सनफार्मा के नाम पर जहर बेच रहा था गिरोह, आगरा में नकली एंटीबायोटिक दवा का बड़ा खुलासा

आगरा में नकली दवाओं के कारोबार की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। औषधि विभाग को हे मां मेडिको से ली गई एंटीबायोटिक दवा मॉक्स सीवी-625 एमजी की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो अधोमानक (सबस्टैंडर्ड) पाई गई है। यह दवा नामी कंपनी सनफार्मा के नाम से बाजार में बेची जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, दवा में आवश्यक तत्वों की कमी है, जिससे उसका असर देर से होता है और स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

Oct 5, 2025 - 13:15
 0
सनफार्मा के नाम पर जहर बेच रहा था गिरोह, आगरा में नकली एंटीबायोटिक दवा का बड़ा खुलासा
इमेज फोटो

आगरा। आगरा में नकली दवाओं के कारोबार की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। औषधि विभाग को हे मां मेडिको से ली गई एंटीबायोटिक दवा मॉक्स सीवी-625 एमजी की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो अधोमानक (सबस्टैंडर्ड) पाई गई है। यह दवा नामी कंपनी सनफार्मा के नाम से बाजार में बेची जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, दवा में आवश्यक तत्वों की कमी है, जिससे उसका असर देर से होता है और स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

24 दवाओं के नमूने भेजे गए थे जांच के लिए

सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि 22 अगस्त को औषधि विभाग ने हे मां मेडिको, बंसल मेडिकल एजेंसी, एमएसवी मेडिप्वाइंट, ताज मेडिको और राधे मेडिको से कुल 24 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे थे।
इनमें से हे मां मेडिको के 14 नमूने शामिल थे। अब तक केवल एक दवा मॉक्स सीवी-625 एमजी की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जो अधोमानक पाई गई है। शेष 23 नमूनों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है।

71 करोड़ की नकली दवाएं सीज

22 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई में औषधि विभाग ने पांचों फर्मों के गोदामों से करीब ₹71 करोड़ रुपये की दवाएं सीज की थीं। ये दवाएं नामी कंपनियों के नाम पर नकली तरीके से बाजार में बेची जा रही थीं। जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्मों का नेटवर्क लखनऊ, बरेली, मुजफ्फरनगर, पुडुचेरी और अलीगढ़ तक फैला हुआ था।

हे मां मेडिको का मालिक पहले से जेल में

हे मां मेडिको के मालिक हिमांशु अग्रवाल पहले ही ₹1 करोड़ की रिश्वत की पेशकश करते हुए रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। उनके खिलाफ नकली दवा कारोबार से जुड़ा मामला चल रहा है और ₹71 करोड़ से अधिक की दवाएं सीज हो चुकी हैं।
अब दवा की रिपोर्ट में घटिया गुणवत्ता सामने आने से उनके खिलाफ मामला और मजबूत हो गया है।

घटिया दवा रिपोर्ट से केस हुआ और गंभीर

औषधि विभाग की रिपोर्ट ने हिमांशु अग्रवाल के खिलाफ चल रहे केस को कई स्तरों पर मजबूत किया है। सहायक आयुक्त के अनुसार, भले ही दवा अधोमानक पाई गई हो, लेकिन कानूनन इसे नकली दवा माना जाएगा। यह मामला बीएनएस और ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट की गंभीर धाराओं के तहत आता है।

उनके अनुसार पहले ही नमूने का अधोमानक निकलना यह साबित करता है कि यह केवल गुणवत्ता नियंत्रण की चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नकली दवा कारोबार था। उन्होंने बताया यदि शेष नमूनों की रिपोर्ट में भी अधोमानक या नकली दवाएं पाई गईं, तो केस की गंभीरता बढ़ेगी। इससे जमानत की संभावना घटेगी और दोषी पाए जाने पर सज़ा की अवधि भी बढ़ सकती है।

अधोमानक दवा भी मानी जाएगी नकली

सहायक आयुक्त औषध बस्ती मंडल नरेश मोहन दीपक ने बताया कि भले ही दवा अधोमानक हो, लेकिन कानूनी दृष्टि से इसे नकली दवा की श्रेणी में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि नामी कंपनियां अपनी दवाओं पर क्लीनिकल ट्रायल और फॉर्मुलेशन टेस्टिंग करती हैं, जबकि नकली कंपनियां ऐसा नहीं करतीं। इसी कारण, घटिया गुणवत्ता वाली दवा को भी नकली मानकर मामला दर्ज किया जाएगा।