खसरा टीकाकरण में ढिलाई पर शासन सख्त, आगरा–अलीगढ़ मंडल को 10 दिन का अल्टीमेटम
आगरा में आयोजित आगरा–अलीगढ़ मंडल की स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में खसरा टीकाकरण में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई गई। फिरोजाबाद को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई। टीकाकरण सुधार के लिए 10 दिन और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए 1 माह की समय-सीमा तय की गई। सिटीजन चार्टर, स्टाफ रेशनलाइजेशन, स्वच्छता और अस्पताल सुविधाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए गए, अनुपालन न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखी गई, मंडलीय समीक्षा में अधिकारियों की क्लास
फिरोजाबाद बना चिंता का केंद्र, खसरा मामलों पर मिशन निदेशक की कड़ी फटकार
आगरा। आगरा एवं अलीगढ़ मंडल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। अपर मुख्य सचिव आमित कुमार घोष और डा. पिंकी जोवल, आईएएस, मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की अध्यक्षता में मंडलायुक्त सभागार, आगरा में दोनों मंडलों की विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अमित कुमार घोष, आईएएस, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा श्रीमती रितु माहेश्वरी, सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वर्चुअल रूप से शामिल रहीं।
समीक्षा के दौरान डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि आगरा व अलीगढ़ मंडल में खसरा के 1174 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि वर्ष की अंतिम तिमाही में अधिकांश जनपदों में सुधार देखने को मिला है, लेकिन फिरोजाबाद जनपद में स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं पाई गई। 60 से 70 प्रतिशत मामलों में बच्चों को खसरे की वैक्सीन नहीं लगी है। मिशन निदेशक ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एएनएम स्तर तक व्यक्तिगत मॉनिटरिंग और समय पर केस पहचान और इलाज के निर्देश दिए।
टीकाकरण को 10 दिन, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को 1 माह की मोहलत
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने विशेष रूप से विकसित चेकलिस्ट और डैशबोर्ड के आधार पर समीक्षा करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने निर्देश दिए कि टीकाकरण अभियान में 10 दिन के भीतर अपेक्षित प्रगति दिखनी चाहिए। अपर मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 1 माह का समय दिया। साथ ही शीघ्र अनुपालन समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
सिटीजन चार्टर, सुझाव पेटिका न होने पर सख्ती
डॉ. पिंकी जोवल ने सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सिटीजन चार्टर, शिकायत/सुझाव पेटिका, पेशेंट वेटिंग एरिया, स्वच्छ पेयजल, महिला–पुरुष के अलग शौचालय, सिक्योरिटी गार्ड, हेल्थ एटीएम, एक्सरे, आईसीयू, पीडियाट्रिक ओपीडी, फायर सेफ्टी मानकों की स्थिति की समीक्षा की।
एटा, मैनपुरी, मथुरा और हाथरस में व्यवस्थाएं संतोषजनक न मिलने पर उन्होंने 24 घंटे में कार्य पूर्ण कर फोटो भेजने के निर्देश दिए। अनुपालन न होने पर प्रतिकूल प्रविष्टि और वेतन आहरण रोकने की चेतावनी भी दी।
डॉक्टर–स्टाफ का रेशनलाइजेशन, 15 दिन में एसओपी
समीक्षा में सामने आया कि कुछ स्वास्थ्य इकाइयों में जरूरत से ज्यादा स्टाफ है। कहीं फार्मासिस्ट तक उपलब्ध नहीं हैं। इस पर उन्होंने मानव व तकनीकी संसाधनों का रेशनलाइजेशन 15 दिन में एसओपी तैयार करने तथा पदों और सेवाओं के संतुलन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
स्वच्छता, दवाइयों और जांच सुविधाओं पर जोर
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी कर्मी ड्यूटी के समय निर्धारित यूनिफॉर्म में रहें। बायोमेडिकल वेस्ट का समुचित निस्तारण किया जाए। ऑक्सीजन, एक्सरे, सामान्य जांचों की पूरी व्यवस्था हो और दवाइयों व उपकरणों की नियमित आपूर्ति हो। साथ ही अस्पतालों में उच्च स्तरीय साफ-सफाई और रंगाई-पुताई की व्यवस्था की जाए। मरीज और तीमारदारों के लिए बेहतर सुविधाएं हों।
फीडबैक में अधिकांश लाभार्थी संतुष्ट
राज्य स्तर की टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट में अधिकांश मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया। जहां कमियां पाई गईं, वहां समय-सीमा में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। पुनः निरीक्षण में भी कमी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
उच्च अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में डॉ. पिंकी जोवल, धीरेन्द्र सिंह सचान, आगरा सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, डॉ. पवन कुमार अरुण, डॉ. एच.डी. अग्रवाल, डॉ. शोभा मिश्रा, अनामिका मिश्रा सहित राज्य, मंडल और जनपद स्तर के अधिकारी भौतिक व वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे।