42501 रुपये में खड़े हुए और 203 वर्षों से राष्ट्र को गढ़ रहे आगरा कॉलेज की गौरवगाथा अब बड़े पर्दे पर, इतिहास, विरासत और महान हस्तियों की कहानी बनेगी जन-जन की प्रेरणा

आगरा। महज 42501 रुपए, 15 आना और पांच पैसे की लागत से वर्ष 1823 में स्थापित आगरा कॉलेज का 203 वर्षों का गौरवशाली इतिहास अब बड़े पर्दे पर जीवंत होने जा रहा है। आरए मूवीज के बैनर तले बन रही एक घंटे की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘यह है आगरा कॉलेज’ न सिर्फ इस ऐतिहासिक संस्थान की जड़ों को उजागर करेगी, बल्कि उन महान हस्तियों की कहानी भी सामने लाएगी जिन्होंने यहां से शिक्षा लेकर देश-दुनिया में पहचान बनाई। सोमवार को कॉलेज परिसर में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विधिवत पूजन और क्लैप के साथ फिल्म का भव्य मुहूर्त किया।

Apr 13, 2026 - 17:19
Apr 13, 2026 - 18:03
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42501 रुपये में खड़े हुए और 203 वर्षों से राष्ट्र को गढ़ रहे आगरा कॉलेज की गौरवगाथा अब बड़े पर्दे पर, इतिहास, विरासत और महान हस्तियों की कहानी बनेगी जन-जन की प्रेरणा
आगरा कॊलेज पर बन रही फिल्म निर्माण का मुहूर्त शॊट देकर सोमवार को शुभारंभ करते यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, साथ हैं प्राचार्य प्रो. सीके गौतम और फिल्म निर्माता रंजीत सामा।

मुहूर्त के साथ गूंजा गौरव का गीत, विरासत को मिला नया मंच

गंगाधर शास्त्री भवन के समीप आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद गणेश पूजन, नारियल फोड़कर और कैमरे के सामने मुहूर्त शॉट देकर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने फिल्म का शुभारंभ किया। श्री उपाध्याय ने इस मौके पर कहा कि आगरा कालेज लगभग दो शताब्दियों से अधिक समय से राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला रहा है। जिसने भारत के बौद्धिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को दिशा दी। बताया कि वह खुद भी आगरा कालेज के छात्र रहे हैं।

इस दौरान रिलीज हुआ गीत- संस्थान नहीं है केवल ये, इतिहास की एक धरोहर है... ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया।

फिल्म के निर्माता रंजीत सामा और निर्देशक हेमंत वर्मा ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री में कॉलेज की स्थापना, ऐतिहासिक तथ्य, शिक्षण परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ाव और पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को विस्तार से दर्शाया जाएगा।

42501 रुपये में बना संस्थान, आज 18 हजार छात्रों का केंद्र

फिल्म में यह ऐतिहासिक तथ्य प्रमुखता से सामने आएगा कि 1823 में कॉलेज निर्माण पर 42501 रुपये 15 आना और पांच पैसे खर्च हुए थे।
1826 में जहां छात्रों की संख्या 117 थी, वहीं 1828 में यह बढ़कर 210 हो गई। आज यह संस्थान 18 हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहा है।

शुरुआत में भूगोल, खगोल, ज्योतिष और गणित जैसे विषयों से प्रारंभ हुआ यह कॉलेज आज आधुनिक शिक्षा और परंपरा का अद्भुत संगम बन चुका है। 1850 में लॉ फैकल्टी की शुरुआत हुई और 1855 में पहला ग्रेजुएट निकला।

ब्रिटिश काल में न्याय की लौ, 1857 में भी अहम भूमिका

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. शशिकांत पांडे ने बताया कि आगरा कॉलेज ने अंग्रेजों के शासनकाल में उत्तर भारत में शिक्षा की अलख जगाई और पीड़ितों को कानून की ताकत दी।
1857 की क्रांति के दौरान भी कॉलेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1880 में इसे बंद करने की साजिश हुई, लेकिन 1883 में ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टी’ बनाकर इसे बचा लिया गया।

प्राचार्य बोले- संस्थान नहीं, राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला

प्राचार्य प्रो. सी.के. गौतम ने कहा कि आगरा कॉलेज केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की जीवंत धरोहर है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की 25 बीघा भूमि को हाल ही में अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

कैसे मिली थी कॉलेज के लिए जमीन

आगरा। कालेज के प्राचार्य सीके गौतम ने बताया कि 1796 में ग्वालियर के राजा दौलतराम सिंधिया ने आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए बिहार के रहने वाले शिवभक्त व ग्वालियर राजघराने के कुलपुरोहित पं. गंगाधर शास्त्री को आगरा, चौमोहा और इगलास की तीन जागीरें दी थीं। 1813 में पंडित जी के निधन के बाद जमीन को लेकर वारिसों में विदाद हो गया। मामला अलीगढ़ कलेक्टर के पास पहुंचा, जिसमें जमीन का एक चौथाई भाग पंडित जी के वारिसों व तीन चौथाई भाग आमजन की भलाई के लिए निश्चित किया। इसी क्रम में 1823 में यहां आगरा कालेज की स्थापना की गई। हाल ही में प्राचार्य निवास के पास अतिक्रमण की गई कालेज की 25 बीघा जगह को कब्जे से मुक्त भी कराया गया है।

देश के दिग्गजों की कर्मभूमि रहा आगरा कॉलेज

इस संस्थान ने देश को अनेक महान हस्तियां दीं, जिनमें प्रमुख हैं- पंडित मोतीलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय, पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पंत, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, सिने अभिनेता एवं पूर्व सांसद राज बब्बर, सांसद राज कुमार चाहर और रामजी लाल सुमन, पूर्व हाईकमिश्नर कैप्टन भगवान सिंह, प्रतिष्ठित वकील सर तेज बहादुर सप्रू, संवतंत्रता सेनानी पं. केडी पालीवाल, पूर्व सांसद स्व. भगवान शंकर रावत आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

इसके अलावा साहित्य, पत्रकारिता के कई बड़े नाम इस संस्थान से निकले हैं। इनमें अचला नागर, हिन्दुस्तान के ग्रुप एडीटर शशि शेखर, उदयन शर्मा, राजेन्द्र सचदेवा, उद्योगपति पूरन डावर, किशोर खन्ना और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त पौनिया जैसे नाम शामिल हैं।

2–3 माह में तैयार होगी फिल्म, छह माह में रिलीज का लक्ष्य

निर्माताओं के अनुसार डॉक्यूमेंट्री का निर्माण कार्य 2–3 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा और छह महीने के भीतर इसे रिलीज करने की योजना है।

कार्यक्रम में प्रो. पी.वी. झा, प्रो. मृणाल शर्मा, प्रो. भूपेंद्र चिकारा, प्रो. वी.के. सिंह, प्रो. गौरव कौशिक, प्रो. रीता निगम, प्रो. डी.सी. मिश्रा, प्रो. एम.ए. खान, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. डी.पी. सिंह, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, प्रो. सुनीता गुप्ता, प्रो. कल्पना चतुर्वेदी, प्रो. संचिता सिंह सहित अनेक शिक्षक व गणमान्यजन मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor