आगरा शहर में हाईवे ने ली एक और बलि, कितनी और मौतों के इंतजार में है प्रशासन, तैयार हो चुके नॊर्दर्न बाईपास पर भारी और वाणिज्यिक वाहन क्यों नहीं मोड़े जा रहे?

आगरा। आगरा–दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-19) पर शहर के अंदर यातायात अव्यवस्था मंगलवार को एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। शहर से गुजरने वाले इस व्यस्त मार्ग पर ट्रांसपोर्ट नगर फ्लाईओवर पर हुए दर्दनाक हादसे में एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि साथ चल रही उनकी नातिन किसी तरह बच गई। इस हादसे ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि उस गंभीर खतरे की ओर भी इशारा किया है, जिससे रोज़ाना हजारों नागरिक जूझ रहे हैं।

Dec 23, 2025 - 22:10
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आगरा शहर में हाईवे ने ली एक और बलि, कितनी और मौतों के इंतजार में है प्रशासन, तैयार हो चुके नॊर्दर्न बाईपास पर भारी और वाणिज्यिक वाहन क्यों नहीं मोड़े जा रहे?

शहर के बीचोंबीच भारी वाहनों का कहर

एनएच-19 का आगरा शहर से होकर गुजरने वाला हिस्सा लंबे समय से अत्यधिक यातायात दबाव में है। इसका सबसे बड़ा कारण वे भारी और वाणिज्यिक वाहन हैं, जिनका आगरा से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी वे शहर के भीतर से गुजरते हैं। नतीजा लगातार जाम, तेज़ रफ्तार, और बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दिन हो या रात, ट्रक और भारी वाहन शहर की सड़कों को रौंदते रहते हैं। पैदल चलने वालों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सड़क पार करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

नॉर्दर्न बाईपास: समाधान मौजूद, अमल नदारद

14 किलोमीटर लंबा नॉर्दर्न बाईपास 4 दिसंबर 2025 से पूरी तरह चालू हो चुका है। यह गैर-आगरा गंतव्य वाहनों के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक मार्ग है। जिला पर्यावरण समिति की बैठक में जिलाधिकारी द्वारा बाईपास और यमुना एक्सप्रेस-वे के प्रवेश बिंदुओं पर संकेतक लगाने, भारी वाहनों को डायवर्ट करने और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 115 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये फैसले ज़मीन पर उतर रहे हैं? आज का हादसा बताता है कि निगरानी और सख्त क्रियान्वयन की भारी कमी है।

सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी

रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट के. सी. जैन एडवोकेट ने दो टूक कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन, पुलिस और समाज, तीनों की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, नॉर्दर्न बाईपास के चालू होने से आगरा को भारी ट्रैफिक से राहत देने का सुनहरा मौका मिला है। यदि गैर-आगरा गंतव्य वाहनों को नियोजित ढंग से बाईपास की ओर मोड़ा जाए, तो दुर्घटनाएं घटेंगी और यातायात व्यवस्था मानवीय बनेगी।

सवालों के घेरे में प्रशासन

आज की यह मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है। यदि अब भी भारी वाहनों को शहर से बाहर नहीं रोका गया, तो एनएच-19 पर हर दिन कोई न कोई परिवार उजड़ता रहेगा।

SP_Singh AURGURU Editor