंधित थाने में तहरीर देकर फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
ऑनलाइन सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
बताया जा रहा है कि एडीए में किसी कार्य या प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों के साथ मैसर्स एएस इंटरप्राइजेज की ओर से हैसियत प्रमाण पत्र लगाया गया था। दस्तावेज की जांच के दौरान एडीए ने प्रमाण पत्र का ऑनलाइन सत्यापन कराया। ऑनलाइन रिकॉर्ड से प्रमाण पत्र का मिलान किए जाने पर उसमें अंतर सामने आया। जांच में पता चला कि प्रमाण पत्र में दर्ज जारी करने की तारीख और धनराशि से छेड़छाड़ की गई थी। यानी मूल प्रमाण पत्र और एडीए में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज में महत्वपूर्ण जानकारियां अलग थीं। इसके बाद प्राधिकरण के स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
तीन साल के लिए डिबार हुई फर्म
दस्तावेज में हेरफेर का मामला सामने आने के बाद एडीए ने मैसर्स एएस इंटरप्राइजेज को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया है। इसका सीधा असर यह होगा कि निर्धारित अवधि में फर्म एडीए से संबंधित निविदाओं और कार्यों की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेगी। प्राधिकरण की कार्रवाई से यह भी साफ है कि फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश को अब गंभीर अनियमितता माना जा रहा है।
अब थाने में दी जाएगी तहरीर
डिबार करने की कार्रवाई के बाद मामला यहीं खत्म नहीं होगा। एडीए अब संबंधित फर्म के खिलाफ थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। तहरीर के आधार पर पुलिस दस्तावेज में हेरफेर और फर्जी प्रमाण पत्र के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। पुलिस जांच में यह भी सामने आ सकता है कि प्रमाण पत्र में बदलाव किस स्तर पर और किस उद्देश्य से किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने या उसे एडीए में प्रस्तुत करने में फर्म के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
कई संदिग्ध फर्मों की फाइलें भी जांच के घेरे में
एएस इंटरप्राइजेज के मामले में गड़बड़ी सामने आने के बाद एडीए ने अन्य फर्मों से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। कई संदिग्ध फर्मों की फाइलें जांच के दायरे में आने की जानकारी है। प्राधिकरण अब उन दस्तावेजों का सत्यापन कराने की तैयारी में है, जिनके आधार पर संबंधित फर्मों ने एडीए की प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया है। खासतौर पर हैसियत प्रमाण पत्र समेत ऐसे दस्तावेजों की जांच की जा सकती है, जिनमें फर्जीवाड़े की आशंका हो।
एक फर्जी प्रमाण पत्र ने बढ़ाई कई फर्मों की मुश्किलें
एएस इंटरप्राइजेज के दस्तावेज में हेरफेर सामने आने के बाद अब एडीए की निगाह उन फर्मों पर भी है, जिनके दस्तावेजों की सत्यता को लेकर सवाल उठे हैं। यदि जांच में किसी अन्य फर्म के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी मिलती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण की ओर से डिबार करने के साथ मुकदमे की कार्रवाई किए जाने की नीति अपनाए जाने के संकेत हैं। इससे एडीए की निविदा और ठेका प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने का प्रयास माना जा रहा है।
सत्यापन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद एडीए में जमा होने वाले दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। ऑनलाइन सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़ा पकड़ में आने से यह स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच किए बिना उन्हें स्वीकार करना प्राधिकरण के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अब अन्य फर्मों की फाइलों की जांच के दौरान भी दस्तावेजों का संबंधित विभागों और ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान कराया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कहीं किसी अन्य फर्म ने भी प्रमाण पत्रों में बदलाव कर उन्हें प्राधिकरण में तो प्रस्तुत नहीं किया है।