मथुरा-काशी दे दो, दही-बूरा खिला देंगे, आगरा से देवकीनंदन ठाकुर का आक्रामक एलान

आगरा के विराट हिंदू सम्मेलन में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने मथुरा-काशी, कृष्ण जन्मभूमि, ताजमहल और जामा मस्जिद जैसे मुद्दों पर आक्रामक बयान दिए। शंकराचार्य प्रकरण पर उन्होंने धर्मसंकट बताते हुए संतों से मारपीट को गलत कहा, वहीं प्रशासन से भगवाधारी संतों के सम्मान की मांग की। जनसंख्या, कश्मीर और मंदिर आंदोलन को लेकर उनके तीखे वक्तव्यों से सियासी-धार्मिक माहौल और गरमा गया।

Jan 22, 2026 - 20:56
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मथुरा-काशी दे दो, दही-बूरा खिला देंगे, आगरा से देवकीनंदन ठाकुर का आक्रामक एलान
पहलगांव आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम की पत्नी को सम्मानित करते अतिथि। को

विराट हिंदू सम्मेलन में तीखे तेवर, समुदाय विशेष पर सीधा हमला

आगरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में हो रहे हिंदू सम्मेलनों की कड़ी में आगरा के जीआईसी मैदान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने बेहद आक्रामक और बेबाक भाषण दिया। मंच से उन्होंने मथुरा-काशी, कृष्ण जन्मभूमि, ताजमहल, जामा मस्जिद और हिंदुओं की जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों को एक साथ उठाकर सियासी-धार्मिक माहौल गरमा दिया।

मथुरा-काशी पर खुली चुनौती

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि लोग कहेंगे मैं हिंदू-मुस्लिम कर रहा हूं, लेकिन मैं सौगंध खाता हूं, मथुरा और काशी हमें दे दो, हम तुम्हें दही और बूरा खिलाएंगे। ब्रज में दही-बूरे के बिना दावत अधूरी है। उन्होंने दावा किया कि वे भाईचारे के लिए “दो कदम हम, दो कदम तुम” चलने को तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अब बहुत सह लिया, अब नहीं सहेंगे, हिंदू अपना हक लेकर रहेंगे।

शंकराचार्य प्रकरण पर ‘धर्मसंकट’, फिर भी संदेश साफ

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शंकराचार्य से जुड़ी घटना पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए धर्मसंकट का विषय है। एक तरफ शंकराचार्य जैसे भगवान स्वरूप संत हैं, दूसरी तरफ स्नानार्थियों की चिंता करने वाले लोग। फिर भी इतना कहूंगा कि संतों के साथ मारपीट ठीक नहीं। ऐसी स्थिति को बढ़ाना नहीं चाहिए, मिल-बैठकर सुलझाना चाहिए।

प्रशासन पर तंज

कथावाचक ने प्रशासन को संदेश देते हुए कहा कि जिसके माथे पर तिलक, सिर पर शिखा और शरीर पर भगवा हो, उसके साथ आदर से पेश आना चाहिए। मारपीट से समस्याएं हल नहीं होतीं।

ताजमहल पर सीधा वार

आगरा की पहचान पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आगरा की पहचान ताजमहल से क्यों? क्या यहां यमुना नहीं, मंदिर नहीं? क्या हम किसी की कब्र देखने के लिए इतने फ्री हैं? जिसे शौक हो, वह जाए, आई डोंट केयर।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे ताजमहल से पहले कृष्ण जन्मभूमि देखना चाहते हैं और वहां ठाकुरजी का भव्य मंदिर चाहते हैं।

जनसंख्या का मुद्दा और कश्मीर का संदर्भ

देवकीनंदन ठाकुर ने हिंदुओं से जनसंख्या बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि अगर कश्मीर में हिंदुओं की संख्या ज्यादा होती तो हालात अलग होते। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी का संदर्भ देते हुए कहा कि संख्या का संतुलन सुरक्षा से जुड़ा है।

जामा मस्जिद-केशवदेव दावा

अपने भाषण के सबसे तीखे हिस्से में उन्होंने दावा किया कि आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में केशवदेव की मूर्ति दबाई गई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हिंदू यह अपमान सहते रहें या ठाकुरजी को सम्मानपूर्वक निकालकर मथुरा में सही स्थान पर स्थापित कर अयोध्या की तरह भव्य-दिव्य मंदिर बनवाएं।