कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष ही आर्य जीवन का लक्ष्य, सामाजिक जागरण का सशक्त आंदोलन है आर्य समाज, पांच सूत्रीय मांगों के साथ संपन्न हुआ तीन दिवसीय आर्य महासम्मेलन
आगरा। आर्य समाज केवल एक धार्मिक संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जागरण का सशक्त आंदोलन है। सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, सेवा और परोपकार ही आर्य जीवन की मूल पहचान है। समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, नशाखोरी, अंधविश्वास और दिखावे जैसी कुरीतियाँ समाज को भीतर से खोखला कर रही हैं, जिनके विरुद्ध आर्य समाज निरंतर संघर्ष करता आया है और आगे भी करता रहेगा।
ये विचार कमला नगर स्थित जनक पार्क में आर्य केंद्रीय सभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आर्य महासम्मेलन के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता वेद मंदिर मथुरा के अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश ने व्यक्त किए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे वेदाध्ययन, स्वाध्याय, योग और चरित्र निर्माण को जीवन का लक्ष्य बनाएं तथा संगठनात्मक सुधार पर विशेष ध्यान दें।
सम्मेलन में वक्ता स्वामी विश्वानंद ने कहा कि समाज का नैतिक पतन वेद मार्ग से विमुख होने का परिणाम है। युवा वर्ग को नशा, हिंसा और दिखावे से दूर रहकर संयमित, सादगीपूर्ण और चरित्रवान जीवन अपनाना चाहिए। सत्य, सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति ही सच्चे आर्य जीवन के आधार हैं।
कन्या गुरुकुल सासनी की अधिष्ठाता आचार्या पवित्रा ने कहा कि वेदों में नारी को समान अधिकार और सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है। दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयां मानवता पर कलंक हैं, जिनका समूल नाश अत्यंत आवश्यक है। आर्य समाज इन कुरीतियों के विरुद्ध सतत जनजागरण करता आ रहा है।
वक्ता आचार्य विष्णुमित्र वेदारथी ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार अनिवार्य हैं। बिना संस्कार की शिक्षा समाज को सही दिशा नहीं दे सकती। सत्य, सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति ही आर्य जीवन की आत्मा है।
सम्मेलन के प्रधान सीए मनोज खुराना ने बताया कि तीन दिवसीय महासम्मेलन में अजमेर, देहरादून, प्रयागराज, चंडीगढ़ और आगरा मंडल सहित देशभर से पांच हजार से अधिक आर्यजनों ने सहभागिता की। इस अवसर पर अरविंद मेहता की पुस्तक- जीव-ईश्वर-प्रकृति एवं ईश्वर अग्रवाल की- वेद पीयूष का विद्वानों द्वारा विमोचन किया गया।
महासम्मेलन में विद्वानों ने सरकार से जातिवाद समाप्त करने, नशा मुक्ति, अंधविश्वास उन्मूलन, गौ हत्या पर प्रभावी रोक तथा समान शिक्षा कानून लागू करने की पांच सूत्रीय मांगें उठाईं।
इन्हें मिला ‘आर्य सम्मान’
आर्य समाज के लिए विशेष योगदान देने पर देव सरन, सुधीर गुप्ता, सचिन मल्होत्रा, राजेंद्र मल्होत्रा, अमित आर्य, ऋषिमोहन ठाकुर, नमिता शर्मा, जगवीर सिंह तोमर, अरुण सक्सेना, ऋषि गुप्ता, राजपाल सिंह आर्य एवं देवपाल शास्त्री को ‘आर्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक प्रदीप कुलश्रेष्ठ ने बताया कि सम्मेलन की शुरुआत प्रतिदिन प्रातः योग, प्राणायाम, यज्ञ एवं ध्यान साधना से हुई। भजनोपदेशक पंडित कुलदीप आर्य ने महर्षि दयानंद, आर्य समाज और वैदिक धर्म पर आधारित भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन आर्य अश्वनी ने किया।
इस अवसर पर मंत्री वीरेंद्र कनवर, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, उमेश पाठक, डॉ. अनुपम गुप्ता, विजयपाल सिंह चौहान, अनुज आर्य, विकास आर्य, भारत भूषण शर्मा, प्रेम वर्मा, प्रेमा कनवर, सुमन कुलश्रेष्ठ, वंदना आर्य सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।