2050 तक भारत में वृद्धों की ‘सुनामी’: वर्तमान से दोगुनी आबादी संभालने को अभी से तैयार होना होगा, जीएसआई की कॊन्फ्रेंस में यूके के डॊ. अनिल कुमार ने चेताया

आगरा। भारत को आने वाले वर्षों में वृद्धावस्था से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यूके के वरिष्ठ जेरियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने आगरा में कहा कि वर्ष 2050 तक भारत में वृद्धों की संख्या वर्तमान की तुलना में दोगुनी हो जाएगी, जो किसी सुनामी जैसी स्थिति होगी। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को अभी से स्वास्थ्य ढांचे, चिकित्सकीय प्रशिक्षण और नीतियों के स्तर पर खुद को तैयार करना होगा।

Dec 13, 2025 - 18:10
 0
2050 तक भारत में वृद्धों की ‘सुनामी’: वर्तमान से दोगुनी आबादी संभालने को अभी से तैयार होना होगा, जीएसआई की कॊन्फ्रेंस में यूके के डॊ. अनिल कुमार ने चेताया
डॊ. अनिल कुमार। 

क्लीनिकल जांच को प्राथमिकता देने पर जोर

जेरियाट्रिक सोसाइटी ऒफ इंडिया द्वारा आयोजित कार्यशाला (जेसीकॊन 2025) में भाग लेने आगरा आये डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि डॉक्टरों की नई पीढ़ी को वृद्धों के इलाज में क्लीनिकल तरीकों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांचें तभी कराई जानी चाहिए जब पहले मरीज की क्लीनिकल फाइंडिंग पूरी तरह समझ ली जाए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई वृद्ध मरीज बार-बार गिर रहा है तो दवा देने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि उसका कारण ब्लड प्रेशर, पार्किन्सन्स या कोई अन्य बीमारी है।

वृद्धावस्था की बीमारियां वैश्विक समस्या

उन्होंने स्पष्ट किया कि वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे विश्व की साझा समस्या है। ऐसे में विश्व की सभी जेरियाट्रिक सोसायटी के बीच आपसी सामंजस्य और सहयोग अत्यंत आवश्यक है, ताकि अनुभव, शोध और उपचार पद्धतियों को साझा किया जा सके।

भारत को इसलिए होना होगा सतर्क

डॉ. कुमार के अनुसार, यदि समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं को वृद्ध-केंद्रित नहीं बनाया गया, तो आने वाले दशकों में अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि मेडिकल शिक्षा में जेरियाट्रिक मेडिसिन को अधिक महत्व दिया जाए और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वृद्धों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएं।

SP_Singh AURGURU Editor