जीने की चाह खत्म हो गई थी: आगरा में युवा कारोबारी ने तीसरी कोशिश में कार के अंदर खुद को गोली मारकर दी जान
आगरा। जीने की उम्मीद जब पूरी तरह टूट जाए, तो इंसान मौत को ही रास्ता मान लेता है। आगरा में मानसिक अवसाद से जूझ रहे 30 वर्षीय आयल मिल कारोबारी विश्वजीत ने आखिरकार तीसरे प्रयास में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। रविवार को उसने अपनी कार के भीतर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले वह परिवार को फोन कर साफ कह चुका था कि अब वह जीना नहीं चाहता। परिजन जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
मृतक विश्वजीत (30 वर्ष), शास्त्रीपुरम, आगरा निवासी था और तीन भाइयों में सबसे छोटा तथा अविवाहित था। उसके पिता अमर सिंह रजावत, केनरा बैंक में कार्यरत हैं। रविवार को विश्वजीत घर से यह कहकर निकला था कि वह तेल मिल जा रहा है, लेकिन घर से मात्र 300 मीटर की दूरी पर उसने अपनी रिट्स कार रोक दी।
कार में बैठकर उसने परिजनों को फोन किया और कहा कि अब वह जीना नहीं चाहता। इसके बाद उसने कार के अंदर ही खुद को सिर में गोली मार ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोली चलने की आवाज सुनकर पास में स्थित डीपीएस के गार्ड ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार का शीशा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस जांच में सामने आया कि जिस हथियार से विश्वजीत ने खुद को गोली मारी, वह अवैध तमंचा था।
परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले विश्वजीत एक दुर्घटना में घायल हो गया था और उसका इलाज चल रहा था। इसके बाद से वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। परिवार ने बताया कि वह इससे पहले भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था।
पहले प्रयास में वह दो मंजिला छत से कूद गया था, जबकि दूसरे प्रयास में उसने रेलवे ट्रैक पर जान देने की कोशिश की थी। दोनों बार उसकी जान बच गई, लेकिन इस बार वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था और तीसरे प्रयास में उसने अपनी जान दे ही दी।
विश्वजीत की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। पिता, मां और भाई गहरे सदमे में हैं। इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच की जा रही है।