अलविदा अजित दादा! अपार भीड़ ने अपने प्रिय नेता को दी अंतिम विदाई, आंसुओं के सैलाब में डूबा दिखा बारामती, अमित शाह, गडकरी, भाजपा अध्यक्ष, फड़णवीस, उद्धव समेत तमाम दिग्गज नेता अंतिम यात्रा में शामिल हुए

Jan 29, 2026 - 13:44
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अलविदा अजित दादा! अपार भीड़ ने अपने प्रिय नेता को दी अंतिम विदाई, आंसुओं के सैलाब में डूबा दिखा बारामती, अमित शाह, गडकरी, भाजपा अध्यक्ष, फड़णवीस, उद्धव समेत तमाम दिग्गज नेता अंतिम यात्रा में शामिल हुए

बारामती। महाराष्ट्र के बारामती की सुबह आज कुछ ज़्यादा ही भारी थी। केटवाड़ी फार्म के बाहर खड़े पेड़ तक मानो सिर झुकाए खामोश थे। जैसे ही एनसीपी चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की अंतिम यात्रा आगे बढ़ी, हवा में एक साथ सिसकियां और नारे गूंजे- अजित दादा अमर रहें। फूलों से सजे ट्रक पर रखा पार्थिव शरीर, और उसके पीछे कंधे से कंधा मिलाए चलता जनसैलाब, यह सिर्फ़ अंतिम यात्रा नहीं, यह एक युग को विदा करने का दृश्य था। अजित पवार आज बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में पंचत्तव में विलीन हो गये। अंतिम संस्कार के समय माहौल गमगीन दिखा।

अपने पसंदीदा नेता को अपार भीड़ ने दी अंतिम विदाई

आज सुबह बारामती के केटवाड़ी गांव स्थित निवास से अजित पवार की अंतिम यात्रा शुरू हुई। अजित पवार का पार्थिव शव जिस ट्रक में रखा हुआ था, उसे पर आगे उनका बड़ा सा चित्र लगा हुआ था। कुछ ही मिनटों में सड़कें भर गईं। लोग पैदल दौड़ते हुए साथ हो लिए। किसी की आंखों में पानी था तो किसी के होंठों पर दुआ। भीड़ इतनी उमड़ी कि हर ओर सिर ही सिर नजर आ रहे थे। शवयात्रा सीधे विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड पहुंची। रास्ते भर घरों की छतों, दुकानों के बाह और सड़क के दोनों ओर खड़ी भीड़ अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दे रही। अजित दादा के शोक में बारामती के सारे बाजार बंद रहे। अजित दादा की अंतिम यात्रा में उन्हें विदाई देने जुटे लोगों की भीड़ ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये। विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड पर अपार भीड़ मौजूद थी।

विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड: जहां सन्नाटा भी बोल उठा

संस्कार स्थल पर चंदन की चिता सजी। राजकीय सम्मान की सलामी गूंजी तो भीड़ एक क्षण को ठिठक गई। फिर वही नारे, वही आंसू। राष्ट्रीय ध्वज बेटे पार्थ पवार और जय पवार को सौंपा गया। जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, धुएं की लकीरें आसमान की ओर उठीं, ऐसा लगा मानो बारामती की हर गली अपनी बात ऊपर पहुंचा रही हो।

जुटे जनसैलाब ने बताया कि दादा कितने अपने थे

पुन्यश्लोक अहिल्याबाई चौक से लेकर संस्कार स्थल तक लोग रुक-रुक कर माथा टेकते दिखे। बच्चे कंधों पर चढ़े नारे लगाते रहे, बुजुर्ग हाथ जोड़कर खड़े रहे, महिलाएं सिसकती रहीं। यह भीड़ सिर्फ़ संख्या नहीं थी, यह भरोसे, पहचान और अपनत्व की गवाही थी। दादा की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यही जनसैलाब बना।

नेताओं की मौजूदगी: राजनीति से ऊपर श्रद्धा

अंतिम संस्कार के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, और प्रमोद सावंत समेत कई वरिष्ठ नेता मौन श्रद्धा में खड़े दिखे। सिर झुके हुए थे और आंखें नम। इस माहौल ने राजनीति की रेखाएं धुंधली कर दीं।

परिवार का दर्द, बहन का सहारा

पति की चिता के पास सुनेत्रा पवार का धैर्य टूटता दिखा। उसी क्षण सुप्रिया सुले आगे बढ़ीं और कंधा थामकर सीने से लगाए ढाल बनकर खड़ी रहीं। मतभेदों की दीवारें उस पल कहीं नहीं थीं। पुत्रों पार्थ और जय तथा भतीजों राहित, योगेंद्र की आंखें बार-बार भर आतीं, और सुप्रिया हर बार उन्हें संभालती रहीं। बहन का यह साहस, यह मौन ताक़त, पूरे परिवार के लिए संबल बन गई।

एक विदाई, जो यादों में जीवित रहेगी

जब धुआं हल्का पड़ा और भीड़ धीरे-धीरे छंटी, तब भी हवा में एक बात तैरती रही, दादा लोगों के थे, और लोग दादा के। बारामती ने अपने बेटे को नहीं, अपनी आवाज़ को विदा किया।

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SP_Singh AURGURU Editor