ग्वालियर रोड: सिस्टम की लापरवाही से आमजन बेहाल, सीएम तक पहुंची आवाज़

आगरा। मानसून की दस्तक के साथ ही आगरा के ग्वालियर रोड पर जलभराव ने मानो आफ़त बरसा दी है। सड़क पर पानी ही पानी है और जिम्मेदार महकमे अब तक कागज़ों में योजनाएं घसीटते नजर आ रहे हैं। जिस हाईवे से हजारों वाहन रोज़ाना गुजरते हैं, वह जलभराव की वजह से खतरे के जाल में तब्दील हो गया है।

Jul 3, 2025 - 12:05
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ग्वालियर रोड: सिस्टम की लापरवाही से आमजन बेहाल, सीएम तक पहुंची आवाज़
आगरा-ग्वालियर रोड पर एक नजर। सड़क पर भरे पानी से लगा जाम। यह स्थिति हर रोज और हर वक्त रहती है।

यह हालत आज की नहीं, वर्षों पुरानी है। लेकिन सिस्टम की सुस्ती ऐसी कि नाले तक बनाने की सुध नहीं ली गई। मानसून के बिना भी यहां हाल बेहाल रहते हैं और अब तो बारिश ने हालात और बदतर कर दिए हैं। वाहनचालकों के लिए रोहता और सेवला क्षेत्र से निकलना किसी जोखिम से कम नहीं।

सीएम तक पहुंची गुहार, फिर भी सवाल कायम

ग्वालियर रोड की इस भयावह स्थिति को लेकर हाल ही में किसान नेता श्याम सिंह चाहर और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को समस्या से अवगत कराया, जिस पर सीएम ने शीघ्र समाधान का भरोसा दिया।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब यह समस्या सालों से जस की तस बनी हुई है, तो संबंधित विभागों ने अब तक क्या किया? क्या जिम्मेदार अफसरों को खुद संज्ञान नहीं लेना चाहिए था? क्या नागरिकों को हमेशा नेताओं के सहारे रहना होगा?

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने पहले ही चेताया था

इससे पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार ने इसी मुद्दे पर धरना व अनशन कर प्रशासन को चेताया था। उन्होंने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर अपने स्तर पर सड़क के गड्ढे तक भरवाए थे। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, प्रशासन ने उनकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।

जनता क्यों भुगते सिस्टम की नाकामी?

आख़िर क्यों हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है? लोग रोड टैक्स, टोल टैक्स सब कुछ अदा कर रहे हैं, फिर भी उन्हें खस्ताहाल सड़क और जानलेवा जलभराव झेलना पड़ रहा है। रोज़ाना घंटों का जाम, ट्रैफिक में फंसे एम्बुलेंस, स्कूल वैन और काम पर जाते नागरिक, इन सबकी जिम्मेदारी किसकी है?

सवाल अब जनता का है, जो जानना चाहती है कि क्या इस बार भी सिर्फ आश्वासन मिलेगा या वाकई कार्य होगा? ग्वालियर रोड का जलभराव अब केवल एक इंजीनियरिंग फेल्योर नहीं, बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा का घातक परिणाम बन चुका है।

SP_Singh AURGURU Editor