जीएसटी 12% से घटकर 5% होने से आगरा के पच्चीकारी शिल्प को मिलेगी नई उड़ान

आगरा के संगमरमर पच्चीकारी शिल्प से जुड़े हजारों शिल्पियों और निर्यातकों के लिए बीते बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा। केन्द्र सरकार ने इस कला पर लगने वाला जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया। यह फैसला न केवल शिल्पियों को बड़ी राहत देगा बल्कि विदेशी बाजारों में कमजोर पड़ चुके इस शिल्प को नई जान भी देगा।

Sep 4, 2025 - 12:11
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जीएसटी 12% से घटकर 5% होने से आगरा के पच्चीकारी शिल्प को मिलेगी नई उड़ान
प्रहलाद अग्लवाल, अध्यक्ष, आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर।

-आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैम्बर लम्बे समय से करता आ रहा था इसकी मांग

-यह राहत पूरे उद्योग और आगरा के लिए ऐतिहासिक पल- प्रहलाद अग्रवाल

-घरेलू बिक्री बढ़ेगी और विदेशी बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा आसान होगी- ओसवाल

विदेशी शुल्क और घरेलू टैक्स से जूझ रहा था उद्योग

आगरा का संगमरमर पच्चीकारी उद्योग अपनी बिक्री का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जैसे बड़े निर्यात बाजारों पर निर्भर करता है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय हस्तशिल्प पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने से निर्यात ऑर्डर तेजी से घट गए थे। ऊपर से 12% जीएसटी ने घरेलू बाजार में भी इन उत्पादों को महंगा बना दिया था। दोहरी मार झेल रहे निर्यातक ही नहीं, शिल्पकार भी गहरी मुश्किल में आ गए थे।

लगातार मांग के बाद मिला तोहफा

जीएसटी लागू होने के बाद 2017 से ही आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैम्बर इस कर में कमी की मांग करता आ रहा था। चैम्बर पदाधिकारियों ने दिल्ली और लखनऊ के तमाम चक्कर लगाकर मंत्रियों और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। इन कोशिशों से ही संगमरमर पच्चीकारी को जीएसटी शेड्यूल में अलग उपशीर्षक (HSN 68159990) के तहत दर्ज कराया गया।
विगत एक सितम्बर 2025 को भी चैम्बर अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की थी। उसी वार्ता में दरों में राहत का संकेत मिला था, जो अब हकीकत बन गया।

उद्योग जगत की खुशी

आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैम्बर के अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, ‘यह पूरे उद्योग और आगरा के लिए ऐतिहासिक पल है। हमारी कोशिशों से पहले इस शिल्प को जीएसटी में पहचान मिली और अब दर घटवाने में सफलता मिली। इससे हजारों परिवारों को राहत और इस शिल्प को नई जिंदगी मिलेगी।‘

निर्यातक और कलाकृति के संस्थापक अशोक जैन ओसवाल ने कहा, ‘जीएसटी दर घटने से घरेलू बिक्री बढ़ेगी और विदेशी बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा आसान होगी। अमेरिकी टैरिफ का झटका अब आंशिक रूप से भारतीय बाजार से पूरा किया जा सकेगा। यह निर्णय हमारी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करेगा।‘

आजीविका और विरासत दोनों सुरक्षित

आगरा के लगभग 35,000 शिल्पकार संगमरमर पच्चीकारी से जुड़े हैं, जिनमें अधिकतर वंचित तबकों से आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 12% से घटकर 5% की दर पर आने से उत्पाद आम उपभोक्ताओं और पर्यटकों की पहुंच में होंगे। इससे बिक्री और रोजगार बढ़ेगा।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह कदम न केवल हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी बचाएगा बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को भी सुरक्षित करेगा।

SP_Singh AURGURU Editor